US Air Strike on ISIS in Syria: सीरिया में ISIS पर अमेरिका का निर्णायक हमला, ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ से आतंकियों को बड़ा झटका
वॉशिंगटन/दमिश्क।
सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा और निर्णायक सैन्य कदम उठाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ के तहत सीरिया के कई इलाकों में मौजूद ISIS के ठिकानों पर व्यापक स्तर पर हवाई हमले किए हैं। इस कार्रवाई को मध्य पूर्व में आतंकवाद के नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ऑपरेशन न केवल आतंकियों की क्षमता को खत्म करने के लिए है, बल्कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी सख्त संदेश है।
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अमेरिकी समयानुसार दोपहर करीब 12:30 बजे इस सैन्य अभियान को अंजाम दिया गया। इस दौरान सीरिया के अलग-अलग हिस्सों में फैले ISIS के ठिकानों को अत्यंत सटीकता के साथ निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में आतंकी ठिकानों, हथियार भंडारों, कमांड सेंटर्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क को नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे ISIS की ऑपरेशनल क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
आतंकियों को स्पष्ट चेतावनी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा कि यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की निरंतर और अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है। CENTCOM ने चेतावनी दी कि जो भी अमेरिकी सैनिकों, नागरिकों या सहयोगी देशों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर जवाब दिया जाएगा। इस बयान को ISIS समेत अन्य आतंकी संगठनों के लिए एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
पलमायरा हमले की पृष्ठभूमि
इस सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के ऐतिहासिक शहर पलमायरा में हुए ISIS हमले से जुड़ी है। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी। मारे गए सैनिकों में आयोवा नेशनल गार्ड के 25 वर्षीय सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस टोवार और 29 वर्षीय सार्जेंट विलियम नाथानियल हॉवर्ड शामिल थे। दोनों सैनिक उस अमेरिकी सैन्य टुकड़ी का हिस्सा थे, जिसे 2025 की शुरुआत में मध्य पूर्व में तैनात किया गया था। इस हमले के बाद अमेरिका पर जवाबी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था।
इसी के तहत 19 दिसंबर 2025 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर इस व्यापक सैन्य अभियान की शुरुआत की गई थी। ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए ISIS को दोबारा संगठित होने से रोकने और उसके बचे-खुचे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अभियान के दौरान 90 से अधिक अत्याधुनिक प्रिसीजन म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों में करीब 35 से ज्यादा आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि दो दर्जन से अधिक लड़ाकू विमानों ने इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सभी हमले सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए, ताकि आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ के तहत ISIS को पूरी तरह पराजित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति के अंतर्गत अमेरिका और उसके सहयोगी देश न केवल सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, बल्कि आतंकियों की वित्तीय, लॉजिस्टिक और वैचारिक ताकत को भी कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हवाई हमले से सीरिया में सक्रिय ISIS नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। कई आतंकी ठिकानों के नष्ट होने से संगठन की कमांड और कंट्रोल क्षमता प्रभावित हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले समय में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से ऐसे अभियानों में तेजी आ सकती है, खासकर तब जब ISIS या उससे जुड़े संगठन दोबारा हमलों की कोशिश करते हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि सीरिया में जटिल राजनीतिक और सैन्य हालात के चलते आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष आसान नहीं है। क्षेत्र में कई देशों और गुटों की मौजूदगी के कारण हालात संवेदनशील बने हुए हैं।
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष जारी
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ यह संकेत देता है कि मध्य पूर्व में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। ISIS भले ही पहले की तुलना में कमजोर हुआ हो, लेकिन वह अब भी छिटपुट हमलों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अमेरिका की यह कार्रवाई न केवल बदले की कार्रवाई है, बल्कि भविष्य के हमलों को रोकने की रणनीति का भी हिस्सा है।