बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियाँ तेज हो चुकी हैं। राज्य में मुकाबला मुख्य रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (I.N.D.I.A Bloc) के बीच है। इस समय राज्य में एनडीए सरकार है, जिसकी अगुवाई जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) मिलकर कर रही हैं। चुनाव से पहले एनडीए ने अपने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को सधाने में पूरी ताकत झोंक दी है।
NDA में शामिल प्रमुख दल और उनका जातीय आधार
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
विधानसभा सीटें (2020): 80
वोट प्रतिशत (2020): 19.46%
वोट बैंक: सवर्ण (ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, कायस्थ), ओबीसी की कुछ जातियाँ (बनिया, तेली), अति पिछड़े वर्ग
क्षेत्रीय प्रभाव: उत्तर बिहार, पश्चिम बिहार में मजबूत; सीमांचल में अपेक्षाकृत कमजोर
रणनीति: सहयोगी दलों के साथ दलित और अति पिछड़े वर्ग में पकड़ मजबूत करने की कोशिश
जनता दल यूनाइटेड (JDU)
विधानसभा सीटें (2020): 45
वोट प्रतिशत (2020): 15.39%
मुख्य आधार: कुर्मी और कोइरी जातियाँ; कुछ अति पिछड़ी जातियाँ और अल्पसंख्यक समुदाय का हिस्सा
मुखिया चेहरा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, NDA के प्रमुख नेता
रणनीति: सामाजिक संतुलन और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (RV)]
नेता: चिराग पासवान, रामविलास पासवान के पुत्र
जातीय आधार: पासवान (दुसाध) — लगभग 5.31% आबादी
विधानसभा 2020: 5.66% वोट, 1 सीट
लोकसभा 2024: शानदार प्रदर्शन, 5 में से 5 सीटें जीती
रणनीति: दलितों में खासकर दुसाध समुदाय पर पकड़ और मोदी-निष्ठा पर भरोसा
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM)
नेता: पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी
जातीय आधार: मुसहर समुदाय — लगभग 3% आबादी
क्षेत्रीय प्रभाव: गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, रोहतास
विधानसभा 2020: 0.89% वोट, 4 सीटें
रणनीति: दलितों में सबसे पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय लोकमंच (Upendra Kushwaha)
जातीय आधार: कुशवाहा/कोइरी — लगभग 4.21%
विधानसभा 2020: 1.77% वोट, 0 सीट
क्षेत्रीय प्रभाव: पटना, भोजपुर, बक्सर, नालंदा, रोहतास
रणनीति: पिछड़ी जातियों में नीतीश कुमार के समानांतर नेतृत्व खड़ा करना
जातीय समीकरण और एनडीए की चुनावी रणनीति
बिहार की राजनीति जाति आधारित समीकरणों पर गहराई से आधारित रही है। एनडीए ने अपने गठबंधन में विभिन्न सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
सवर्ण वोट बैंक: भाजपा के साथ पारंपरिक रूप से जुड़ा रहा है। कुर्मी-कोइरी (Luv-Kush) समीकरण: JDU और राष्ट्रीय लोकमंच के जरिए साधा जा रहा है। दलित वोट: लोजपा (चिराग गुट) और हम पार्टी के जरिए पहुंच बनाने की कोशिश। अति पिछड़ा वर्ग (EBC): BJP और JDU का संयुक्त प्रयास। महिला मतदाताओं पर फोकस— पेंशन वृद्धि के साथ जीविका समूहों को राहत इसी रणनीती का एक हिस्सा है।
क्या कहता है राजनीति का गणित?
NDA का लक्ष्य जातीय समीकरणों का संतुलन, विकास का दावा, और मोदी-नीतीश की जोड़ी के भरोसे पर जनता को आकर्षित करना है। विपक्ष द्वारा घोषित पेंशन योजनाओं और रोजगार के वादों की काट के लिए हाल में नीतीश कुमार द्वारा पेंशन तीन गुना बढ़ाने जैसा फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि जातीय गणना रिपोर्ट और महंगाई जैसे मुद्दे वोटिंग पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन एनडीए जातीय बहुलता को साधने में आगे दिख रही है। बिहार NDA एक संगठित गठबंधन के रूप में जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए 2025 के विधानसभा चुनाव में उतरने जा रहा है। उसका फोकस विकास, सामाजिक सुरक्षा और जातीय प्रतिनिधित्व पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष किस तरह इस मजबूत गठबंधन को टक्कर देता है।…(प्रकाश कुमार पांडेय)