बिहार विधानसभा चुनावों मे इस बार कई सारे रिकार्ड बने। बिहार के नतीजे आने के साथ ही बिहार की राजनीति में कई सारी तस्वीरें बदल गई। सबसे पहले तो बिहार में विधआनसभा की तस्वीर बदल गई। 206 विपक्ष की सीटों के साथ कोने में विपक्ष की केवल 35 सीटें दिखआई देंगी। इसके साथ साथ बिहार की राजनीति में इन नतीजो के साथ बड़ा बदलाव देखने को मिल वो मिला निर्दलीय विधायकों का राजनीति के बदलते समीकरणों को देकने को मिला । बिहार विधआनसभा में धीरे धीरे निर्दलीय विधायकों की संखअया कम हुई और 2025 में पूरी तरह से खत्म हो गई। आंकड़ो में देखें तो एक समय में बिहार विधानसभा में तीस से ज्यादा निर्दलीय विधायक हुआ करते थे। लेकिन अब यही विधायक 2000 से लगातार कम होने लगे । 2010 में इनकी संख्या 1 तक आई और 2025 में जीरो हो गई। मतलब मतदाता अब किसी तीसरी ताकत को नही चुनना चाहता । चुनाव दिव्पक्षीय ही होते दिखाई दे रहे हैं। हांलाकि ये चुनाव दोनो गठबंधनों के बीच था लेकिन 2025 आते आते बिहार के मतदाता ने जता दिया कि उनका वोट किसी तीसरी ताकत के साथ नहीं है।
इसके अलावा भी बिहार विधानसभा चुनावों में कई तरह के बड़े बदलाव देखने को मिले जिसने बिहार के राजनैतकि परिदृश्य को तो बदल ही दिया साथ ही साथ कई सारे रिकार्ड भी दर्ज कराए, जिसमें बीजेपी की बिहार में पहली बार सबेस बड़ा दल बनना। निर्दलीय विधायकों की संख्या जीरो हो जाना। एऩडीए का डबल सेंचुरी लगाना और विपक्षी गठबंधन का केवल 35 सीटों पर सिमट जाना सभी एक रिकार्ड है। इन सबके बीच एक बड़ा रिकार्ड है वो ये है कि नीतिश कुमार ने लगातार 10 वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा परिवार वाद को जनता ने नकार दिया ये रिकार्ड भी इन चुनावों में बना। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दशा और दिशा भी तय कर रहे हैं। चुनावों के नतीजे आते ही आरजीडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप ने कहा कि जनता ने परिवारवाद को नकार दिया है वही नतीजों के साथ सियासी बदलाव तो दिख रहे थे लेकिन बिहार के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार की फूट भी दिखने लगी। आर जे डी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी ने अचानक परिवार और पटना दोनो को ही छोड़ दिया और जाते जाते मीडिया को बयान दिया कि पार्टी की हालत बाहरी लोगों के चलते खराब हुई। तेजस्वी ने कई सारे जयचंदो के साथ पार्टी के फैसले लेने शुरू कर दिए। रोहिणी ने परिवार पर मारपीट के आरोप भी लगाए इसके साथ ही जाते जाते रोहिणी ये भी एलान कर गई कि उनका पार्टीऔर परिवार से कोई लेना देना नहीं। अकेले रोहिणी ही नही हार के बाद लालू की तीन और बेटियों ने पटना छोड़ दिया। कुल मिलाकर परिवार की फूट खुलकर सामने आ गई । बिहार के नतीजों ने आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दशा और दिशा भी तय कर रहे हैं।