बिहार विधानसभा चुनाव 2025: पीएम मोदी आज से करेंगे चुनावी शंखनाद, समस्तीपुर से होगी अभियान की शुरुआत..प्रधानमंत्री की रैलियों से एनडीए में नई ऊर्जा
बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल पूरी तरह बज चुका है। राज्य की सियासत इस वक्त चरम पर है, और चुनावी मैदान में हर दल ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एनडीए के स्टार प्रचारक के रूप में मोर्चा संभाल चुके हैं। आज यानी 24 अक्टूबर से प्रधानमंत्री मोदी अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत कर रहे हैं, जिससे एनडीए खेमे में नया जोश भरने की उम्मीद है।
- पीएम मोदी आज से करेंगे शंखनाद
- समस्तीपुर से होगी अभियान शुरुआत
- कर्पूरी ग्राम से मिली प्रेरणा
- दो रैलियों से भरेगा जोश
- एनडीए में नई ऊर्जा आई
- दो चरणों में होगा मतदान
- महागठबंधन संग सीधी टक्कर
- युवाओं पर सबकी निगाहें टिकीं
- 14 नवंबर तय करेगा भविष्य
समस्तीपुर से होगी मोदी के चुनाव अभियान की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम पहुंचेंगे, जहां वे भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसी के साथ बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए का आधिकारिक प्रचार अभियान आरंभ होगा। कर्पूरी ठाकुर की स्मृति से जुड़ी यह यात्रा सामाजिक न्याय और समानता के संदेश के रूप में भी देखी जा रही है।
श्रद्धांजलि के बाद पीएम मोदी समस्तीपुर और बेगूसराय में दो विशाल जनसभाओं को संबोधित करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन सभाओं में लाखों की भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंच पर उनके साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान भी मौजूद रहेंगे।
प्रधानमंत्री की रैलियों से एनडीए में नई ऊर्जा
चुनाव आयोग द्वारा कार्यक्रम घोषित होने के बाद से ही एनडीए ने अपने स्टार प्रचारकों की पूरी लिस्ट जारी कर दी थी। इसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की संयुक्त रैलियों पर विशेष रणनीति बनाई गई है। पीएम मोदी की अगली रैलियां 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर और छपरा, जबकि आगे 2, 3, 6 और 7 नवंबर को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में होंगी। इन रैलियों को लेकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के खास इंतज़ाम किए गए हैं। भाजपा की प्रदेश इकाई का कहना है कि “प्रधानमंत्री मोदी का करिश्मा और विकास का एजेंडा” एनडीए को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।
बिहार में दो चरणों में मतदान, 14 नवंबर को नतीजे
चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव की पूरी रूपरेखा जारी कर दी है। इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को मतदान होगा। 14 नवंबर को मतगणना होगी और उसी दिन स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी कि बिहार की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों पर मुकाबला
एनडीए में सीटों का फॉर्मूला तय हो चुका है। भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास) और हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति बन चुकी है। वहीं विपक्षी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वामदलों) ने भी अपने उम्मीदवारों की सूची लगभग जारी कर दी है।
एनडीए बनाम महागठबंधन: सीधी टक्कर का चुनावी मैदान
इस बार का चुनाव एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी लड़ाई का रूप ले चुका है। एनडीए विकास, सुशासन और मोदी-नीतीश की जोड़ी के भरोसे मैदान में है, जबकि महागठबंधन बेरोजगारी, शिक्षा, कृषि और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच रहा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने युवाओं को रोजगार देने और पुराने वादों को पूरा करने की बात दोहराई है। वहीं, कांग्रेस ने शिक्षा और महिला सुरक्षा को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की सक्रियता से एनडीए के प्रचार अभियान को निर्णायक बढ़त मिल सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां 2020 के चुनाव में एनडीए को नुकसान हुआ था।
चुनावी समीकरणों में नया जोश, जनता की भूमिका अहम
बिहार की जनता इस बार बदलाव और स्थिरता के बीच संतुलन साधने की स्थिति में है। ग्रामीण इलाकों में जातीय समीकरणों का असर अब भी देखा जा रहा है, लेकिन शहरी और युवा मतदाता विकास और रोजगार के एजेंडे को लेकर अधिक सजग हैं।
राज्य में लगभग 7.2 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें युवा मतदाताओं की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक है। यह वर्ग चुनावी परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार के विभिन्न जिलों में रैलियों का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, शाह की सभाएं भागलपुर, सीवान, दरभंगा और औरंगाबाद में प्रस्तावित हैं। दोनों शीर्ष नेताओं की उपस्थिति से एनडीए के रणनीतिकारों को विश्वास है कि इस बार मत प्रतिशत में बढ़ोतरी होगी।
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी
चुनाव आयोग ने दोनों चरणों के मतदान को लेकर सुरक्षा बलों की तैनाती का खाका तैयार कर लिया है। नक्सल प्रभावित इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। राज्य सरकार ने भी प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की दिशा में पूरी तैयारी कर ली है।
नतीजों से तय होगी बिहार की नई दिशा
14 नवंबर को आने वाले नतीजे बिहार की राजनीति के लिए नई दिशा तय करेंगे। क्या जनता एक बार फिर विकास और स्थिरता के नाम पर एनडीए को मौका देगी, या महागठबंधन को सत्ता में वापसी का अवसर मिलेगा—यह 20 दिनों के भीतर साफ हो जाएगा। 24 अक्टूबर से प्रधानमंत्री मोदी के प्रचार अभियान की शुरुआत के साथ बिहार में चुनावी माहौल और गरमाने वाला है। एनडीए अपने “विकास के एजेंडे” पर भरोसा जता रहा है, जबकि विपक्ष “जनता के मुद्दों और बेरोजगारी” को मुख्य हथियार बना रहा है। दो चरणों में होने वाले इस चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे, जो बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिख सकते हैं। प्रकाश कुमार पांडेय





