Bihar Assembly Election 2025: कर्पूरी ठाकुर की फुलपरास सीट पर जानें किस पार्टी का लहराएगा परचम? क्या होगी यहां कांटे की टक्कर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कई सीटें बेहद अहम मानी जा रही हैं। इनमें से एक है फुलपरास विधानसभा सीट, जो न केवल मिथिलांचल बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रहती है। इस सीट का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि बिहार के जननायक कर्पूरी ठाकुर यहां से विधायक रह चुके हैं। कर्पूरी ठाकुर की विरासत ने इस इलाके को खास राजनीतिक पहचान दिलाई। हाल ही में 26 जनवरी 2024 को उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जिससे इस सीट की चर्चा और भी बढ़ गई है।

मिथिलांचल की चर्चित सीट है फुलपरास

लगातार दो बार JD(U) का कब्ज़ा

पिछले दो विधानसभा चुनावों में फुलपरास सीट पर जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) का दबदबा कायम रहा है। 2020 का चुनाव: इस सीट से JD(U) की शीला कुमारी विजयी रहीं। उन्हें 75,116 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी कृपानाथ पाठक को 64,150 वोट मिले। लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के बिनोद कुमार सिंह मात्र 10,088 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। 2015 का चुनाव: यहां JD(U) की गुलजार देवी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने 64,368 वोट हासिल किए थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के राम सुंदर यादव को 50,953 वोट मिले। स्वतंत्र उम्मीदवार ज्योति झा 10,861 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। इन दोनों चुनावी नतीजों से स्पष्ट है कि फुलपरास में JD(U) का प्रभाव लगातार बना हुआ है और पार्टी ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

इस बार मुकाबले में नई पार्टी – जनसुराज

बिहार चुनाव 2025 की सबसे खास बात यह है कि प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज भी मैदान में है। लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचाने जाने वाले पीके अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जनसुराज पार्टी का दावा है कि वह बिहार की राजनीति में वैकल्पिक चेहरा बनकर उभरेगी। फुलपरास जैसी ऐतिहासिक सीट पर जनसुराज की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। यह देखना अहम होगा कि पार्टी यहां कितनी पैठ बना पाती है और पारंपरिक समीकरणों को कितना प्रभावित करती है।

कांग्रेस और बीजेपी की रणनीति

फुलपरास सीट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों का अतीत जुड़ा रहा है। कांग्रेस: 2020 के चुनाव में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी। यह पार्टी इस बार सीट को जीतने के लिए पूरा जोर लगा सकती है। महागठबंधन में उसका स्थान और मजबूत हो सकता है अगर वह इस सीट पर अच्छा प्रदर्शन करती है।

बीजेपी: 2015 के चुनाव में बीजेपी ने यहां मजबूत प्रदर्शन किया था और दूसरे स्थान पर रही थी। इस बार एनडीए के तहत पार्टी की रणनीति होगी कि वह फुलपरास में अपने पुराने आधार को फिर से सक्रिय करे।

किसके लिए क्या दांव पर है?

JD(U): लगातार दो बार जीतने के बाद पार्टी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल है। अगर यह सीट हाथ से निकलती है तो मिथिलांचल में पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस/बीजेपी: दोनों ही दल इस सीट पर बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित करना चाहेंगे कि वे अभी भी यहां की राजनीति में प्रासंगिक हैं।

जनसुराज: प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए यह चुनाव ‘लिटमस टेस्ट’ जैसा होगा। यहां अच्छा प्रदर्शन करने पर पार्टी पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन सकती है।

फुलपरास की भौगोलिक और सामाजिक अहमियत

फुलपरास सीट की एक बड़ी खासियत यह है कि इसके बीच से भुतही बलान नदी बहती है, जो बिहार की सबसे उग्र नदियों में से एक मानी जाती है। यह नदी हर साल बाढ़ की समस्या लेकर आती है और जनता के लिए बड़ी चुनौती साबित होती है। इस कारण बाढ़ नियंत्रण, राहत और पुनर्वास जैसे मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। सामाजिक समीकरण की बात करें तो यहां विभिन्न जातियों का संतुलन राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तय करने में अहम होता है। पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों का वर्चस्व, महिला मतदाताओं की सक्रियता और युवाओं की रोजगार की मांग यहां के चुनाव को निर्णायक बना सकती है।

मतदाताओं की प्राथमिकताएं

फुलपरास के मतदाता परंपरागत रूप से जातीय समीकरण, विकास कार्य और स्थानीय मुद्दों के आधार पर वोट करते आए हैं।

किसान और मजदूर वर्ग के लिए बाढ़ नियंत्रण और कृषि सुविधाएं सबसे बड़े मुद्दे हैं।

महिला मतदाता शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं।

युवा मतदाता रोजगार और बेहतर बुनियादी ढांचे को लेकर सजग हैं।

इन्हीं मुद्दों पर प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा।

कांटे की टक्कर तय

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में फुलपरास सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। एक तरफ JD(U) है, जो हैट्रिक बनाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस और बीजेपी अपनी-अपनी खोई जमीन तलाशने की रणनीति में जुटी हैं। इसके अलावा जनसुराज की मौजूदगी से त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना और मजबूत हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर जनसुराज यहां अच्छा प्रदर्शन करती है तो यह सीट का समीकरण बदल सकता है। वहीं, यदि मतदान प्रतिशत अधिक रहा तो नए खिलाड़ी को फायदा मिल सकता है। फुलपरास विधानसभा सीट 2025 के चुनाव में बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक बनने जा रही है। जननायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत, JD(U) का परंपरागत जनाधार, कांग्रेस-बीजेपी की वापसी की कोशिशें और जनसुराज की नई चुनौती—ये सभी पहलू इस चुनाव को और रोमांचक बना रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किसे मौका देते हैं और किस पार्टी का परचम फुलपरास में लहराता है। …( प्रकाश कुमार पांडेय)

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