सिंधिया के गढ़ के इस जिले ने रचा इतिहास… SIR में देश के लिए बना मिसाल…
मध्य प्रदेश का अशोकनगर जिला, जो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में शामिल है, आज पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह—मतदाता पुनरीक्षण सर्वेक्षण (SIR – Special Intensive Revision) में 100 फीसदी लक्ष्य को समय से पहले पूरा करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान। देशभर के 12 राज्यों में चल रहे इस सर्वेक्षण में अशोकनगर ने सबसे पहले अपना काम पूरा कर केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे भारत के लिए एक मिसाल पेश कर दी है।
- सिंधिया के गढ़ ने रचा SIR में इतिहास
- अशोकनगर जिला बना देश के लिए बना मिसाल
SIR में MP का अशोकनगर देश में नंबर-1
देश में कई जगहों पर BLO पर अत्यधिक कार्यभार, क्षेत्रों में देरी, फील्ड स्टाफ की कमी और तकनीकी दिक्कतों की खबरें लगातार आती रहीं। लेकिन इन सबके बीच अशोकनगर जिला अलग ही ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ काम करता रहा। परिणाम—समय सीमा 4 दिसंबर तय थी, लेकिन जिले ने उससे पहले ही 100 प्रतिशत SIR पूरा कर इतिहास रच दिया। यह सफलता सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता, जमीनी मेहनत और नागरिकों की सहयोग भावना का प्रभावी उदाहरण बन गई।
कलेक्टर आदित्य सिंह बोले—टीमवर्क और निगरानी से बना रिकॉर्ड
अशोकनगर के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आदित्य सिंह ने जिले की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय पूरे प्रशासनिक तंत्र को दिया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन गूगल मीटिंग के माध्यम से सभी प्रगति की समीक्षा की जाती रही। जिले के हर क्षेत्र में टीमें लगातार सक्रिय रहीं। किसी भी स्तर पर ढिलाई के संकेत मिलते ही तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए गए। कलेक्टर सिंह ने कहा—“यह उपलब्धि टीमवर्क, समय पर समीक्षा और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। मैदानी अमले ने जिन हालात में काम किया, वह प्रेरणा देने वाला है।
BLO और फील्ड वर्कर्स की मेहनत बना आधार
मतदाता पुनरीक्षण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—BLO, सुपरवाइजर, पटवारी, सचिव, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने। बावजूद इसके कि SIR कार्य जटिल था। घर-घर जाकर फॉर्म भरवाना। दस्तावेज़ चेक करना। डुप्लिकेट और मृत मतदाताओं की सूची तैयार करना। नए मतदाताओं का पंजीयन। तकनीकी अपलोडिंग यह सब काम बेहद कम समय में पूरा करना बड़ी चुनौती थी।। लेकिन अशोकनगर के फील्ड वर्कर्स ने एक-एक घर जाकर डेटा को समय पर अपडेट किया और बिना त्रुटि के रिकॉर्ड तैयार किया। इस समर्पण के चलते जिले ने लीड ली और देश में पहले स्थान पर आ गया।
जागरूकता ने बनाया रास्ता आसान
अशोकनगर प्रशासन ने जागरूकता को ही अभियान का आधार बनाया।। पंचायत स्तर पर बैठकें। सोशल मीडिया पर सूचना। स्थानीय कार्यक्रमों में SIR से जुड़ी अपील। BLO द्वारा व्यक्तिगत संपर्क किया । इन सभी प्रयासों के चलते नागरिकों ने खुद आगे आकर फॉर्म भरवाया और दस्तावेज दिए। कलेक्टर ने भी कहा—“अगर नागरिक समय पर सहयोग न करते तो यह उपलब्धि संभव नहीं थी।
जिले के अधिकारी-कर्मचारी देश के लिए उदाहरण
जिला प्रशासन से लेकर ग्राम स्तर तक की टीमों ने बिना छुट्टी लिए लगातार काम किया।
जिला पंचायत सीईओ। अपर कलेक्टर। एसडीएम। तहसीलदार। सभी ने अपने स्तर पर निगरानी की। यह टीमवर्क इतना प्रभावी रहा कि अब पूरे देश में अशोकनगर के SIR मॉडल की चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग इस जिले के SIR वर्कर्स को सम्मानित कर सकता है।
क्यों जरूरी है SIR?
देश के 12 राज्यों में SIR इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि साल 2002 से 2005 के बाद कई राज्यों में मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण नहीं हुआ।
इसका असर
मृत मतदाताओं के नाम हटे नहीं
स्थानांतरित लोग सूची में रह गए
डुप्लिकेट नाम बढ़े
गलत पता या गलत आयु वाले मतदाता सूची में शामिल रहे
SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट को शुद्ध, सटीक और अद्यतित करना है, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया सुचारू और विश्वसनीय रहे। अशोकनगर की सफलता—अन्य जिलों के लिए संदेश। देशभर में जहां कई जिलों में SIR को लेकर विरोध, दबाव और कार्यभार की शिकायतें सामने आईं, वहीं अशोकनगर की उपलब्धि ने दिखा दिया कि अशोकनगर केवल मध्य प्रदेश का गौरव नहीं बना, बल्कि चुनाव प्रणाली सुधारने में पूरे भारत के लिए एक मॉडल जिला बन गया है। सिंधिया के गढ़ ने चुनावी सुधार की नई मिसाल पेश की, SIR में अशोकनगर की सफलता बनी देश का सबसे बड़ा प्रशासनिक उदाहरण।




