बिहार विधानसभा चुनाव2025: राज्य के 18 नगर निगमों में पटना मॉडल पर अंचल गठन, बेहतर होगा शहरी विकास
बिहार सरकार ने राज्य के 18 नगर निगमों में पटना की तर्ज पर अंचलों का गठन करने का बड़ा फैसला लिया है। इस पहल का उद्देश्य नगर विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अंचल गठन की तैयारी शुरू करने को कहा है।
पटना की तरह अन्य शहरों में भी अंचल होंगे
पटना नगर निगम में फिलहाल छह अंचल सक्रिय हैं, जहां हर अंचल के विकास कार्यों की देखरेख के लिए कार्यपालक अभियंता और अभियंता स्तर के अधिकारी नियुक्त हैं। अब इसी मॉडल को बिहार के अन्य नगर निगमों में भी लागू किया जाएगा ताकि नगर आयुक्त को विभिन्न वार्डों के विकास कार्यों की निगरानी में आसानी हो।
नगर विकास विभाग ने जिलाधिकारियों को लिखा पत्र
नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने 18 नगर निगमों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर शीघ्र अंचल गठन की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि नगर निगम क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से बड़ा होने के कारण नगर आयुक्त सभी विकास योजनाओं की उचित निगरानी नहीं कर पाते हैं। इससे योजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए प्रशासन की विकेंद्रीकृत व्यवस्था करना आवश्यक है।
योजना किन जिलों में लागू होगी
यह योजना नालंदा, भोजपुर, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुंगेर, गया, पूर्णिया, कटिहार, सारण, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर और सहरसा के नगर निगमों में लागू होगी। विभाग चाहता है कि जल्द से जल्द अंचल निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो।
अंचलों का ढांचा और उनके दायित्व
हर अंचल में स्थानीय स्तर पर एक कार्यपालक अभियंता और संबंधित अधिकारी होंगे, जो विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे। इनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर नगर आयुक्त पूरे नगर निगम के कामकाज का समन्वय करेंगे।
नागरिकों को क्या लाभ मिलेगा?
इस व्यवस्था से विकास कार्यों में तेजी आएगी, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। साथ ही, नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराना और समस्याओं का समाधान करवाना भी आसान होगा। विभाग का मानना है कि अंचल गठन से शहरी विकास की प्रक्रिया तेज होगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ..(प्रकाश कुमार पांडेय)