बिहार चुनाव 2025: महागठबंधन में डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज, संकटमोचक बने अशोक गहलोत — आज का दिन निर्णायक
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच INDIA गठबंधन (महागठबंधन) सीट बंटवारे के गंभीर संकट में फंसा हुआ है। आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों के बीच तालमेल की कमी के चलते करीब एक दर्जन सीटों पर फ्रेंडली फाइट यानी सहयोगी दलों के बीच सीधी टक्कर की स्थिति बन गई है। इस राजनीतिक असंतुलन को थामने के लिए अब कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मैदान में उतारा है, जिन्हें गठबंधन का “संकटमोचक” बताया जा रहा है।
- महागठबंधन में बढ़ी सीट तकरार
- डैमेज कंट्रोल को उतरे गहलोत
- तेजस्वी से आज मुलाकात तय
- 23 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस
- फ्रेंडली फाइट से घटा भरोसा
- बछवाड़ा सीट बनी पेचीदा मामला
- कांग्रेस की मध्यस्थता की पहल
- एनडीए ने साधा विपक्ष पर निशाना
- गठबंधन एकजुटता की कोशिश जारी
- आज का दिन साबित होगा निर्णायक
पटना पहुंचेंगे अशोक गहलोत, तेजस्वी से मुलाकात आज
सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत बुधवार सुबह पटना पहुंचेंगे और यहां आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में सीट बंटवारे पर बढ़ती असहमति को खत्म करने की कोशिश की जाएगी। कांग्रेस को उम्मीद है कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के अनुभव और संतुलन क्षमता से यह मामला सुलझ सकता है। गहलोत को कांग्रेस हाईकमान ने बिहार चुनावों के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया है और पार्टी का मानना है कि वे संवाद के जरिए गठबंधन में फिर से भरोसा कायम कर सकते हैं।
23 अक्टूबर को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो 23 अक्टूबर को तेजस्वी यादव की अगुवाई में INDIA गठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इस कार्यक्रम में गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा और यह भी संभव है कि इसी मंच से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले गहलोत, आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों के नेताओं के बीच बैठक और समझौते की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
नाम वापसी की अंतिम तारीख से पहले सुलह की कोशिश
बिहार चुनाव के दूसरे चरण के लिए नाम वापसी की आखिरी तारीख 23 अक्टूबर है। इससे पहले गठबंधन के नेता कोशिश कर रहे हैं कि “फ्रेंडली फाइट” वाली सीटों पर आपसी सहमति बन जाए। इस समय चार सीटों पर कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार सीधे आमने-सामने हैं। सूत्रों के अनुसार, पटना में बैठकों की एक श्रृंखला तय की गई है ताकि विवादित सीटों पर किसी एक उम्मीदवार को वापस लेने पर सहमति बनाई जा सके।
पहले चरण की 6 सीटों पर भी बनी रही ‘फ्रेंडली फाइट’
गौरतलब है कि पहले चरण में भी 6 सीटों पर INDIA गठबंधन के घटक दलों में आपसी भिड़ंत देखने को मिली थी। इनमें से एक सीट पर कांग्रेस पहले ही अपना उम्मीदवार वापस ले चुकी है, जबकि बाकी सीटों पर बातचीत जारी है। हालांकि यह साफ है कि सभी सीटों पर समझौता संभव नहीं होगा, लेकिन कोशिश यही है कि नुकसान को न्यूनतम रखा जाए।
बेगूसराय की बछवाड़ा सीट बनी पेच
सबसे विवादित सीटों में से एक है बेगूसराय की बछवाड़ा सीट, जहां कांग्रेस और सीपीआई दोनों ही पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन नेतृत्व के लिए यह सीट “टेस्ट केस” बन गई है। अगर इस पर सहमति बन पाती है, तो बाकी सीटों पर भी सुलह का रास्ता खुल सकता है।
गहलोत बने ‘संकटमोचक’
कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अशोक गहलोत को मध्यस्थता की पूरी जिम्मेदारी दी गई है। गहलोत न केवल तेजस्वी यादव बल्कि वाम दलों और वीआईपी नेताओं से भी मिलेंगे। उनका मकसद है “डैमेज कंट्रोल” और महागठबंधन की एकजुट छवि पेश करना। कांग्रेस को उम्मीद है कि गहलोत अपने अनुभव और संवाद शैली से सहयोगी दलों के बीच भरोसा बहाल कर पाएंगे।
विपक्ष की एकजुटता पर सवाल
महागठबंधन की आंतरिक खींचतान पर एनडीए पहले से ही हमलावर है। भाजपा नेताओं का कहना है कि “जो अपने बीच सीटें तय नहीं कर पा रहे, वे बिहार को कैसे संभालेंगे?” एनडीए ने पहले ही सीट बंटवारे का फार्मूला तय कर लिया है और अब प्रचार पर फोकस कर रहा है। वहीं INDIA गठबंधन अभी तक उम्मीदवार चयन और तालमेल में उलझा हुआ है।
23 अक्टूबर: निर्णायक दिन
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 23 अक्टूबर का दिन INDIA गठबंधन के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगा। अगर नाम वापसी की तारीख तक ज्यादातर सीटों पर सहमति बन जाती है, तो गठबंधन फिर से एकजुट संदेश दे पाएगा। अन्यथा, फ्रेंडली फाइट की वजह से गठबंधन की साख और मतदाताओं में भ्रम दोनों बढ़ सकते हैं।
एकता या अंतःकलह – किसका पलड़ा भारी?
फिलहाल स्थिति यह है कि INDIA गठबंधन की बैठकें लगातार जारी हैं, परंतु पूर्ण सहमति बन पाना मुश्किल दिख रहा है। बावजूद इसके, अशोक गहलोत की एंट्री से एक उम्मीद जरूर जगी है कि शायद बिहार में विपक्षी एकता फिर से पटरी पर लौट आए। अब निगाहें 23 अक्टूबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं — जहां तय होगा कि महागठबंधन में “एकता” की जीत होती है या अंतःकलह का असर कायम रहता है।





