बिहार विधानसभा चुनावों के पहले महागठबंधन का ओवैसी को बड़ा ऑफर
साल के अंत में बिहार में विधानसभा के उपचुनाव होना हैं। ऐसे में राजनैतिक दल अपनी अपनी बिसात बिछाने में लगे हैं। इसी दौरान असदुद्दीन ओवैसी महागठबंधन का हिस्सा बनने के लिए तरस रहे हैं। ओवैसी चाह रहे हैं कि- बिहार विधानसभा चुनावों को वो महागठबंधन का हिस्सा बनकर लड़ें। लेकिन महागठबंधन के घटक दलों ने ओवैसी को कुछ और ही ऑफर दे डाला है।
महागठबंधन में बिहार विधानसभा चुनावों से पहले असदुद्दीन औवेसी अपनी पार्टी AIMIM को महागठबंधन का हिस्सा बनाना चाहते है। औवेसी की पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों में 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। वही उनकी पार्टी 4 सीटों पर तीसरे नंबर और 6 सीटों पर चौथे नंबर पर रही थी। AIMIM के नतीजों से साफ था कि ये कांग्रेस और आरजेडी दोनों के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे में अब औवेसी की पार्टी के अकेले बचे विधायक अख्तरूल ईमान का कहना है कि – AIMIM की तैयारी पूरी 50 सीटों पर लड़ने की है लेकिन सेक्युलर वोटों को बिखरने से रोकने के लिए हम महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते है। AIMIM की ओर से उनके इकलौता बचे विधायक और पार्टी प्रमुख औवैसी के कहने पर भी कांग्रेस, आरडेडी या किसी भी पार्टी ने उनको महागठबंधन में आने का न्यौता नहीं दिया।
क्या ऑफर किसी महागठबंधन के घटक दलों ने
महागठबंधन के घटक दलों ने औवेसी को जो ऑफर किया वो सुनकर आप भी चौंक जाऐंगे। उन्होंने AIMIM को गठबंधन का हिस्सा नहीं बनाया न ही इस बारे में कोई बयान दिया। बल्कि इन दलों ने कहा कि अगर AIMIM चाहती है कि सेक्युलर वोटों सो बिखराव न हो तो वो बिहार में विधानसभा चुनाव नहीं लड़े। लालू प्रसाद यादव , तेजस्वी से लेकर कांग्रेस तक इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। आरजेडी सांसद मनोज झा ने साफ कर दिया है कि- अगर ओवैसी सच में बीजेपी को हराना चाहते हैं तो बिहार में विधानसभा चुनावों से दूरी कर ले। महागठबंधन दलों का मानना है कि औवेसी और AIMIM बीजेपी की टीम B है। इसलिए भी वो औवेसी को अपने साथ नहीं रखना चाहते।
एनडीए (NDA) है मजबूत
पिछले विधानसभा चुनावों को तुलना में एन डी ए इस बार बहुत मजबूत है। बिहार के बड़े नेता उपेन्द्र कुशवाह से लेकर जतिन राम मांढी और युवा चेहरा चिराग पासवान एनडीए के साथ हैं। इससे बड़ी बात ये है कि इस बार नीतिश की पार्टी जेडीयू (JDU) भी बीजेपी के साथ है। ऐसे में एन डी ए की ताकत और बढ़ जाती है। इसलिए महागठबंधन के दल औवेसी को चुनावों से अलग रहने की सलाह दे रहे हैं ।
औवेसी क्यों चाहते हैं महागठबंधन से जुड़ना
औवेसी चाहते है कि उनकी पार्टी AIMIM को एक राष्ट्रीय दल का दर्जा मिल जाए। इसलिए ओवैसी अलग अलग राज्यों के विधानसभा चुनावों में मैदान में आ रहे है। औवेसी को अगर महागठबंधन का साथ मिल जाएगा तो ज्यादा सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर सकते है। ऐसे में उनकी पार्टी की सीटों में भी इजाफा होगा , राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलना आसान होगा। साथ ही लगातार उन पर जो बीजेपी की टीम B होने का आरोप लगता है वो भी बंद हो जाएगा। साथ ही ऐसा करके ओवैसी अपने कोर वोटर को भी ये मैसेज देने में सफल हो जाऐंगे कि वो बीजेपी की टीम B नहीं है।..( प्रकाश कुमार पांडेय)





