हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

Assets worth ₹3.82 crore declared in the affidavit Rolls Royce valued at ₹13 crore why have questions been raised about Maithili Thakur

लोक गायिका और बिहार की अलीनगर से बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर इन दिनों अपनी गायकी या राजनीति से ज्यादा एक लग्जरी कार को लेकर चर्चा में हैं। मुंबई के लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान उन्हें रोल्स रॉयस कलिनन में देखा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि कुछ समय पहले तक चुनावी हलफनामे में करीब 3.82 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित करने वाली मैथिली ठाकुर 13 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाली कार में कैसे पहुंचीं। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों में कार की स्वामित्व स्थिति को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है और शुरुआती रिपोर्टों में मालिकाना हक की पुष्टि नहीं हुई थी।

हलफनामे में क्या दर्ज है?

2025 के विधानसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार मैथिली ठाकुर ने करीब 3.82 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की थी। इसमें लगभग 2.32 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 1.50 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल थी। हलफनामे में उनकी देनदारी शून्य बताई गई थी। उनकी आय के स्रोतों में गायन, सोशल मीडिया और ब्रांड एंडोर्समेंट शामिल बताए गए थे। यानी सोशल मीडिया पर चल रहा यह दावा कि मैथिली ने हलफनामे में केवल मामूली संपत्ति दिखाई थी, उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। लेकिन 3.82 करोड़ की घोषित संपत्ति और 13 करोड़ से अधिक कीमत वाली रोल्स रॉयस की चर्चा ने वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

सीए ने उठाए सवाल, लेकिन सवाल और आरोप में फर्क

चार्टर्ड अकाउंटेंट रुचिता वघानी ने सोशल मीडिया पर आयकर विभाग को टैग करते हुए मैथिली ठाकुर की आय की जांच की मांग की है। उनका सवाल मूल रूप से यह है कि घोषित नेटवर्थ और इतनी महंगी कार के बीच अंतर को कैसे समझा जाए। यह सीए की मांग और सोशल मीडिया पर उठाया गया सवाल है, अपने आप में किसी वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं। दूसरी तरफ, कुछ रिपोर्टों के मुताबिक मैथिली की टीम से संपर्क की कोशिश में उनके पीए ने कार को उनका बताया है। इसलिए अब सबसे अहम सवाल कार की वास्तविक खरीद, भुगतान और स्वामित्व के दस्तावेजों से जुड़ता है।

विवाद का असली केंद्र क्या है?

किसी राजनेता का महंगी कार में नजर आना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। असली सवाल तब पैदा होता है जब घोषित संपत्ति, आय के स्रोत, कार की कीमत और उसके स्वामित्व के बीच कोई अस्पष्टता दिखाई दे। मैथिली ठाकुर पेशेवर गायिका भी रही हैं और उनके हलफनामे में गायन, सोशल मीडिया और ब्रांड एंडोर्समेंट आय के स्रोत बताए गए हैं। इसलिए उनकी राजनीतिक आय के साथ-साथ उनके पहले से मौजूद पेशेवर करियर से हुई कमाई भी पूरे वित्तीय संदर्भ का हिस्सा है।

यही वजह है कि इस मामले में सोशल मीडिया की बहस से आगे बढ़कर दस्तावेजी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। कार किसके नाम है, कब खरीदी गई, भुगतान किस स्रोत से हुआ और क्या उसकी वित्तीय जानकारी संबंधित रिकॉर्ड में घोषित है, इन सवालों के स्पष्ट जवाब ही इस पूरे विवाद की तस्वीर साफ कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे सीधे आय से जुड़ी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार का मामला कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन एक युवा विधायक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हस्ती के मामले में पारदर्शिता का सवाल उठना स्वाभाविक है। यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है।

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