Viral Ayurvedic Remedy: नारियल की जटा से बनी भस्म के चमत्कारी दावे, विशेषज्ञ बोले—बिना जांच न अपनाएं
नई दिल्ली। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर इन दिनों एक आयुर्वेदिक नुस्खा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नारियल की जटा (रेशा) को जलाकर बनाई गई भस्म को पाइल्स, रक्तस्राव, मासिक धर्म की समस्याओं और यहां तक कि हैजा जैसे रोगों के इलाज में चमत्कारी बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह नुस्खा सिर्फ एक दिन में पुरानी से पुरानी बवासीर तक को ठीक कर सकता है। हालांकि, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञ इस तरह के दावों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
क्या है वायरल नुस्खा?
वायरल संदेशों में बताया गया है कि नारियल की जटा को माचिस से जलाकर भस्म बना ली जाए और उसे शीशी में भरकर सुरक्षित रखा जाए। इस भस्म को ताजी छाछ या दही के साथ तीन ग्राम मात्रा में खाली पेट दिन में तीन बार लेने की सलाह दी जा रही है। दावा है कि इससे किसी भी प्रकार का रक्तस्राव रुक जाता है और बवासीर, अधिक मासिक रक्तस्राव, श्वेत प्रदर, उल्टी, हिचकी और हैजा जैसी समस्याओं में तुरंत लाभ मिलता है।
यह भी कहा जा रहा है कि यह नुस्खा भारत के मंदिरों और मठों में साधु-संतों द्वारा वर्षों से आजमाया गया है और इस पर वैज्ञानिक शोध होना चाहिए।
दावों पर विशेषज्ञों की राय
आयुर्वेदिक चिकित्सकों का कहना है कि भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लंबा इतिहास रहा है, लेकिन हर लोक-नुस्खा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो, यह जरूरी नहीं। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. (वैद्य) एस. के. शर्मा के अनुसार,
“किसी भी जड़ी-बूटी या भस्म का सेवन बिना उसकी शुद्धता, मात्रा और प्रभाव को समझे करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर रक्तस्राव, पाइल्स और मासिक धर्म जैसी स्थितियां गंभीर हो सकती हैं, जिनमें सही निदान आवश्यक है।”
आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस तरह के दावों को लेकर चेतावनी देते हैं। सर्जन और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, बवासीर के कई प्रकार होते हैं—कुछ में दवा कारगर होती है, तो कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। केवल एक घरेलू उपाय से सभी मामलों का ठीक होना संभव नहीं माना जाता।
बिना जांच अपनाना कितना सुरक्षित?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जली हुई वस्तु से बनी भस्म में हानिकारक तत्व या अशुद्धियां हो सकती हैं, जो पेट और आंतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, हैजा जैसी संक्रामक बीमारी में घरेलू उपाय अपनाने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार,
- लगातार या अधिक रक्तस्राव
- पुरानी बवासीर
- महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म
जैसी समस्याओं में पहले चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
आयुर्वेद में शोध की जरूरत
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में कई प्रभावी उपचार छिपे हो सकते हैं, लेकिन उन्हें जनसामान्य तक पहुंचाने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण और क्लिनिकल ट्रायल जरूरी हैं। आयुष मंत्रालय भी समय-समय पर इस बात पर जोर देता रहा है कि प्रमाणित आयुर्वेदिक दवाओं और चिकित्सकों की सलाह से ही उपचार किया जाए।
बवासीर से बचाव के लिए क्या करें?
वायरल संदेश में बवासीर से बचाव के कुछ सुझाव भी दिए गए हैं, जिन पर विशेषज्ञ आंशिक रूप से सहमत नजर आते हैं—
- गुदा क्षेत्र को बहुत गर्म पानी से न धोएं
- अत्यधिक मिर्च-मसाले और गरिष्ठ भोजन से बचें
- पर्याप्त फाइबर और पानी का सेवन करें
- लंबे समय तक कब्ज को नजरअंदाज न करें





