NDA के पंजे पर महागठबंधन का नहला…लालू भी एक्टिव..जानें बिहार चुनाव 2025 के लिए क्या है ‘तेजस्वी प्लान’?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में सरगर्मी तेज हो चुकी है। एक तरफ सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन भी ‘कुनबा विस्तार’ की रणनीति पर काम कर रहा है। आरजेडी नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव लगातार अपने प्लान को धार दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार सिर्फ तेजस्वी ही नहीं, बल्कि लालू प्रसाद यादव भी एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं।
30 सितंबर को अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन होना है और माना जा रहा है कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में चुनाव कार्यक्रम का ऐलान हो जाएगा। ऐसे में दोनों गठबंधन एक्टिव मोड में हैं। यात्राओं, रैलियों और सीट शेयरिंग पर बैठकों का दौर जारी है। लेकिन विपक्षी खेमे में जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है— ‘तेजस्वी प्लान’ और महागठबंधन का लगातार बढ़ता कुनबा।
2020 से 2025: महागठबंधन की सीख और रणनीति
2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को 243 में से 110 सीटें मिली थीं। सरकार बनाने के लिए वह जादुई आंकड़े से महज 12 सीट पीछे रह गया था। वोटों का अंतर भी करीब 11,500 का ही था। इन नतीजों ने आरजेडी और तेजस्वी यादव को सिखाया कि चुनाव जीतने के लिए छोटे-छोटे वोट ब्लॉक्स और कुछ खास सीटों पर जीत-हार का अंतर निर्णायक साबित हो सकता है।
तेजस्वी यादव इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। महागठबंधन की हार-जीत का विश्लेषण कर उन्होंने पाया कि बछवारा सीट पर भाकपा उम्मीदवार 484 वोट (0.3%) से हारे थे। इसी तरह आधा दर्जन सीटों पर हार का अंतर 1 से 2.5% के बीच रहा। यही वजह है कि अब उनका फोकस वोट बेस के माइक्रो मैनेजमेंट पर है।
NDA बनाम महागठबंधन: संख्याबल की जंग
- वर्तमान में एनडीए में पांच दल हैं
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- जनता दल यूनाइटेड (JDU)
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)
- हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम)
- राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा (RLM)
महागठबंधन में पहले से मौजूद दल थे
आरजेडी
कांग्रेस
माकपा
भाकपा
भाकपा (माले)
अब इसमें तीन और दल शामिल हो चुके हैं
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी)
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम)
राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी)
यानी महागठबंधन का कुनबा आठ तक पहुंच चुका है। चर्चा यह भी है कि इंडियन इंकलाब पार्टी (IIP) की एंट्री अंतिम दौर में है। अगर यह शामिल होती है, तो विपक्षी गठबंधन नौ दलों का हो जाएगा।
छोटे वोट ब्लॉक्स पर ‘तेजस्वी प्लान’
तेजस्वी यादव की रणनीति साफ है—छोटे-छोटे वोट बैंक को जोड़ना और क्लोज कॉन्टेस्ट वाली सीटों को टारगेट करना। वीआईपी के जरिये सहनी और निषाद समुदाय (करीब 9.65% आबादी) को साधा जा रहा है। जेएमएम से अनुसूचित जनजाति (1.68%) वोट बैंक को जोड़ने की कोशिश है। आरएलजेपी (पशुपति पारस) को लेने के पीछे भी महादलित और अन्य पिछड़े वर्ग के वोट पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति है। पान समाज (करीब 1.7% आबादी) पर भी महागठबंधन की नजर है। तेजस्वी दरअसल बीजेपी के उस फार्मूले को ही अपनाते दिख रहे हैं, जिसमें छोटे-छोटे समुदायों को साथ जोड़कर बड़ा चुनावी गणित साधा जाता है।
लालू यादव की एक्टिव एंट्री
पिछले चुनाव के वक्त लालू यादव जेल में थे। उस दौरान पूरा चुनावी अभियान तेजस्वी यादव के कंधों पर था। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। लालू यादव अब सक्रिय राजनीति में लौट आए हैं। वे पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में शामिल हो रहे हैं। वैनिटी वैन से वे लगातार आरा, मोतिहारी और अन्य जिलों में कार्यक्रमों में जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी वे सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी पर हमला बोल रहे हैं। यानी, तेजस्वी जहां संगठन और रणनीति को संभाल रहे हैं, वहीं लालू यादव पुराने वोट बैंक और कोर सपोर्ट बेस को जोड़ने में लगे हैं।
सीट शेयरिंग पर पेच
हालांकि, महागठबंधन का कुनबा बढ़ने से एक नई चुनौती भी सामने आई है—सीट शेयरिंग। कांग्रेस, लेफ्ट और अब वीआईपी-आरएलजेपी-जेएमएम जैसे दल भी हिस्सेदारी की मांग करेंगे। 2020 में आरजेडी को 144 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार यह संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में सीट बंटवारे पर महागठबंधन को बड़ा संकट झेलना पड़ सकता है।
‘बिहार अधिकार यात्रा’ से चुनावी आगाज़
तेजस्वी यादव ने 16 सितंबर से ‘बिहार अधिकार यात्रा’ शुरू कर दी है। यह यात्रा जहानाबाद से शुरू हुई जो अलग-अलग जिलों में जाएगी। इस यात्रा का मकसद जनता से सीधा संवाद करना और नीतीश सरकार की नाकामियों को उजागर करना है। तेजस्वी इस यात्रा के जरिए बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। वहीं, लालू यादव अपनी मौजूदगी और अनुभव से इस अभियान को धार देने में जुटे हैं।
एनडीए की चुनौतियां
एनडीए भले ही सत्ता में है, लेकिन चुनौतियां उसके सामने भी कम नहीं हैं। जेडीयू और बीजेपी के बीच भरोसे की खाई लगातार चर्चा में रहती है। लोजपा (रामविलास) और आरएलजेपी (पारस) में खींचतान भी समीकरण बिगाड़ सकती है। नीतीश कुमार की छवि पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं, खासकर उनकी बार-बार की राजनीतिक बाजीगरी को लेकर।
बिहार चुनाव 2025 महज एनडीए बनाम महागठबंधन की लड़ाई नहीं, बल्कि रणनीति और गठबंधनों की जंग बनने जा रहा है। तेजस्वी यादव ने छोटे-छोटे वोट ब्लॉक्स को जोड़कर बड़ा गणित साधने का प्लान बनाया है। लालू यादव की सक्रियता महागठबंधन के लिए ऊर्जा का काम करेगी। वहीं, एनडीए अपनी सत्ता और संगठन के दम पर चुनावी जंग लड़ने को तैयार है। आने वाले हफ्तों में सीट शेयरिंग, यात्राओं और घोषणाओं के जरिए दोनों खेमों की असली तस्वीर साफ होगी। लेकिन एक बात तय है— बिहार चुनाव 2025 एक बार फिर कांटे की टक्कर वाला चुनाव होने जा रहा है। (प्रकाश कुमार पांडेय)





