बिहार सरकार ने राज्य के दुग्ध उत्पादकों और इससे जुड़े व्यवसाय को एक नई तकनीकी उड़ान देने के लिए एक बड़ी घोषणा की है। राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि पटना स्थित बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड कॉम्फेड मुख्यालय में एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) की स्थापना की जाएगी। इस ऐतिहासिक परियोजना पर करीब 28.50 करोड़ रूपये का ख़र्च अनुमानित है. यह बिहार के दुग्ध व्यवसाय को नई दिशा प्रदान करेगा और राज्य के किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करेगा।
इस कमांड सेंटर की मदद से राज्य में दूध के संग्रहण के साथ ही परिवहन और वितरण पर निगरानी रखने मैं मदद मिलेगी केंद्र को प्रमुखता इसके लिए ही बनाया जा रहा है। इस सेंटर का लक्ष्य केवल प्रबंधन को डिजिटल और आधुनिक बनाना नहीं है, बल्कि गुणवत्ता के साथ पारदर्शिता और दक्षता को भी नई ऊंचाइप्रदान करना है।
क्या है इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर (ICCC)?
इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर लगभग 4000 वर्गफुट क्षेत्र में बनाया जाएगा। यह सेंटर 24×7 कार्यशील रहेगा और राज्य भर की सभी डेयरियों, बल्क मिल्क कूलरों, शीतकरण केंद्रों और दुग्ध समितियों को एक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ेगा। इस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आधुनिक IOT उपकरणों और जीपीएस मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस होगा, जिससे दूध की हर गतिविधि — चाहे वह संग्रहण हो, ट्रांसपोर्ट हो या वितरण — उसकी निगरानी एक ही स्थान से संभव होगी।
कैसे होगा परियोजना का खर्च विभाजित?
राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का कहना है कि यह परियोजना तीन वर्षों की अवधि 2025-2026 से 2027-2028 में पूरी होगी। पहले चरण में, यानी वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल राशि 16.39 करोड़ की राशि सहायक परिसंपत्तियों Supporting Assets के निर्माण पर व्य य होगी। शेष राशि अगले दो वर्षों में सेंटर के संचालन, तकनीकी स्टाफ के साथ उपकरणों और कनेक्टिविटी पर खर्च होगी।
ICCC से किसानों को कैसे होगा लाभ?
इस कमांड सेंटर के माध्यम से लाखों दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा। सेंटर के संचालन से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं।
गुणवत्ता की निगरानी और तापमान नियंत्रण
दूध के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान डाटा लॉगर की सहायता से प्रत्येक वाहन में तापमान को नियमित किया जाएगा और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय प्रक्रिया
सेंटर में उपलब्ध तकनीक से सभी आंकड़ों का रीयल टाइम एनालिसिस किया जाएगा। इससे तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे, जिससे खराब दूध या अनियमितता को समय रहते सुधारा जा सकेगा।
सुरक्षा और पारदर्शिता
डेयरियों और भंडारण केंद्रों में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी निगरानी कमांड सेंटर से होगी। इससे चोरी, लापरवाही और तकनीकी गड़बड़ियों की त्वरित पहचान हो सकेगी।
किसानों को समय पर भुगतान
किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली को इस सेंटर से एकीकृत किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी।
तकनीकी नवाचार की दिशा में बिहार की पहल
बिहार लंबे समय से दुग्ध उत्पादन में एक अग्रणी राज्य रहा है, लेकिन तकनीकी दृष्टिकोण से इस क्षेत्र में अब तक उतना नवाचार देखने को नहीं मिला था। यह कमांड सेंटर उस अंतर को भरने का कार्य करेगा। सम्राट चौधरी ने कहा बिहार राज्य सरकार किसानों के हित में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने हेतु निरंतर संकल्पित है। ICCC सिर्फ एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि यह राज्य में दुग्ध आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सशक्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।” उन्होंने आगे कहा कि यह परियोजना न सिर्फ किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इसके माध्यम से युवा तकनीकी स्टाफ को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कॉम्फेड की भूमिका और भविष्य की रणनीति
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन (COMFED), जिसे ‘सुधा डेयरी’ के नाम से भी जाना जाता है, राज्य में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक और वितरक संगठन है। कॉम्फेड की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह कमांड सेंटर भविष्य में राज्य के सभी जिलों को जोड़ने की रणनीति के तहत कार्य करेगा।
भविष्य में, यह सेंटर किसानों को मोबाइल एप्स के माध्यम से भी अपडेट देगा — जैसे दूध का संग्रहण कब होगा, कितना मूल्य तय हुआ है, और भुगतान की स्थिति क्या है। इससे किसान और कॉम्फेड के बीच संवाद और पारदर्शिता और अधिक मजबूत होगी।
बिहार की दुग्ध क्रांति का तकनीकी अध्याय
इस ऐतिहासिक फैसले के साथ, बिहार सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह कृषि और दुग्ध उत्पादन में सिर्फ परंपरागत तरीकों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि तकनीक के सहारे इस क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना चाहती है।
इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर का निर्माण राज्य के लाखों किसानों के लिए एक नई आशा की किरण है। यह पहल न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से फायदेमंद होगी, बल्कि यह राज्य को दुग्ध उत्पादन और तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में राष्ट्रीय पटल पर एक मजबूत स्थान भी दिलाएगी।





