2 अक्टूबर सिर्फ महात्मा गांधी की जयंती का दिन नहीं है, बल्कि सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और सेवा जैसे मूल्यों को दोहराने का अवसर भी है। इस बार मध्य प्रदेश में गांधी जयंती के मौके पर इन विचारों को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रखने के बजाय जनभागीदारी और सेवा गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है। गांधी जयंती पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम हुआ, जहां बापू को श्रद्धांजलि दी गई।
दिलचस्प बात यह है कि गांधी जयंती के साथ मध्य प्रदेश में ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान भी शुरू किया जा रहा है। 2 से 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में स्वच्छता, स्वास्थ्य, सेवा और जनभागीदारी से जुड़ी गतिविधियां प्रस्तावित हैं।
श्रद्धांजलि से आगे सेवा का संदेश
गांधी का दर्शन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था। उनके विचारों में स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, श्रम और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने की अवधारणा भी महत्वपूर्ण रही। यही वजह है कि गांधी जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों में स्वच्छता और श्रमदान को लगातार प्रमुखता दी जाती है।
2026 के ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का संदेश भी ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ रखा गया है। 2 अक्टूबर को सार्वजनिक स्थानों पर विशेष स्वच्छता गतिविधियों के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। यानी इस बार गांधी जयंती का संदेश सिर्फ मंच से भाषण देने तक नहीं, बल्कि लोगों को अभियान से जोड़ने पर केंद्रित है।
स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश
गांधी जी के लिए स्वच्छता व्यक्तिगत आदत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी थी। इसलिए स्वच्छता अभियानों में सरकारी मशीनरी के साथ आम नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया जाता है। मध्य प्रदेश में ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत जिला, विकासखंड, नगरीय निकाय और ग्राम पंचायत स्तर तक गतिविधियां प्रस्तावित हैं। इनमें स्वच्छता और स्वास्थ्य के साथ समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ी सेवा गतिविधियां शामिल की गई हैं। इसका एक अहम पहलू यह है कि सेवा को सरकारी कार्यक्रम के बजाय सामाजिक भागीदारी का रूप देने की कोशिश की जा रही है।
बापू के विचारों की आज के दौर में परीक्षा
आज गांधी के विचारों की चर्चा अक्सर सत्य और अहिंसा तक सिमट जाती है। लेकिन उनके विचारों का दायरा इससे कहीं व्यापक था। सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, सामाजिक सद्भाव, स्वावलंबन, श्रम की गरिमा और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता भी गांधीवादी सोच के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं।
इसलिए गांधी जयंती पर असली सवाल केवल यह नहीं कि बापू को कितनी श्रद्धांजलि दी गई। बड़ा सवाल यह है कि उनके विचार रोजमर्रा के प्रशासन और सामाजिक व्यवहार में कितने दिखाई देते हैं।
सेवा से स्वच्छता तक बड़ा संदेश
केंद्र स्तर पर भी 2 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू हो रहा है, जिसमें सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाने, लंबित मामलों को कम करने और पुराने अनुपयोगी सामान के निपटारे पर जोर दिया गया है। यानी गांधी जयंती अब प्रतीकात्मक आयोजन से आगे बढ़कर स्वच्छता, सेवा और नागरिक भागीदारी के व्यापक अभियान से जुड़ रही है।
मध्य प्रदेश में भी ‘सेवा मेरा योगदान’ का संदेश इसी दिशा में देखा जा सकता है। गांधी को पुष्पांजलि देना परंपरा है, लेकिन उनके विचारों को व्यवहार में उतारना उस श्रद्धांजलि का अगला चरण है।
गांधी जयंती का संदेश साफ है—बापू की तस्वीर को नमन के साथ उनके विचारों को जीवन और व्यवस्था में उतारने की जरूरत है। मध्य प्रदेश में सेवा, स्वच्छता और जनभागीदारी को जोड़ने वाली गतिविधियां इसी विचार को जमीन पर उतारने की कोशिश हैं। अब इन अभियानों की वास्तविक कसौटी यही होगी कि 2 अक्टूबर के बाद भी सेवा और स्वच्छता का यह संकल्प कितनी निरंतरता से चलता है।





