बिहार विधानसभा चुनाव: राहुल गांधी रक्षाबंधन के बाद बिहार में करेंगे 17 दिन की यात्रा…जानें राहुल के पहुंचने से पहले क्यों हुआ विवाद…?

Bihar Assembly Election Rahul Gandhi will tour Bihar for 17 days after Rakshabandhan

बिहार में राहुल गांधी की 17 दिन की पदयात्रा: कांग्रेस कार्यालय में बवाल, पुलवामा शहीदों को दी श्रद्धांजलि

बिहार की राजनीति में फिर हलचल है। इस बार राजनीति के केंद्र में हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जो रक्षाबंधन के बाद प्रदेश में 17 दिन की यात्रा पर निकलने वाले हैं। लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले ही कांग्रेस के राज्य मुख्यालय में विवाद खड़ा हो गया। पुलवामा और पहलगाम हमले के शहीदों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बैठने को लेकर जमकर नोकझोंक हो गई। यह दृश्य कांग्रेस की आंतरिक असहमति और सांगठनिक चुनौतियों को सामने लाता है, वहीं यह यात्रा राज्य में विपक्ष की एक नई राजनीतिक ऊर्जा का संकेत भी देती है।

शहीदों को श्रद्धांजलि और कांग्रेस की पहल

पटना स्थित कांग्रेस कार्यालय में गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलवामा और पहलगाम आतंकी हमलों में शहीद हुए बिहार के जवानों को श्रद्धांजलि देना था। इस अवसर पर शहीद जवानों के परिजनों को पार्टी की ओर से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने कहा कि, “यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि कांग्रेस की यह प्रतिबद्धता है कि हम सैनिकों के मान-सम्मान के लिए हमेशा खड़े रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि शहीदों को सम्मान देने के साथ-साथ यह दिन हमें अपनी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाता है।

कार्यक्रम में अव्यवस्था और आपसी टकराव

कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब पार्टी कार्यकर्ता आपस में बैठने की जगह को लेकर भिड़ गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व को लेकर नाराजगी जताई। एक कार्यकर्ता ने शकील अहमद खान से बहस करते हुए कहा, “आपको पहले से इंतजाम करना चाहिए था। इतनी भीड़ में हम जवानों को कहां बैठाएं?”

यह बहस थोड़ी देर में धक्का-मुक्की में बदल गई, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप कर शांत कराना पड़ा। यह घटना कांग्रेस की सांगठनिक तैयारी और अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब पार्टी राज्य में खुद को विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहती है।

राहुल गांधी की यात्रा: विपक्ष की ‘जनआंदोलन’ रणनीति

राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने की। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के ठीक बाद राहुल गांधी पूरे बिहार में 17 दिन की यात्रा पर निकलेंगे। यह यात्रा कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो’ की तर्ज पर राज्य जोड़ो अभियान का रूप ले सकती है।

राजेश राम ने कहा, “यह यात्रा केवल कांग्रेस की नहीं होगी, बल्कि आम जनता के अधिकारों के संघर्ष की यात्रा होगी। इलेक्शन कमीशन द्वारा लोगों के अधिकारों का दमन किया जा रहा है। हम इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे।”

कहां से होगी शुरुआत, क्या है योजना?

कांग्रेस की इस यात्रा की शुरुआत कैमूर और सासाराम जिलों से होगी। वहां से यात्रा क्रमश: अन्य जिलों में आगे बढ़ेगी। पार्टी के मुताबिक, फिलहाल एक सर्वे टीम यात्रा के रूट को अंतिम रूप देने में जुटी है। यात्रा में कांग्रेस के शीर्ष राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेता शामिल होंगे। इसमें INDIA गठबंधन के अन्य प्रमुख चेहरों की भागीदारी भी संभव है।

राजेश राम ने इस यात्रा को लेकर आत्मविश्वास भरे स्वर में कहा, “राहुल गांधी एक राजनीतिक आंधी की तरह बिहार आ रहे हैं। इस आंधी को सत्ता पक्ष का कोई भी नेता रोक नहीं पाएगा।”

चुनावी तैयारी और राजनीतिक निहितार्थ

इस यात्रा को 2025 बिहार विधानसभा चुनाव की दृष्टि से कांग्रेस की बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है। कांग्रेस लंबे समय से राज्य में संगठनात्मक कमजोरी और जनाधार की कमी से जूझ रही है। राहुल गांधी की यह यात्रा पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और युवा मतदाताओं के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

विशेष बात यह है कि यह यात्रा उस समय हो रही है जब राज्य में NDA और INDIA गठबंधन के बीच सियासी खिंचाव चरम पर है। एक ओर जेडीयू और बीजेपी के रिश्ते तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी एकता की चुनौती और अवसर दोनों सामने हैं।

सवाल— क्या यह यात्रा कांग्रेस को संजीवनी दे पाएगी?

राहुल गांधी की 17 दिन की यात्रा कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति हो सकती है। यदि पार्टी इस यात्रा को अनुशासित, संगठित और जनसंपर्क आधारित बनाए रखती है, तो यह यात्रा प्रदेश में कांग्रेस के पुनर्जागरण की नींव रख सकती है। फिलहाल, बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमाने वाली है और इस बार कांग्रेस अपने पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है। राहुल की यात्रा एक परीक्षा है—कांग्रेस के लिए, संगठन के लिए और जनता के भरोसे के लिए है।

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