सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर की सियासत का बड़ा नाम रहे आज़म खान इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। कभी 10 बार शहर के विधायक, 4 बार कैबिनेट मंत्री और लोकसभा–राज्यसभा के सदस्य रहे आज़म को यूपी का “मिनी डिप्टी सीएम” कहा जाता था, लेकिन अब उनका सफर जेल तक पहुंच गया है।
17 नवंबर 2025 की दोपहर पुलिस आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को MP-MLA कोर्ट से रामपुर जेल लेकर पहुंची। जेल गेट पर उतरते ही मीडिया ने उन्हें घेर लिया। आज़म के हाथ में सिर्फ चश्मे का एक केस और बिस्कुट के दो पैकेट थे। उनके पीछे-पीछे अब्दुल्ला भी पुलिस की गाड़ी से नीचे उतरे। पत्रकारों ने सवाल किया—“फर्जी पैन कार्ड मामले में आपको 7 साल की सजा मिली है, क्या कहना चाहेंगे?” आज़म का छोटा सा जवाब था— बेहतर है… कोर्ट ने दोषी माना है, इसलिए सजा दी है। दोनों को रामपुर जेल की बैरक नंबर 1 में रखा गया है। आज़म की पहचान अब कैदी नंबर 425 के रूप में दर्ज है। जेल उनके घर से केवल 200 मीटर दूर है। दूरी इतनी कम है कि जब उनके मोहल्ले की मस्जिद से अज़ान होती है, तो उसकी आवाज बैरक तक सुनाई देती है।



