बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) इस बार पहले की तुलना में दिलचस्प होते दिखाई दे रहे हैं. वैसे तो मुख्य मुकाबला बीजेपी (BJP) के एनडीए (NDA) गठबंधन औऱ आरजेडी(RJD) , कांग्रेस के महागठबंधन के बीच है। इन सबके बीच इस बार पीके(PK) की जनसुराज सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है। वहीं औवेसी फेक्टर को भी कम नहीं आंका जा सकता है। औवेसी (AIMIM) और पीके(PK) भी जीत के समीकरणों को बदल सकते हैं। पिछली बार के चुनाव में औवेसी फैक्टर का असर देखने को मिला था। औवेसी की नजर अल्पसंख्यक वोटर पर है और बिहार के दोनों ही मुख्य दलों में अल्पसंख्यक वोटों के साथ राजनैतिक समीकरण जुटाने और वोट बैंक कैश कराने की होड़ लगी रहती है। ऐसे में एआईएमआईएम(AIMIM) की मौजूदगी दोनों ही दलों के लिए चुनौती साबित हो सकती है। पिछली बार कटिहार और किशनगंज जैसे इलाके में औवेसी की पार्टी ने पांच सीटों पर कब्जा किया हांलाकि इनमें से चार विधायकों ने पार्टी छोड़कर आरजेडी का झंडा उठा लिया। वही प्रशांत कुमार की जनसुराज पार्टी भी इस बार के चुनावों में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। अगर ऐसा होता है तो दोनों ही दलों के वोट कटने की आशंका बनी रहेगी। दरअसल जनसुराज पार्टी ने उपचुनावों में अपने उम्मीदवार उतार के कोई सीट तो हासिल नहीं कि लेकिन जनसुराज के चलते आरजेडी के हाथ से कई परंपरागत सीटें निकल गईं। बिहार ( Bihar Assembly Election 2025) चुनाव साल के अंत में है ऐसे मे चुनावी चौसर बिछने पर ही कौन सी पार्टी क्या चाल चल रही है ये पता चलेगा।




