भोपाल 2047: झीलों की नगरी से ग्रोथ कॉरिडोर तक..जानेें कितना बदलेगा शहर का चेहरा?
भोपाल अब सिर्फ झीलों, हरियाली और पहाड़ियों की पहचान वाला शहर नहीं रहेगा। बल्कि 2047 तक इसे आधुनिक, आर्थिक रूप से मजबूत और बेहतर मोबिलिटी वाले महानगरीय शहर के तौर पर विकसित करने की तैयारी है। भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इस ड्राफ्ट में पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास की रफ्तार बढ़ाने का बड़ा खाका खींचा गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दो दशकों में आपकी प्रपोज्ड लेक सिटी कैसी होगी। आइए समझते हैं भोपाल के मास्टर प्लान-2047 का पूरा रोडमैप।
1. 16 से 27 फीसदी हरित भोपाल
भोपाल की पहचान उसकी झीलों और हरियाली से है। मास्टर प्लान-2047 में इसी पहचान को और मजबूत करने का दावा किया गया है। 2005 के मास्टर प्लान में जहां हरित क्षेत्र करीब 16 फीसदी था, वहीं नए ड्राफ्ट में इसे बढ़ाकर करीब 27 फीसदी प्रस्तावित किया गया है। यानी विकास के साथ पर्यावरण को भी योजना के केंद्र में रखा गया है। भोजताल, जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियां, वन क्षेत्र, तालाब और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण पर खास जोर है।
2. 51 किमी का ग्रोथ कॉरिडोर
नए भोपाल की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन प्रस्तावित 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर हो सकता है। इसे एयरपोर्ट, ईकेएआई सिटी, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्रों के साथ विभिन्न उपनगरों से जोड़ने की परिकल्पना है। यहां आईटी, एआई, डेटा सेंटर, स्वास्थ्य, शिक्षा, होटल, व्यापार, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और आवास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।
3. भोपाल में आएगा हाई डेंसिटी डेवलपमेंट
ग्रोथ कॉरिडोर में मिश्रित भूमि उपयोग और उच्च घनत्व विकास का मॉडल प्रस्तावित है। चौड़ी सड़कों के आसपास एफएआर और भवन ऊंचाई की सीमाओं में छूट का प्रावधान निवेश और जमीन के बेहतर उपयोग के लिहाज से अहम हो सकता है। यानी आने वाले समय में भोपाल का विकास सिर्फ बाहर की ओर फैलने के बजाय कुछ प्रमुख क्षेत्रों में ऊर्ध्वाधर और अधिक घनत्व वाला भी हो सकता है।
4. बीआरटीएस से एमआरटीएस तक
ग्रोथ कॉरिडोर में लोक परिवहन को भी मास्टर प्लान का अहम हिस्सा बनाया गया है। प्रस्तावित बीआरटीएस कॉरिडोर को भविष्य में एमआरटीएस में अपग्रेड करने की अवधारणा रखी गई है। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्ग को ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव भोपाल को आसपास के क्षेत्र के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने की कोशिश है।
5. भोजताल की सुरक्षा के साथ विकास
भोपाल का विकास उसकी सबसे बड़ी प्राकृतिक पहचान की कीमत पर न हो, इसके लिए भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र को संरक्षित रखने की अवधारणा ड्राफ्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही बात इस मास्टर प्लान को सिर्फ सड़क, मकान और कॉमर्शियल निर्माण की योजना से अलग बनाती है। शहर के विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
6. भानपुर खंती से गोल्फ कोर्स तक
शहर के पुराने और विकसित क्षेत्रों के पुनर्विकास पर भी जोर है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है। वहीं क्रिएटिव रीडेवलपमेंट के तहत जमीन के बेहतर उपयोग के लिए भूखंडों के संविलियन और एफएआर में प्रोत्साहन जैसे प्रावधान रखे गए हैं।
7. कॉलोनियों में ज्यादा खुली जगह
कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र का प्रावधान 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने की बात कही गई है। साथ ही सर्विस एरिया के लिए भी 2 फीसदी क्षेत्र रखने का प्रस्ताव है। इसका असर नए आवासीय विकास में खुले स्थान और सामुदायिक सुविधाओं के रूप में दिखाई दे सकता है।
8. 70 फीसदी सहमति पर पुनर्विकास
पुराने आवासीय क्षेत्रों के पुनर्विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। 70 फीसदी रहवासियों की सहमति होने पर आरडब्ल्यूए के जरिए आवासीय अपार्टमेंट के पुनर्विकास की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य पुराने और कम उपयोग वाले आवासीय क्षेत्रों को नए तरीके से विकसित करना है।
9. हरित टीडीआर से जमीन मालिकों को राहत
मास्टर प्लान में ग्रीन टीडीआर का प्रावधान खास महत्व रखता है। यदि किसी जमीन का उपयोग हरित क्षेत्र के लिए प्रस्तावित होता है तो संबंधित भूमि स्वामी की क्षतिपूर्ति के लिए टीडीआर का इस्तेमाल किया जा सकता है। विकासकर्ताओं को दूसरी जगह अतिरिक्त विकास अधिकार मिलने की व्यवस्था भी इससे जुड़ी है। हेरिटेज टीडीआर का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
10. लेक सिटी से मेट्रोपोलिटन सिटी तक
भोपाल विकास योजना-2047 का सबसे बड़ा विजन यही है कि शहर को सिर्फ मौजूदा सीमा के भीतर विकसित न किया जाए, बल्कि भविष्य के भोपाल महानगरीय क्षेत्र के साथ जोड़ा जाए। करीब 3000 हेक्टेयर भूमि ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित है। नए बायपास को ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने और दोनों ओर 50-50 मीटर हरित क्षेत्र रखने का प्रस्ताव भी इसी सोच का हिस्सा है।
सबसे बड़ा सवाल—विकास बनाम विरासत
भोपाल मास्टर प्लान-2047 में पहली नजर में तीन तस्वीरें एक साथ दिखाई देती हैं—हरित भोपाल, आर्थिक भोपाल और सुगम भोपाल। लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी। क्योंकि ग्रोथ कॉरिडोर, हाई डेंसिटी डेवलपमेंट, बड़े एफएआर और नए परिवहन नेटवर्क के साथ शहर पर निर्माण का दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में भोजताल, पहाड़ियों, जंगलों और जलस्रोतों का संरक्षण कितना प्रभावी तरीके से होता है, यह इस योजना की बड़ी कसौटी होगी।
यानी भोपाल विकास योजना-2047 सिर्फ जमीन के इस्तेमाल का नक्शा नहीं है। यह अगले दो दशकों में भोपाल की पहचान और विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। अब ड्राफ्ट पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। और इसके बाद सामने आएगा अंतिम प्लान…जो तय करेगा कि 2047 का भोपाल कितना हरित, कितना आधुनिक और कितना महानगरीय होगा।





