बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासत गरमाने लगी है। एनडीए के सहयोगी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास जीत का अच्छा मौका है, लेकिन इसके लिए पिछली गलतियों से सबक लेना होगा और आत्मघाती निर्णयों से बचना होगा।
एनडीए की संभावनाएं और कुशवाहा का डर
पटना में ओबीसी नेता जगदेव प्रसाद की पुण्यतिथि पर आयोजित एक रैली में बोलते हुए कुशवाहा ने कहा “अगर आत्मघाती फैसलों से बचा गया तो एनडीए की जीत तय है। लोकसभा चुनाव में हमने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ गलतियों की वजह से बेहतर नतीजे नहीं मिले।” उन्होंने साफ किया कि तैयारी मजबूत है और जनता का रुझान भी एनडीए के पक्ष में है, लेकिन छोटे-छोटे फैसले भी हार-जीत तय कर सकते हैं। इतना ही नहीं कुशवाहा का यह बयान साफ संकेत देता है कि उन्हें एनडीए के भीतर आपसी तालमेल और उम्मीदवार चयन की रणनीति पर चिंता है।
काराकाट हार और आरोप
2024 लोकसभा चुनाव में कुशवाहा काराकाट सीट से तीसरे स्थान पर रहे। जबकि 2014 में यही सीट उन्होंने जीती थी। कुशवाहा ने आरोप लगाया कि बीजेपी की बिहार इकाई के कुछ नेताओं ने भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने में मदद की। इससे वोट बंटे और कम्युनिस्ट पार्टी लिबरेशन के उम्मीदवार राजा राम कुशवाहा को जीत मिली। हालांकि बाद में एनडीए ने उन्हें राज्यसभा भेजकर संतुलन बनाने की कोशिश की।
परिसीमन का मुद्दा
उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के लिए संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन की मांग दोहराई। उनका कहना है कि बिहार की जनसंख्या को देखते हुए लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 होनी चाहिए। सही परिसीमन होने पर राज्य को राजनीतिक और विकास के लिहाज से फायदा होगा। यह मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा बनने की संभावना रखता है।
जेडीयू और राजनीतिक विरासत पर हमला
कुशवाहा ने अप्रत्यक्ष रूप से नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल का नेतृत्व उसकी राजनीतिक विरासत और कार्यकर्ता आधार से विकसित होना चाहिए, न कि वंशवाद से। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब नेतृत्व जनता से कट जाता है तो पार्टी का हश्र वही होता है जो कभी ताकतवर रही उस पार्टी का हुआ।
वोटर अधिकार यात्रा पर तंज
कुशवाहा ने विपक्षी नेता तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा “तेजस्वी यादव ने गंगा किनारे अपने परिवार और करीबी लोगों के साथ जश्न मनाया, लेकिन डांस करने से सफलता तय नहीं होती। अगर ऐसा होता तो देश के सबसे अच्छे डांसर प्रधानमंत्री बन चुके होते।” उनका यह तंज सीधे-सीधे आरजेडी और उसके अभियान पर सवाल खड़ा करता है। कुशवाहा का बयान दो तरफा संदेश देता है कि एनडीए को चेतावनी कि अगर उम्मीदवार चयन और रणनीति में गलतियां दोहराई गईं तो नुकसान हो सकता है। विपक्ष पर हमला कि उनके अभियान और नेतृत्व में गंभीरता की कमी है। साफ है कि बिहार चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा न सिर्फ एनडीए की रणनीति में अहम किरदार निभाएंगे, बल्कि भीतर से लगातार दबाव भी बनाए रखेंगे। अब देखना यह होगा कि बीजेपी और जेडीयू उनकी चिंताओं को कितना गंभीरता से लेती हैं।




