आजम खान की सियासी जमीन खतरे में…कहा कोई मार न दे इसलिए सारी रात कुर्सी पर बैठा रहा
उत्तर प्रदेश की सियासत में कभी अपनी तूती बोलने वाले सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान की सियासी जमीन अब खतरे में है। जेल से रिहा होने के बाद आजम खान एक के बाद एक इंटरव्यू दे रहे हैं और अपने दिल की बात कह रहे हैं।
भावुक हो गए आजम खान
आजम खान ने एक इंटरव्यू में कहा कि 40-45 साल की सियासत में वह लखनऊ में एक मकान तक नहीं खरीद सके। उन्होंने कहा कि जब वह जेल से रिहा हुए तो गेस्ट हाउस की डिमांड की थी, लेकिन किसी ने मना कर दिया। आजम खान ने कहा, “दोस्तों ने एक ऐसे गेस्ट हाउस में कमरा दे दिया जहां बाउंड्री वाल सिर्फ ढाई फीट की थी। कोई मार ना दे इस डर के कारण सारी रात कुर्सी पर बैठा रहा।”
आजम खान की सियासी विरासत
आजम खान की सियासी विरासत पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। रामपुर से 10 बार विधायक रहे आजम खान की राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आजम खान की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
क्या आजम खान कमजोर हो गए हैं?
आजम खान के समर्थक कहते हैं कि आजम खान की कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी सहानुभूति बढ़ रही है। वे कहते हैं कि आजम खान की भावुक अपील लोगों को आकर्षित करेगी और वे फिर से उनके साथ जुड़ेंगे।
आजम खान की चुनौतियां
आजम खान के सामने कई चुनौतियां हैं। उन्हें अपनी सियासी जमीन को बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्हें अपने समर्थकों को एकजुट रखना होगा और नई पीढ़ी को अपनी पार्टी से जोड़ना होगा।
क्या है भविष्य?
आजम खान का भविष्य क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि उन्हें अपनी सियासी जमीन को बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। वे अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा




