बिहार चुनाव में बढ़ी हलचल: महागठबंधन और एनडीए में टिकट बंटवारे पर बवाल, कई सीटों पर फ्रेंडली मुकाबला तय
टिकट बंटवारे पर गहराई नाराजगी
बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल इस बार बेहद तनावपूर्ण और दिलचस्प हो गया है। पहले चरण के नामांकन में महज तीन दिन बचे हैं, लेकिन महागठबंधन हो या एनडीए, किसी भी गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है।
राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता खुलेआम नाराजगी जता रहे हैं। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, वाम दलों और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के बीच तनातनी चरम पर है। वहीं एनडीए में भी जेडीयू, एलजेपी (राम विलास) और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा।
- टिकट बंटवारे पर गहराई नाराजगी
- महागठबंधन में फ्रेंडली फाइट
- कांग्रेस-आरजेडी में टकराव तेज
- एनडीए में बढ़ी बेचैनी
- सियासी समीकरणों में नया मोड़
- महागठबंधन में ‘फ्रेंडली फाइट’ की तैयारी
महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग पर चल रही खींचतान के बीच कई सीटों पर फ्रेंडली मुकाबले की स्थिति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक, 10 विधानसभा सीटों — घोषी, मटिहानी, राजापाकड़, फुलवारी, कहलगांव, पालीगंज, मांझी, बछवाड़ा, तरारी और कुटुंबा — पर दो घटक दल आमने-सामने हो सकते हैं। कांग्रेस कम से कम 65 सीटें चाहती है, जबकि तेजस्वी यादव की RJD 58 से ज्यादा देने को तैयार नहीं। इस मतभेद के चलते कई सीटों पर दोहरा उम्मीदवार खड़ा होने की आशंका है। वाम दलों ने भी अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है — CPI-ML ने 18 उम्मीदवार, जबकि CPI ने 6 उम्मीदवार घोषित किए हैं।
कांग्रेस और आरजेडी में टकराव तेज
कांग्रेस का रुख इस बार बेहद सख्त और आत्मविश्वासी बताया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि बिहार में वह अपना जनाधार वापस पा सकती है, इसलिए वह कम सीटों पर समझौता नहीं करना चाहती। दूसरी ओर, RJD का तर्क है कि मुख्य मुकाबला भाजपा और जेडीयू के खिलाफ है, इसलिए सीट वितरण नेतृत्व के हिसाब से होना चाहिए, न कि दबाव के आधार पर। इस टकराव के कारण महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर आज के भीतर कोई समाधान नहीं निकला तो कुछ सीटों पर आंतरिक संघर्ष तय है।
एनडीए में भी नहीं सबकुछ ठीक
महागठबंधन की तरह ही सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भी अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जेडीयू ने एलजेपी के खाते में गई चार सीटों — सोनबरसा, गायघाट, राजगीर और एकमा — पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है। वहीं, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेकुलर) ने भी मखदुमपुर और बोधगया सीटों पर एलजेपी प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इससे साफ है कि एनडीए में भी सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
सियासी समीकरणों में नया मोड़
बिहार का चुनाव इस बार न सिर्फ गठबंधनों की लड़ाई है बल्कि आंतरिक संघर्ष की परीक्षा भी बन गया है। एक ओर महागठबंधन के घटक दल फ्रेंडली फाइट के नाम पर एक-दूसरे से भिड़ने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए के सहयोगी दल भी आपसी असंतोष से गुजर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कई सीटों पर नतीजे मतों के बंटवारे पर निर्भर रहेंगे। फ्रेंडली मुकाबलों के कारण मतदाताओं में भ्रम की स्थिति भी बन सकती है, जिससे तीसरे मोर्चे या निर्दलीय उम्मीदवारों को अप्रत्याशित बढ़त मिल सकती है। अब देखना यह होगा कि इन सियासी उलझनों के बीच बिहार का मतदाता किस ओर झुकता है — गठबंधन की एकता पर या उम्मीदवार की पहचान पर।
बिहार में चुनावी तापमान अपने चरम पर है।
जहां एक ओर महागठबंधन में सीट बंटवारे की खींचतान ने फ्रेंडली फाइट की नौबत ला दी है, वहीं एनडीए में भी चिराग पासवान के खिलाफ नीतीश-मांझी की नाराजगी साफ झलक रही है। राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि क्या दोनों गठबंधन इस अंतर्कलह के बावजूद मतदाताओं को एकजुट रख पाएंगे या बिहार में नई सियासी कहानी लिखी जाएगी। प्रकाश कुमार पांडेय




