किसान की आय बढ़ाने का नया मॉडल, खेती के साथ कई कमाई के रास्ते..बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने दिया ये बड़ा संदेश

Balram Agriculture Festival in Neemuch Chief Minister Mohan Yadav

नीमच के बलराम कृषि महोत्सव से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसान हित, सहकारी ऋण, सिंचाई, प्राकृतिक खेती और कृषि के साथ दूसरे व्यवसायों को जोड़ने का बड़ा संदेश दिया।

मध्यप्रदेश सरकार अब सहकारी ऋण व्यवस्था को ज्यादा सरल और किसान हितैषी बनाने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का संदेश साफ है कि किसान को कर्ज के लिए अनावश्यक प्रक्रियाओं में नहीं उलझना पड़े और जरूरत के समय आर्थिक मदद उपलब्ध हो। किसान की लागत, निवेश और उत्पादन के बीच संतुलन बनाने में आसान ऋण व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

2. नीमच मंडी ने बढ़ाया भरोसा

नीमच की कृषि अर्थव्यवस्था में मंडी की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। वर्ष 2023-24 में जहां 53.46 लाख क्विंटल कृषि उपज की आवक हुई थी, वहीं 2025-26 में यह करीब 72 लाख क्विंटल पहुंच गई। मंडी की आय भी बढ़कर करीब 34.5 करोड़ रुपये हो गई। यह आंकड़े नीमच के कृषि व्यापार के बढ़ते दायरे को दिखाते हैं।

3. सिंचाई बढ़ेगी तो रकबा बढ़ेगा

किसान की आय बढ़ाने में सबसे बड़ा आधार सिंचाई है। रामपुरा-मनासा परियोजना से 212 गांवों की 67 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है। वहीं जावद-नीमच और खुमान सिंह शिवाजी सिंचाई योजनाओं से एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को फायदा मिलने की बात कही गई है। यानी सरकार का फोकस सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेती का दायरा बढ़ाने पर भी है।

4. खेती के साथ दूसरी कमाई

बदलते कृषि मॉडल में सिर्फ एक फसल पर निर्भरता किसान के लिए जोखिम बढ़ाती है। मुख्यमंत्री ने कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्यपालन को जोड़ने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य किसान परिवार के लिए आय के कई स्रोत तैयार करना है। गांधीसागर में मत्स्य उत्पादन और चीता परियोजना से पर्यटन का विस्तार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को नए अवसर दे सकता है।

5. प्राकृतिक खेती से नई पहचान

नीमच में 10 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती होने का दावा किया गया है। यह बदलाव केवल लागत कम करने तक सीमित नहीं है। गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच प्राकृतिक खेती किसानों को अलग बाजार उपलब्ध कराने का रास्ता खोल सकती है। फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीक के साथ इसका विस्तार किसान की आय के नए अवसर बना सकता है। कुल मिलाकर बलराम कृषि महोत्सव से मध्यप्रदेश सरकार का कृषि मॉडल सामने आता है—आसान ऋण, पर्याप्त सिंचाई, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और कृषि के साथ पशुपालन-मत्स्यपालन। अब इस मॉडल की असली सफलता इस बात से तय होगी कि योजनाओं का लाभ कितनी तेजी और पारदर्शिता से खेत और किसान के परिवार तक पहुंचता है।

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