योगी कैबिनेट में भूपेंद्र चौधरी की वापसी तय! छह नए चेहरों को मिल सकता है मौका, पंकज चौधरी का दिल्ली दौरा…

योगी कैबिनेट में भूपेंद्र चौधरी की वापसी तय! छह नए चेहरों को मिल सकता है मौका, पंकज चौधरी दिल्ली रवाना

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कोर कमेटी की अहम बैठक के बाद संकेत साफ हैं कि जल्द ही योगी कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार हो सकता है। इस बैठक के तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दिल्ली रवाना हो गए, जहां वे पार्टी हाईकमान को पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे।

कोर कमेटी बैठक में हुआ गहन मंथन

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास पर हुई कोर कमेटी की बैठक करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक पुनर्गठन पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, भाजपा के महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

यह बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है, क्योंकि पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यह संघ, संगठन और सरकार की पहली औपचारिक बैठक थी। बैठक के दौरान न केवल प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार के स्वरूप पर चर्चा हुई, बल्कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को लेकर भी सहमति बनाने की कोशिश की गई। सूत्र बताते हैं कि बैठक में एक-दूसरे का परिचय और आगे की रणनीति पर भी बातचीत हुई।

भूपेंद्र चौधरी की वापसी लगभग तय

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की हो रही है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार, योगी कैबिनेट में उनकी वापसी को लेकर गंभीरता से विचार किया गया है। जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का मजबूत चेहरा माना जाता है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी कैबिनेट में एंट्री को पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि भूपेंद्र चौधरी के साथ-साथ आधा दर्जन विधायकों को मंत्री बनाए जाने पर भी मंथन हुआ है। पार्टी नेतृत्व जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए ऐसे चेहरों को आगे लाने पर विचार कर रहा है, जो चुनावी दृष्टि से पार्टी को मजबूती दे सकें।

छह नए मंत्रियों की एंट्री संभव

वर्तमान में योगी सरकार में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से अधिकतम 60 मंत्रियों की अनुमति है। ऐसे में मंत्रिमंडल में छह नए चेहरों के शामिल होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इन नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और संगठन में योगदान जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

पार्टी यह भी देख रही है कि किन क्षेत्रों में भाजपा को और मजबूती की जरूरत है और वहां से प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। खास तौर पर पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया जा सकता है।

पंकज चौधरी दिल्ली रवाना, हाईकमान से होगी चर्चा

कोर कमेटी बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। बताया जा रहा है कि वे पार्टी हाईकमान के सामने बैठक में हुई चर्चा और प्रस्तावित नामों की पूरी रिपोर्ट पेश करेंगे। दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम मुहर लगेगी।

सूत्रों के अनुसार, यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो जनवरी या फरवरी 2026 तक मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। माना जा रहा है कि खरमास समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त देखकर विस्तार को अमली जामा पहनाया जाएगा।

मिशन-2027 की तैयारी में भाजपा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी मंत्रिमंडल का यह संभावित विस्तार सीधे तौर पर मिशन-2027 से जुड़ा हुआ है। भाजपा संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर संतुलन बनाकर विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का जवाब देने की रणनीति पर काम कर रही है।

नए चेहरों को सरकार में शामिल कर पार्टी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संदेश देना चाहती है कि मेहनत और संगठनात्मक योगदान का सम्मान किया जाएगा। वहीं, अनुभवी नेताओं की वापसी से सरकार को राजनीतिक और प्रशासनिक मजबूती देने की कोशिश भी साफ नजर आती है।

सियासी हलचल बढ़ने के संकेत

कुल मिलाकर, नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद योगी सरकार और भाजपा संगठन में बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। दिल्ली से अंतिम फैसला आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है। भूपेंद्र चौधरी की संभावित वापसी और छह नए मंत्रियों की एंट्री से न केवल योगी कैबिनेट का चेहरा बदलेगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति भी और स्पष्ट होती नजर आएगी।

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