बिहार चुनाव 2025 : टिकट वितरण पर BJP की बड़ी रणनीति…30 फीसदी चेहरों की होगी काटछांट

Bharatiya Janata Party starts finalizing strategy for Bihar Assembly Elections

बिहार चुनाव 2025 : टिकट वितरण पर BJP की बड़ी रणनीति…30 फीसदी चेहरों की होगी काटछांट

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार पार्टी संगठन ने पुराने चेहरों को हटाकर नए और युवा प्रत्याशियों को मौका देने की योजना बनाई है। पार्टी सूत्रों की माने तो बीजेपी लगभग 30 से 35 फीसदी सीटों पर उम्मीदवार बदलने की तैयारी में है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 सितंबर से बिहार दौरे पर आ रहे हैं, जहां टिकट बंटवारे की रणनीति पर गहन चर्चा होगी।

30 फीसदी टिकट कटौती की तैयारी

पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस बार बीजेपी 15-20 मौजूदा विधायकों का टिकट काट सकती है। इसके साथ ही 2020 के चुनाव में हार का सामना करने वाले 13 उम्मीदवारों को भी इस बार दोबारा मौका नहीं मिलेगा। ऐसे में करीब एक-तिहाई सीटों पर नए चेहरों को उतारने का संकेत साफ हो गया है। पार्टी का मानना है कि एंटी-इंकम्बेंसी को तोड़ने और जनता में नई ऊर्जा भरने के लिए यह बदलाव ज़रूरी है। इस बार उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी अधिक कठोर रखी गई है।

टिकट कटने के मुख्य कारण

बीजेपी ने टिकट कटौती के लिए कई मानक तय किए हैं उम्र सीमा: 70 साल से ऊपर के विधायकों को टिकट मिलने की संभावना बेहद कम है। हार का अंतर, जिन सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी 2-3 हजार वोट से हार गए थे, वहां नए नामों पर विचार होगा। प्रदर्शन की बात करें तो 13 से अधिक सीटों पर जहां प्रत्याशी 11 हजार से ज्यादा वोटों से हारे थे। वहां भी चेहरों में बदलाव लगभग तय है। सक्रियता और छवि: स्थानीय स्तर पर नेताओं की पकड़, संगठनात्मक सक्रियता और जनता के बीच छवि को प्राथमिकता दी जाएगी।

सीट-दर-सीट गहन पड़ताल

बीजेपी की कार्यप्रणाली के तहत हर विधानसभा सीट से 4-5 संभावित नाम मंगवाए जा रहे हैं। इनमें से 2-3 नामों को राज्य चुनाव समिति छांटकर केंद्रीय चुनाव समिति को भेजेगी। इससे पहले उम्मीदवार तय करने से पहले पार्टी अपने सर्वे रिपोर्ट, जिलाध्यक्षों के फीडबैक और पिछले चुनाव के आंकड़े का बारीकी से अध्ययन करेगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आज अमित शाह के बिहार दौरे के दौरान इन मानकों पर गहन समीक्षा होगी।

जिताऊ उम्मीदवार” पर फोकस

बीजेपी नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि टिकट उन्हीं को दिया जाएगा जिनके जीतने की संभावना सबसे अधिक होगी। पार्टी का ध्यान सिर्फ संगठन के प्रति निष्ठा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिताऊ फैक्टर को ही प्राथमिकता दी जाएगी। युवा और साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं को आगे लाने की तैयारी है। मौजूदा विधायकों की कार्यप्रणाली और जनता के बीच लोकप्रियता पर विशेष नजर रखी जा रही है।

बदलते समीकरण और सियासी संदेश

बीजेपी का यह कदम साफ करता है कि पार्टी चुनावी जमीनी हकीकत को देखते हुए एंटी-इंकम्बेंसी को तोड़ना चाहती है। नए चेहरों के साथ वह युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी। इस कदम से पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को भी संदेश देना चाहती है कि संगठन में मेहनत और सक्रियता को ही टिकट का आधार बनाया जाएगा, न कि सिर्फ पद या पुराने रिश्ते। कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों में बदलाव कर सकती है। पार्टी का इरादा साफ है – “जिताऊ उम्मीदवार” ही मैदान में होंगे। प्रकाश कुमार पांडेय

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