एशिया में जलवायु परिवर्तन का असर लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की नवीनतम “स्टेट ऑफ क्लाइमेट इन एशिया 2025” रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 महाद्वीप के लिए अत्यधिक मौसमीय घटनाओं वाला साल साबित हुआ। कई देशों में बाढ़, भीषण गर्मी, सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में एशिया का औसत तापमान 1991-2020 की दीर्घकालिक औसत अवधि की तुलना में 0.96 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। बढ़ते तापमान के साथ समुद्र का जलस्तर, महासागरों की गर्मी और ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार भी चिंता का विषय बन गई है।
जापान, चीन और दक्षिण कोरिया ने दर्ज किया अब तक का सबसे गर्म ग्रीष्मकाल
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी एशिया के कई देशों में 2025 के दौरान रिकॉर्ड स्तर की गर्मी देखने को मिली। जापान, चीन और दक्षिण कोरिया ने अपने इतिहास का सबसे गर्म ग्रीष्मकाल दर्ज किया। वहीं मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और अरब प्रायद्वीप के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक हीटवेव का असर बना रहा। लगातार बढ़ते तापमान के कारण उच्च पर्वतीय एशिया में निगरानी किए जा रहे सभी 23 ग्लेशियरों का द्रव्यमान कम हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि सामान्य से कम बर्फबारी और औसत से अधिक तापमान इसके प्रमुख कारण रहे।
समुद्रों की बढ़ती गर्मी और जलस्तर ने तटीय क्षेत्रों की चिंता बढ़ाई
रिपोर्ट में बताया गया है कि एशिया क्षेत्र में महासागरों की ऊष्मा क्षमता लगातार बढ़ रही है और 2025 में यह अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। समुद्र के तापमान में वृद्धि का असर तूफानों की दिशा, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मौसम चक्र पर पड़ रहा है। विशेष रूप से उत्तरी हिंद महासागर के अधिकांश तटीय क्षेत्रों में समुद्र का जलस्तर वैश्विक औसत 3.6 मिलीमीटर प्रति वर्ष की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तटीय आबादी और बुनियादी ढांचे के लिए भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है।
बंगाल की खाड़ी से लेकर जापान सागर तक दर्ज हुआ समुद्री तापमान का रिकॉर्ड
हालांकि 2025 में समुद्री सतह का औसत तापमान 2024 के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा कम रहा, लेकिन यह अब भी पिछले दशक के उच्चतम स्तरों में शामिल रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कारा सागर, जापान सागर, पूर्वी चीन सागर और बंगाल की खाड़ी सहित कई क्षेत्रों में समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। इसके साथ ही हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्री जल की अम्लीयता बढ़ने के संकेत भी मिले हैं, जो समुद्री जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।
अत्यधिक मौसमीय घटनाओं से बढ़ रही आर्थिक और मानवीय चुनौतियां
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि एशिया आज बढ़ते तापमान, समुद्री जलस्तर में वृद्धि और तेजी से पिघलते ग्लेशियरों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। बाढ़, सूखा और भारी वर्षा जैसी घटनाएं बड़े आर्थिक नुकसान और मानवीय संकट का कारण बन रही हैं। वहीं अत्यधिक गर्मी, धूल भरी आंधियां और ग्लेशियल झीलों से आने वाली बाढ़ नई चुनौतियों के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली, समय रहते चेतावनी और प्रभाव आधारित पूर्वानुमान प्रणाली की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में एशिया में मौसम संबंधी आपदाओं की तीव्रता और बढ़ सकती है। तेजी से बदलते जलवायु पैटर्न का असर कृषि, जल संसाधनों, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को मिलकर दीर्घकालिक समाधान तैयार करने होंगे ताकि भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके।