बिहार विधानसभा चुनाव: अब सामने आया ‘उम्र का एफीडेविट घोटाला’…जानें तेजस्वी-तेज प्रताप के हलफनामे पर क्यों मचा सियासी संग्राम
बिहार में विधानसभा चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और नेताओं के पुराने बयान, हलफनामे और रिकॉर्ड फिर से राजनीतिक हथियार बन रहे हैं। ताज़ा विवाद आरजेडी नेताओं और लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों—तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव—के हलफनामों को लेकर है, जिसमें उनकी उम्र को लेकर उलटबांसी सामने आई है।
2015 और 2020 में भी हुआ था उल्टा जिक्र
मामला नया नहीं है। 2015 के विधानसभा चुनाव में दाखिल किए गए हलफनामों में तेजस्वी को बड़ा भाई और तेज प्रताप को छोटा भाई बताया गया था। हैरानी की बात है कि 2020 के चुनाव में भी यही स्थिति बनी रही। चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेज़ों में कोई सुधार नहीं किया गया। हलफनामे के मुताबिक, 2015 में तेज प्रताप की उम्र 25 साल और तेजस्वी की उम्र 26 साल दर्ज थी, जबकि असलियत में तेज प्रताप बड़े हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘उम्र का एफीडेविट घोटाला’ कहा जाने लगा है।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा का हमला
बिहार के डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता विजय कुमार सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरजेडी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा है कि “बिहार में चारा घोटाला, नियुक्ति घोटाला के बाद अब उम्र का एफीडेविट घोटाला सामने आया है। जिसकी खुद की राजनीति ‘फ्रॉडिज्म’ पर टिकी हो, वो दूसरों को ज्ञान दे रहा है।” सिन्हा ने कहा कि तेजस्वी अपने पिता लालू प्रसाद यादव के बनाए घोटालों के रास्ते पर चल रहे हैं और यह नया मामला उनकी राजनीति के चरित्र को उजागर करता है।
वोटर लिस्ट रिवीजन पर भी टकराव
यह विवाद ऐसे समय पर उठा है जब बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन (एसआईआर) का काम चल रहा है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष का आरोप है कि गरीब और पिछड़े वर्गों के वोट सूची से हटाए जा रहे हैं। वहीं, बीजेपी दो-दो वोटर आईडी कार्ड के मामलों पर आरजेडी को घेर रही है। इस बीच तेजस्वी-तेज प्रताप के हलफनामे पर उठा विवाद सियासी गर्मी को और बढ़ा रहा है।
चर्चा में संपत्ति के आंकड़े
साल 2020 के विधानसभा चुनाव के समय दिये गये हलफनामे के मुताबिक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने अपने पास करीब 5.88 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। वहीं उनके भाई तेज प्रताप यादव ने भी 2020 में अपने पास 2.83 करोड़ रुपये की संपत्ति की घोषणा की थी। 2015 में दोनों ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था। तेजस्वी ने राघोपुर सीट से जीत दर्ज की थी, जबकि तेज प्रताप महुआ से विधायक बने थे। 2020 में तेज प्रताप ने हसनपुर से चुनाव लड़ा और जीता।
तेज प्रताप का पार्टी से निष्कासन
बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने निजी कारणों से अपने बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इसके बाद तेज प्रताप ने अभी नया दल तो नहीं बनाया है, लेकिन उन्होंने ‘टीम तेज प्रताप यादव’ नाम का प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसके जरिए उन्होंने समर्थकों को जुड़ने का आह्वान किया और इसे सामाजिक न्याय के उद्देश्य से जोड़कर पेश किया है।
पांच दलों से गठबंधन
चुनाव से पहले तेज प्रताप ने पांच छोटे राजनीतिक दलों से गठबंधन की घोषणा की है।
वीवीआईपी (VVIP)
भोजपुरिया जन मोर्चा (BJM)
प्रगतिशील जनता पार्टी (PJP)
वाजिब अधिकार पार्टी (WAP)
संयुक्त किसान विकास पार्टी (SKVP)
उन्होंने ऐलान किया है कि वे वैशाली जिले की महुआ सीट से चुनाव लड़ेंगे। यह वही सीट है, जहां से वे 2015 में पहली बार विधायक बने थे।
जन संवाद और सामाजिक न्याय पर फोकस
तेज प्रताप इन दिनों लगातार जन संवाद कार्यक्रम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सामाजिक न्याय के एजेंडे को लेकर सक्रिय हैं और महुआ में अपनी पुरानी पकड़ को मजबूत करना चाहते हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आरजेडी से अलग होने के बाद उनका जनाधार सीमित हो सकता है, जिससे इस बार मुकाबला कड़ा होगा।
चुनाव में असर?
‘उम्र का एफीडेविट घोटाला’ मुद्दा कितना बड़ा बनता है, यह चुनावी रैलियों और बहसों पर निर्भर करेगा। बीजेपी इसे आरजेडी की साख पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है, जबकि आरजेडी इसे चुनावी एजेंडा भटकाने की कोशिश कह सकती है। चुनाव से पहले ऐसे विवाद अक्सर मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बनते हैं और उम्मीदवारों की छवि पर असर डाल सकते हैं। बिहार का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से तीखे बयानों और व्यक्तिगत हमलों से भरा रहा है। तेजस्वी और तेज प्रताप के हलफनामे का यह विवाद चुनावी राजनीति में एक नया मोड़ जोड़ रहा है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह मुद्दा मतदाताओं की प्राथमिकताओं में जगह बनाता है या नहीं। …(प्रकाश कुमार पांडेय)




