देश भर में संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की 132वीं जयंती मनाई जा रही है। आज ही के दिन 14 अप्रैल 1891 में उनका जन्म हुआ था। देश भर में डॉक्टर अंबेडकर के लाखों अनुयायाी हैं। लिहाजा उनकी जयंती पर कई राजनीति और सामाजिक आयोजन किये जा रहे हैं। तेलंगाना के हैदाराबाद में सीएम के चंद्रशेखर राव डॉक्टर अंबेडकर की 125 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण करेंगे। दावा किया जा रहा है कि बाबा साहेब की ये देश की सबसे उंची प्रतिमा है।
- अंबेडकर जयंती पर महू में बड़ा आयोजन
- जयंती के बहाने दलित वोट बैंक पर नजर
- साल के अंत में होना हैं विधानसभा चुनाव
- लाखों अनुयायी पहुंचे जन्मस्थली महू
- महू है बाबा साहेब की जन्मस्थली
- 14 अप्रैल 1891 में महू में हुआ था जन्म
अंबेडकर जयंती पर सबसे अधिक उत्साह मध्यप्रदेश में देखा जा रहा है,क्योंकि बाबा साहेब का जन्म इंदौर के पास महू में हुआ। ऐसे में महू में हो रहे समारोह में देश भर से लाखों अनुयायी पहुंचे हैं। वैसे तो हर साल यहां विशेष आयोजन किया जाता है लेकिन साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना हैं। इसके बाद 2024 में लोकसभा चुनाव की सरगर्मी रहेगी। इस लिहाज से भी राजनीतिक पार्टियों की ओर से विभिन्न आयोजन किये जा रहे हैंं। ये आयोजन भी सियासी रंग में रंगा नजर आ रहा है। आयोजन में मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान तो शामिल होंंगे ही पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के साथ यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर रावण भी महू पहुंचे हैं। मप्र के दलित वर्ग को साधने के लिए बीजेपी के अलावा दूसरे दल भी कवायद में जुटे हैं। कांग्रेस ने अंबेडकर जयंती के दिन महू में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसके अलावा समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी और आजाद समाज पार्टी भी 14 अप्रैल को एक कार्यक्रम करने जा रही है। हालांकि, मायावती की बसपा ने अभी तक किसी बड़े कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है।
एससी एसटी वोट साधने की कोशिश
वहीं एससी एसटी वर्ग के वोटों को साधने के लिए मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार इस बार अंबेडकर जयंती को बड़े पैमाने पर मना रही है। इस बार प्रदेश के तीन जिले इंदौर जिले के महू , खरगोन जिले के महेश्वर और ग्वालियर में बड़े आयोजन रखे गए हैं। जयंती समारोह के दो दिन बाद बीजेपी अंबेडकर महाकुंभ का भी आयोजन करने जा रही है। इस महाकुंभ का आयोजन डॉक्टर बीआर अंबेडकर के जन्मस्थान अंबेडकर नगर से करीब 500 किलोमीटर दूर और ग्वालिर में किया जा रहा है। इस महाकुंभ में करीब एक लाख लोगों के आने की उम्मीद है।
महाकुंभ के बहाने भाजपा एक बड़ा सियासी संदेश
महाकुंभ के बहाने भाजपा एक बड़ा सियासी संदेश देना चाहती है। दरअसल बीजेपी इस महाकुंभ के बहाने ग्वालियर और चंबल संभाग के नाराज दलित मतदाताओं को लुभाना चाहती है। बता दें साल 2017 में इस इलाके में जातिगत तनाव के चलते दलित वर्ग के आधा दर्जन लोग मारे गए थे। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस वजह से इलाके के दलित मतदाताओं ने बीजेपी का बहिष्कार करने का फैसला किया है। ऐसे में बीजेपी इस महाकुंभ के जरिए अपने से नाराज दलित वर्ग के मतदाताओं को मनाने की भरपूर कोशिश करेगी। अंबेडकर महाकुंभ में बीजेपी के सभी दिग्गज नेता शामिल हो रहे हैं। बीजेपी के अनुसूचित जाति विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य का कहना है अंबेडकर जी आस्था का विषय हैं। हम अनुसूचित जाति समुदाय के लिए एक साल में छह कार्यक्रम आयोजित करते हैं। हर साल हम अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम होते हैं। ग्वालियर में बीजेपी महाकुंभ का आयोजन कर रही है। यह वोट के लिए नहीं है क्योंकि अनुसूचित जाति समुदाय भाजपा के साथ है।
निर्णायक भूमिका में दलित वोट
ग्वालियर-चंबल संभाग की 34 विधानसभा सीटें हैं। खास बात यह है कि इन सीटों पर 22 प्रतिशत वोट दलित वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में इन 34 सीटों में से बीजेपी केवल 7 सीटें जीतने में सफल रही थी। कांग्रेस ने 26 सीट पर जीत हासिल की थी। बीएसपी के खाते में 1 सीट आई थी। ऐसे में बीजेपी विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है।





