पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल का मंगलवार की रात को निधन हो गया। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने की शिकायत के बाद मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां मंगलवार रात करीब 8 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल निधन पर 26 और 27 अप्रैल को 2 दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। पंजाब सरकार ने गुरुवार को राज्य में सरकारी छुट्टी का ऐलान किया है। राज्य की भगवंत मान सरकार ने बादल के सम्मान में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है।
- प्रकाश सिंह बादल के निधन से राजनीति में शोक
- मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में ली अंतिम सांस
- 27 अप्रैल को बादल गांव में होगा अंतिम संस्कार
- पंजाब सरकार ने घोषित किया सार्वजनिक अवकाश
- 2 दिनों का राजकीय शोक घोषित
विरोधी भी थे उनकी सियासी समझ के कायल
प्रकाश सिंह बादल अकाली दल के नेता थे। हालांकि उन्होंने हिंदुत्व की राजनीति करने वाली भाजपा के साथ गठजोड़ कर सत्ता हासिल की। राजनीतिक में कभी स्थाई विरोधी या दोस्त नहीं होते। ऐसे बादल के भी विरोधी उनकी राजनीतिक समझ के आगे नतमस्तक रहते थे। पंजाब के सीएम रहते अंतिम कार्यकाल में बादल की इस समझ का दो बार परिचय भी मिला। दरअसल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता उनके आवास के सामने धरना देने आए थे। ऐसे में दोनों ही बार सीएम बादल ने धरना देने वालों के लिए वहां तंबू लगवाया। इतना ही नहीं वे खुद भी गेट पर विरोध करने वालों का स्वागत करने के आए। विरोध करने वालों से बातचीत की थी।
युवा और सबसे उम्रदराज सीएम रहे बादल
गुरुवार को पंजाब में सार्वजनिक अवकाश के चलते सभी सरकारी बोर्ड और निगम कार्यालय, स्कूल एवं उच्च शिक्षण संस्थान बंद रखे जाएंगे। पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के पार्थिव शरीर को चंडीगढ़ स्थित सेक्टर 28 में शिरोमणि अकाली दल के मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखेंगे। बता दें गुरुवार 27 अप्रैल को दोपहर एक बजे के करीब बादल गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें प्रकाश सिंह बादल उम्र के लिहाज़ से देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। 1996 से 2008 तक वे शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष भी रहे। साल 1970 में 43 साल की उम्र में प्रकाश सिंह बादल पंजाब के सीएम बने तब वे सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले देश के सबसे युवा नेता थे तो वहीं साल 2017 में मुख्यमंत्री के रुप में उनका पांचवां कार्यकाल जब पूरा हुआ तो बादल की उम्र 90 साल थी। जिससे वे देश के किसी भी राज्य के सबसे उम्रदराज़ सीएम बने। फिलहाल यह रिकॉर्ड उन्हीं के नाम दर्ज है।
चरण सिंह की सरकार में रहे कृषि मंत्री
प्रकाश सिंह बादल 1979 से 1980 तक चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में कृषि मंत्री रहे लेकिन उसके बाद उन्होंने फिर कभी केंद्र की राजनीति की ओर रुख नहीं किया। उन्होंने पंजाब की राजनीति पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित रखा।
पिता की तरह सरपंच से शुरुआत
बता दें प्रकाश सिंह बादल ने राजनीति की शुरुआत साल 1947 में की थी। पिता रघुराज सिंह की तरह ही प्रकाश सिंह भी बादल गांव के सरपंच बने। इसके बाद उन्होंने कई पद हासिल करते हुए पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की और राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि वे कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे लेकिन उन्होंने अकाली दल को चुना।