भोपाल में आयोजित कांग्रेस की किसान चौपाल ने भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सियासी बहस को नई धार दे दी। चौपाल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खास तौर पर पहुंचे। मंच से दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते के नाम पर किसानों के हितों से समझौता किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि यह डील कृषि के मुद्दों पर चार महीने तक अटकी रही, लेकिन आखिरकार सरकार ने दबाव में आकर किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला फैसला लिया।
किसान चौपाल का संदेश: खेती से जुड़े सवालों पर समझौता मंजूर नहीं
भोपाल की किसान चौपाल में कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि खेती और किसान किसी भी ट्रेड डील का “साइड इफेक्ट” नहीं हो सकते। राहुल गांधी ने कहा कि प्रस्तावित समझौते से भारतीय कृषि बाजार में विदेशी उत्पादों की एंट्री आसान हो जाएगी, जिससे देश के किसानों को सीधा नुकसान झेलना पड़ेगा। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अमेरिकी कंपनियों को सोया, कपास और मक्का जैसे कृषि उत्पाद भारत में बेचने की छूट देने का मन बना लिया है, जो घरेलू किसानों के लिए घातक साबित हो सकता है।
राहुल गांधी के आरोप: दबाव में झुकी सरकार, कैबिनेट से भी नहीं पूछा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट से चर्चा किए बिना अमेरिका से डील को आगे बढ़ाया। उनका दावा था कि संसद से निकलते ही प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत कर समझौते के लिए हामी भर दी। राहुल ने यह भी कहा कि इस सौदे में भारत को कोई ठोस लाभ नहीं मिला, बल्कि देश को ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ सकता है और हर साल अमेरिका से बड़ी मात्रा में सामान खरीदना पड़ेगा।
अमेरिकी दबाव और ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र, सियासत गरमाई
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह ट्रेड डील किसी रणनीतिक मजबूती का नतीजा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिया गया फैसला है। राहुल गांधी ने कहा कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ और कुछ कारोबारी मामलों के कारण सरकार अमेरिका के सामने झुकी है। उनके मुताबिक, अगर अमेरिका से सस्ते दामों पर कपास और अन्य कृषि उत्पाद भारत आएंगे, तो इसका सबसे बड़ा असर देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री और स्थानीय उद्योगों पर पड़ेगा, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों पर संकट खड़ा होगा।
खड़गे का तंज: नाम बदलने की राजनीति, लेकिन नीतियां कमजोर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में सरकार की नीतियों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर नाम बदलना ही राजनीति है, तो प्रधानमंत्री को भी अपना नाम बदल लेना चाहिए। उन्होंने मनरेगा जैसी योजनाओं के नाम बदलने पर सवाल उठाए और कहा कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव में फैसले ले रही है और किसानों के साथ “सरेंडर” किया गया है। उनके शब्दों में, “देश को बेचने और किसानों के साथ छल करने की राजनीति अब उजागर हो चुकी है।”
भाजपा का पलटवार: राहुल पर अराजकता और राष्ट्रविरोधी बयान का आरोप
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी पर देश की राजनीति में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, लेकिन उनके बयान देश के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं। सारंग ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि खराब कर रही है और किसानों की चिंता केवल राजनीतिक दिखावा है। भाजपा का कहना है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां किसानों की हालत पर राहुल गांधी कभी गंभीरता से बात नहीं करते।
राजनीतिक टकराव तेज, किसान मुद्दे पर आमने–सामने कांग्रेस–भाजपा
भोपाल की किसान चौपाल ने साफ कर दिया है कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाली है। कांग्रेस इसे किसानों के खिलाफ समझौता बता रही है, जबकि भाजपा इसे देश के हित में लिया गया रणनीतिक फैसला मानती है। एक तरफ राहुल गांधी और खड़गे किसानों को केंद्र में रखकर सरकार पर हमलावर हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे राष्ट्रहित और वैश्विक मजबूती से जोड़कर देख रही है। इस टकराव के बीच असली सवाल यही है—क्या यह डील भारतीय किसानों के भविष्य को मजबूत करेगी या उनके लिए नई चुनौतियां खड़ी करेगी?





