Bihar Election 2025: सीटों पर सियासी शर्तें — चिराग पासवान को मनाने में जुटी BJP, जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, लेकिन सियासी गठबंधनों के भीतर समीकरण अभी तक तय नहीं हो पाए हैं। एनडीए हो या महागठबंधन, दोनों खेमों में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी है। खासतौर पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और बीजेपी के बीच सीटों को लेकर बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर है।
- NDA में सीट बंटवारे की खींचतान
- चिराग पासवान की बड़ी शर्तें
- दिल्ली में बीजेपी-एलजेपी वार्ता
- मांझी भी मांग रहे ज्यादा सीटें
- तीन दिन में तय होगा समीकरण
10 अक्टूबर से पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया शुरू होनी है और ऐसे में गठबंधन को जल्द फैसला लेना ही होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चिराग की शर्तें मानने पर एनडीए में नई शक्ति संतुलन की शुरुआत हो सकती है।
NDA में सीट बंटवारे की खींचतान
एनडीए के घटक दलों — बीजेपी, जेडीयू, हम (सेक्युलर) और एलजेपी (आर) — के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने रविवार को पटना में जेडीयू व हम के नेताओं से बातचीत के बाद दिल्ली लौटकर चिराग पासवान से मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक, एनडीए नेतृत्व चाहता है कि सीटों का बंटवारा आपसी सहमति से तय हो ताकि चुनाव प्रचार बिना देरी के शुरू किया जा सके।
चिराग पासवान की बड़ी शर्तें
चिराग पासवान ने बीजेपी के सामने 45 से 54 विधानसभा सीटों की मांग रखी है। फिलहाल बीजेपी उन्हें 20 से 25 सीटें देने के पक्ष में है। एलजेपी (आर) का तर्क है कि पिछले लोकसभा चुनाव में जिन 5 लोकसभा सीटों पर उन्होंने जीत हासिल की थी, उन प्रत्येक संसदीय क्षेत्रों में कम से कम दो विधानसभा सीटें उन्हें दी जाएं। चिराग ने साथ ही अपने दो भरोसेमंद नेताओं — हुलास पांडेय और राजू तिवारी — के लिए क्रमशः ब्रह्मपुर और गोविंदगंज सीटों की मांग भी रखी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में हुलास पांडेय ने ब्रह्मपुर से चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं गोविंदगंज सीट इस समय बीजेपी के पास है, जहां से राजू तिवारी तीसरे स्थान पर रहे थे।
दिल्ली में बीजेपी-एलजेपी वार्ता
दिल्ली में हुई बैठक में बीजेपी नेताओं ने चिराग की मांगों को विस्तार से सुना। करीब एक घंटे चली इस बैठक में धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े और बिहार के मंत्री मंगल पांडेय मौजूद रहे। बैठक में न सिर्फ सीटों के बंटवारे पर बल्कि चुनाव के मुख्य मुद्दों और रणनीति पर भी चर्चा हुई। बीजेपी नेताओं ने चिराग को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर पार्टी उच्च स्तर पर चर्चा करेगी और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संभावना है कि अगले एक-दो दिनों में चिराग की वरिष्ठ बीजेपी नेताओं के साथ एक और बैठक हो सकती है। हालांकि बुधवार को चिराग अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर खगड़िया में रहेंगे, इसलिए किसी ठोस फैसले की उम्मीद गुरुवार या शुक्रवार तक जताई जा रही है।
मांझी भी मांग रहे ज्यादा सीटें
उधर, एनडीए के एक और घटक हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी 15 सीटों की मांग कर रहे हैं। मांझी ने मीडिया से कहा कि, “हर क्षेत्रीय पार्टी की यह आकांक्षा होती है कि वह राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाए।” बीजेपी सूत्रों के अनुसार, उन्हें 10 सीटें देने पर सहमति बन सकती है। जिनमें से 7 सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं।
इन खींचतान भरे समीकरणों के बीच एनडीए में सीट वितरण का गणित हर दिन बदल रहा है। बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि वह सहयोगियों की नाराजगी के बिना चुनावी संतुलन बनाए रखे।
तीन दिन में तय होगा समीकरण
- चुनाव आयोग ने सोमवार को दो चरणों में चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है।
- पहले चरण की अधिसूचना: 10 अक्टूबर
- नामांकन की अंतिम तिथि: 17 अक्टूबर
- दूसरे चरण की अधिसूचना: 13 अक्टूबर
- नामांकन की अंतिम तिथि: 20 अक्टूबर
इसका मतलब यह है कि एनडीए के पास सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला करने के लिए केवल तीन दिन का समय बचा है। बीजेपी अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चिराग और मांझी जैसे सहयोगियों को साथ लेकर चुनाव प्रचार का आरंभ किया जाए ताकि विपक्ष — महागठबंधन — के मुकाबले कोई भ्रम की स्थिति न बने।
राजनीतिक संदेश स्पष्ट
बिहार की सियासत में चिराग पासवान का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। बीजेपी भी जानती है कि युवा मतदाताओं और पासवान समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए एलजेपी (आर) की भूमिका अहम है। 2020 में भले ही उन्होंने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था, लेकिन अब वे गठबंधन का हिस्सा हैं और अपने हिस्से की ‘इज्जतदार भागीदारी’ चाहते हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट बंटवारे की उलझन अब निर्णायक दौर में है। बीजेपी-चिराग पासवान की बातचीत से गठबंधन का भविष्य तय होगा। अगर चिराग की शर्तों पर सहमति बनती है तो एनडीए मजबूती के साथ मैदान में उतरेगा, वरना यह खींचतान राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब निगाहें गुरुवार की बैठक पर हैं — जब तय होगा कि एनडीए में सब ठीक है या सियासत का नया मोड़ आने वाला है। प्रकाश कुमार पांडेय




