Bihar Elections 2025: लालू की पार्टी आरजेडी का बड़ा एक्शन — 27 नेताओं की छुट्टी, तेजप्रताप की साली वाली सीट पर भी कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
पटना, 28 अक्टूबर। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अपने संगठन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 27 नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप लगे हैं। आरजेडी के इस फैसले ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है, क्योंकि निष्कासित नेताओं में मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक और कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं। खास बात यह है कि यह कार्रवाई उस वक्त हुई है जब 6 और 11 नवंबर को बिहार में दो चरणों में मतदान होना है।
आरजेडी की सर्जिकल स्ट्राइक: 27 नेताओं पर गिरी गाज
आरजेडी ने जारी एक बयान में कहा कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को समर्थन देने के कारण इन 27 नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कई नेता पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए थे।
निष्कासित नेताओं की प्रमुख सूची में ये नाम शामिल
परसा विधायक छोटेलाल राय,
महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल,
गोविंदपुर के मौजूदा विधायक मोहम्मद कामरान,
पूर्व विधायक राम प्रकाश महतो,
अक्षय लाल यादव, राम सखा महतो, अवनीश कुमार, भगत यादव, मुकेश यादव, संजय राय, कुमार गौरव, राजीव कुशवाहा, महेश प्रसाद गुप्ता, वकील प्रसाद यादव, पूनम देवी गुप्ता, सुबोध यादव, सुरेंद्र प्रसाद यादव, नीरज राय, अनिल चंद्र कुशवाहा, अजीत यादव, मोती यादव, रामनरेश पासवान और अशोक चौहान। आरजेडी की अनुशासन समिति ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने यह फैसला तेजस्वी यादव की अनुमति से लिया है, और भविष्य में किसी भी तरह की गुटबाजी या बगावत पर “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी।
तेजप्रताप यादव की साली की सीट पर भी एक्शन
आरजेडी की कार्रवाई का एक दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें तेजप्रताप यादव की साली डॉ. करिश्मा राय की सीट परसा भी शामिल है। करिश्मा राय इस बार आरजेडी के टिकट पर परसा से मैदान में हैं। वहीं, मौजूदा विधायक छोटेलाल राय ने हाल ही में जेडीयू का दामन थाम लिया, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। दरअसल, करिश्मा राय पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती और वरिष्ठ नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं। राय परिवार इस सीट पर लंबे समय से प्रभावशाली रहा है — दरोगा प्रसाद राय सात बार और उनके बेटे चंद्रिका राय छह बार परसा से विधायक रह चुके हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में चंद्रिका राय ने जेडीयू के टिकट पर आरजेडी के छोटे लाल राय के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें 17,000 से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा था।
रितु जायसवाल की बगावत – आरजेडी की महिला विंग से निर्दलीय तक
निष्कासित नेताओं में सबसे चर्चित नामों में एक हैं रितु जायसवाल। वह आरजेडी की महिला सेल की प्रदेश अध्यक्ष थीं और 2020 में परिहार सीट से पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ी थीं।
उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में शिवहर सीट से भी आरजेडी के टिकट पर मुकाबला किया था। इस बार, पार्टी ने परिहार से स्मिता गुप्ता को उम्मीदवार बनाया, जिससे रितु जायसवाल नाराज़ हो गईं। उन्होंने खुले तौर पर तेजस्वी यादव को पत्र लिखकर कहा था कि स्मिता गुप्ता के नामांकन में अनियमितताएं हैं और उनसे उम्मीदवारी वापस ली जानी चाहिए। जब पार्टी ने उनकी बात नहीं मानी, तो रितु जायसवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। इसके बाद आरजेडी ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया।
गोविंदपुर के विधायक मोहम्मद कामरान भी निकाले गए
आरजेडी ने अपने मौजूदा विधायक मोहम्मद कामरान को भी निष्कासित किया है। कामरान ने 2020 के चुनाव में गोविंदपुर सीट से जीत हासिल की थी और जेडीयू की पूर्णिमा यादव को 33,000 से अधिक वोटों से हराया था। इस बार पार्टी ने कामरान की जगह कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव को उम्मीदवार बनाया है। कामरान ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया, जिससे पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। गोविंदपुर सीट पर आरजेडी की 2020 की जीत ने उसे लंबे अंतराल के बाद वापसी कराई थी, क्योंकि इससे पहले यह सीट कांग्रेस और जेडीयू के पास रही थी।
अंदरूनी असंतोष और टिकट कटौती से भड़की बगावत
आरजेडी में इस समय असंतोष चरम पर है। सूत्रों के मुताबिक, इस चुनाव में पार्टी ने 40 प्रतिशत से अधिक मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं, जिसके कारण कई नेताओं ने या तो बगावत कर दी या अन्य दलों का दामन थाम लिया। पार्टी 243 विधानसभा सीटों में से 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। शेष सीटें गठबंधन सहयोगियों कांग्रेस और वीआईपी को दी गई हैं। कई सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” की स्थिति बन रही है, जहाँ आरजेडी और उसके सहयोगी दोनों उम्मीदवार मैदान में हैं।
राजनीतिक संदेश और संभावित असर
विश्लेषकों का मानना है कि आरजेडी का यह एक्शन तेजस्वी यादव की संगठन पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि “अनुशासनहीनता या पारिवारिक राजनीति से ऊपर संगठन” है। हालांकि, इतना बड़ा निष्कासन चुनाव से पहले आरजेडी के वोटबैंक को नुकसान भी पहुंचा सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ स्थानीय नेताओं का व्यक्तिगत प्रभाव है। तेजस्वी यादव ने साफ कहा है कि “जो पार्टी की विचारधारा के साथ नहीं, उसे आरजेडी में जगह नहीं मिलेगी।”
बिहार चुनावों से पहले आरजेडी का यह फैसला पार्टी की आंतरिक सफाई और अनुशासन पुनर्स्थापन की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन इस कार्रवाई से पार्टी के भीतर की बगावत और असंतोष की दरारें भी खुलकर सामने आ गई हैं। अब देखना यह होगा कि क्या तेजस्वी यादव इस सियासी झंझावात के बीच संगठन को एकजुट रख पाते हैं या बागी नेता चुनावी मैदान में आरजेडी के समीकरण बिगाड़ देंगे। प्रकाश कुमार पांडेय