बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे अमित शाह, सीट बंटवारे के बाद बिहार में सियासी तापमान बढ़ा

बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे अमित शाह, सीट बंटवारे के बाद बिहार में सियासी तापमान बढ़ा

बिहार की सियासत में आज का दिन बेहद अहम रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय बिहार दौरे पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। यह मुलाकात इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि एनडीए में सीटों का बंटवारा पहले ही तय हो चुका है, और अब दोनों दल — भाजपा (BJP) और जेडीयू (JDU) — 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं।

अमित शाह का तीन दिवसीय दौरा

अमित शाह शुक्रवार सुबह पटना पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर बीजेपी नेताओं ने उनका स्वागत किया। अपने इस दौरे में शाह कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे, पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और पटना के प्रबुद्ध सम्मेलन (Intellectual Meet) को भी संबोधित करेंगे। इस दौरान वे राज्य में चल रहे एनडीए के मिशन 2025 की रूपरेखा पर भी चर्चा करेंगे।
बीजेपी की ओर से इसे ‘संगठन सशक्तिकरण अभियान’ का हिस्सा बताया जा रहा है, जबकि सियासी हलकों में इसे नीतीश कुमार के साथ रणनीतिक सामंजस्य के रूप में देखा जा रहा है।

पटना में नीतीश से मुलाकात

अमित शाह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात की। करीब 40 मिनट चली इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच सीट बंटवारे, उम्मीदवार चयन और संयुक्त प्रचार रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और दोनों नेताओं ने यह संकेत दिया कि एनडीए में ‘सब कुछ ठीक’ है। बैठक के बाद शाह ने मीडिया से कहा “एनडीए एकजुट है और बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएंगे। नीतीश जी के साथ हमारा पुराना रिश्ता भरोसे पर आधारित है।” नीतीश कुमार ने भी कहा कि बिहार में विकास का एजेंडा ही चुनाव का मुख्य मुद्दा रहेगा। उन्होंने कहा हमने साथ मिलकर काम किया है और आगे भी बिहार की तरक्की के लिए मिलकर काम करेंगे।

101-101 सीटों पर सहमति बनी

एनडीए में सीट बंटवारे की गुत्थी हाल ही में सुलझी थी। बीजेपी और जेडीयू के बीच 101-101 सीटों पर समझौता हुआ है। बाकी 41 सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं — जिनमें हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) और कुछ क्षेत्रीय सहयोगी शामिल हैं। इस फॉर्मूले पर नीतीश और शाह की मुलाकात ने मुहर लगा दी है। जानकारों का कहना है कि अब दोनों पार्टियों का फोकस उम्मीदवार चयन और संयुक्त प्रचार अभियान पर रहेगा।

एनडीए में तालमेल पर चर्चा

बीजेपी और जेडीयू के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक मतभेद रहे हैं। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से दोनों दलों ने एक बार फिर साझा मोर्चा बनाकर राज्य में विपक्ष के खिलाफ तालमेल बिठाया है। इस मुलाकात से संदेश साफ है कि एनडीए के अंदर किसी तरह की दरार नहीं है, और दोनों दल अब चुनावी मोड में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अमित शाह का यह दौरा भरोसा बहाली और जमीनी रणनीति मजबूत करने की कवायद है। एनडीए की कोशिश है कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ को बिहार में मजबूत पकड़ न बनाने दी जाए।

बिहार चुनावी रणनीति पर फोकस

अमित शाह की बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। वहीं जेडीयू की ओर से विजय चौधरी और संजय झा जैसे नेता भी बैठक में शामिल हुए। बैठक के दौरान राज्य के कई संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी का फोकस सीमांचल और मिथिलांचल पर है, जबकि जेडीयू मध्य और दक्षिण बिहार में अपने संगठन को मजबूत कर रही है। अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा “बिहार के लोग जाति नहीं, विकास की राजनीति चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार में विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा।”

विपक्ष पर भी साधा निशाना

अमित शाह ने इस दौरान विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) में न तो नेता तय है और न ही नीति। “विपक्ष सिर्फ सत्ता पाने के लिए एकजुट हुआ है, जबकि एनडीए जनता के विकास के लिए काम कर रहा है।” शाह का यह बयान साफ संकेत देता है कि बीजेपी बिहार में ‘विकास बनाम वंशवाद’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। अमित शाह की यह मुलाकात बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत देती है। एनडीए का सीट बंटवारा तय हो चुका है, तालमेल की तस्वीर भी साफ हो गई है और अब दोनों दल चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। बिहार में अगले कुछ हफ्तों में प्रचार की रफ्तार तेज होगी, और शाह-नीतीश की यह मुलाकात उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। संदेश साफ है कि एनडीए एकजुट है, और लक्ष्य है बिहार में सत्ता की वापसी। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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