बिहार कांग्रेस संकट में और राहुल गांधी दिल्ली में इमरती छान रहे हैं…!
कहा जाता है— “देर आए, दुरुस्त आए।” लेकिन कांग्रेस के मौजूदा हालात देखकर यह कहावत भी बेअसर लगती है। बॉलीवुड के पुराने गीत “आग लगी हमारी झोपड़िया में, हम गाएं मल्हार…” की तर्ज़ पर पार्टी के भीतर संकट की लपटें उठ रही हैं, और दिल्ली में बैठे उसके शीर्ष नेता इस आग पर पानी डालने के बजाय, इमरती और बेसन के लड्डू बनाने का हुनर सीख रहे हैं।
- बिहार कांग्रेस में गहराया बड़ा संकट
- सीट बंटवारे पर बढ़ा बवाल
- महागठबंधन की एकता पर सवाल
- राहुल गांधी दिल्ली में व्यस्त
- मिठाई बनाते दिखे राहुल गांधी
- कांग्रेस-आरजेडी आमने सामने आईं
- टिकट बंटवारे में भ्रष्टाचार के आरोप
- राहुल की गैरहाज़िरी से कार्यकर्ता नाराज़
- बीजेपी बोली, विपक्षी गुटों में दरार
- क्या राहुल संभाल पाएंगे हालात?
बिहार विधानसभा चुनाव से तीन हफ्ते पहले कांग्रेस पार्टी भारी संकट में है— टिकट बंटवारे पर घमासान, सीट शेयरिंग पर असहमति, और महागठबंधन के भीतर खींचतान अपने चरम पर है। वहीं, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पुरानी दिल्ली की मशहूर ‘घंटेवाला मिठाई’ पर जाकर लड्डू बनाते हुए वीडियो जारी कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब बिहार में सियासी घर जल रहा है, तब राहुल गांधी “दिवाली की मिठास” में क्यों खोए हैं?
बिहार में कांग्रेस की डूबती नाव
बिहार में इस बार भी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल, VIP) के बीच समन्वय की भारी कमी दिख रही है। नामांकन की तारीख गुजर जाने के बाद भी सीट शेयरिंग का फार्मूला तय नहीं हो पाया। कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार कम से कम 6 सीटों पर आमने-सामने हैं, जबकि 4 सीटों पर वाम दलों के साथ टकराव की स्थिति बनी है।
वहीं एनडीए (भाजपा, जेडीयू, एलजेपी-आरवी, हम-एस) ने सीटों का बंटवारा काफी पहले निपटा लिया— जेडीयू और भाजपा 101-101 सीटों पर, एलजेपी 29 सीटों पर। महागठबंधन की यह स्थिति देखकर बीजेपी ने इसे “महा-डिले-बंधन” करार दिया है।
2020 में बवाल की जड़ें
बिहार कांग्रेस में कलह की शुरुआत 2020 विधानसभा चुनाव से हुई। तब पार्टी को 70 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार कांग्रेस ने ज्यादा हिस्सेदारी की मांग की। राहुल गांधी के करीबी कृष्णा अल्लावरू को बिहार प्रभारी बनाया गया, जिन्होंने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और ‘पलायन रोक यात्रा’ जैसे अभियान चलाए। मगर सीट बंटवारे में वे आरजेडी से भिड़ गए।
आरजेडी ने कांग्रेस की कई पारंपरिक सीटों— जैसे कहलगांव और बछवाड़ा— को अपने खाते में डाल लिया। वहीं कांग्रेस ने अड़ियल रुख अपनाते हुए 60 सीटों की मांग पर जोर दिया।
18 अक्टूबर को नामांकन की आखिरी तारीख गुजर गई, लेकिन जब तक सूची आई, कई सीटों पर महागठबंधन के घटक एक-दूसरे से भिड़ गए। राज्य अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल नेता शकील अहमद खान और प्रभारी अल्लावरू पर टिकट बंटवारे में गड़बड़ी और पैसों के लेन-देन के आरोप लगने लगे।
‘टिकट बेचने’ के आरोप और बगावत
कांग्रेस विधायक मोहम्मद आफाक आलम का टिकट काटे जाने के बाद पार्टी में खुली बगावत हो गई। आफाक ने वीडियो जारी कर कहा कि “पार्टी के भीतर टिकट बेचे जा रहे हैं।”
उन्होंने राज्य अध्यक्ष राजेश राम, प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, और सांसद पप्पू यादव पर गंभीर आरोप लगाए। पप्पू यादव पर यह भी आरोप लगा कि वे बिना संगठन की अनुमति के टिकट बंटवा रहे हैं।
एक वरिष्ठ नेता ने तंज कसा— “बिहार कांग्रेस अब ‘टीम हाईकमान’ नहीं, बल्कि ‘टीम टिकट माफिया’ बन गई है।”
राहुल गांधी क्या कर रहे हैं?
राहुल गांधी ने अगस्त में बिहार में जोरदार शुरुआत की थी। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान वे तेजस्वी यादव के साथ मंच साझा कर रहे थे, बेरोजगारी और प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे उठा रहे थे।
लेकिन सितंबर के बाद उनका रुख बदल गया। पहले वे दक्षिण अमेरिका के दौरे पर निकल गए, जहाँ उन्होंने 15 दिन विभिन्न कार्यक्रमों में बिताए। बिहार कांग्रेस मीटिंग्स स्थगित होती रहीं।
वापस लौटे तो हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दौरों में व्यस्त हो गए।
फिर 20 अक्टूबर को उन्होंने पुरानी दिल्ली की ‘घंटेवाला मिठाई’ में लड्डू बनाते हुए वीडियो शेयर किया— “दिवाली की असली मिठास रिश्तों में है।”
यह वीडियो वायरल हुआ, लेकिन बिहार में इसे ‘राहुल की गैर-जिम्मेदारी’ के रूप में देखा गया।
केशव प्रसाद मौर्य ने तंज किया— “राहुल दिल्ली में लड्डू छान रहे हैं, जबकि उनकी पार्टी बिहार में पिघल रही है।”
वहीं बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा— “बिहार चुनाव सिर पर है, लेकिन राहुल की प्राथमिकता मिठाई बनाना है।”
राहुल बिहार से गायब क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति के पीछे चार प्रमुख कारण हैं। कमजोर संगठन: बिहार कांग्रेस का जमीनी ढांचा कमजोर है। राहुल को पता है कि आरजेडी का दबदबा इतना है कि कांग्रेस “छोटे भाई” से ज्यादा भूमिका नहीं निभा सकती।
आंतरिक दबाव: बिहार कांग्रेस ने राहुल से कहा था कि 60 सीटों से कम पर समझौता न किया जाए। लेकिन आरजेडी इसके लिए राजी नहीं हुई। राहुल न तो दबाव बना सके, न समाधान निकाल पाए।
इमेज बिल्डिंग की रणनीति: राहुल खुद को ‘जनसाधारण नेता’ के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहते हैं। इसलिए कभी वे किसानों के बीच दिखते हैं, कभी मिठाई बनाते हुए। लेकिन इससे उनकी ‘राजनीतिक गंभीरता’ पर सवाल उठने लगे हैं।
तेजस्वी से टकराव
राहुल और तेजस्वी के बीच सीएम फेस को लेकर मतभेद हैं। कांग्रेस तेजस्वी को आधिकारिक चेहरा मानने को तैयार नहीं, जबकि आरजेडी यही चाहती है। इस वजह से राहुल ने दूरी बना ली है।
असर और आगे की राह
इस पूरे विवाद के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने महागठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस पर ‘राजनीतिक साजिश’ के आरोप लगे हैं। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी का कहना है — “महागठबंधन का जहाज भीतर से ही टूट चुका है। कांग्रेस में नेतृत्व का संकट चरम पर है।
ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी आख़िर समय पर मैदान में उतरेंगे, या बिहार की जंग बिना कप्तान के ही लड़ी जाएगी?
फिलहाल कांग्रेस की स्थिति ‘आग लगी झोपड़िया में, हम गाएं मल्हार’ जैसी ही लग रही है। जहाँ संगठन बिखर रहा है, और नेता इमरती में डूबे हैं। प्रकाश कुमार पांडेय





