रक्षाबंधन की रौनक से गुलजार बाजार : ‘ओम’, ‘स्वास्तिक’ और ‘रुद्राक्ष’ राखियों की धूम,  शहर सहित ग्रामीण इलाकों से उमड़ी खरीदारों की भीड़

Raksha Bandhan 2025

रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देश भर के बाजारों में चहल-पहल और रौनक चरम पर पहुंच चुकी है। इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते के प्रतीक इस पर्व को लेकर शहरों से लेकर गांवों तक जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। खासकर जयपुर और आसपास के इलाकों के बाजारों में राखियों की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है।

बाजारों में छाई है राखियों की चमक

गलियों, सड़कों और प्रमुख बाजारों में रंग-बिरंगी, चमचमाती राखियों की बहार देखने को मिल रही है। ठेले, फुटपाथ, छोटी दुकानों से लेकर ब्रांडेड गिफ्ट शॉप्स तक हर जगह राखियों की वैरायटी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस बार राखियों की रेंज और डिजाइन में भी खासा ध्यान दिया गया है—हर उम्र, हर वर्ग और हर स्वाद के मुताबिक राखियां बाजार में मौजूद हैं।

‘ओम’, ‘स्वास्तिक’, ‘रुद्राक्ष’ और कस्टम राखियों की डिमांड

इस बार पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों वाली राखियां सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं। ‘ओम’, ‘स्वास्तिक’, ‘रुद्राक्ष’ और शुभ रत्नों से सजी राखियों ने बाजार में विशेष स्थान बना लिया है। इसके अलावा कस्टमाइज़ डिजाइन वाली राखियों की भी मांग बढ़ी है, जिनमें बहनें अपने भाई के नाम, फोटो या राशि चिन्ह के अनुसार राखी तैयार करवा रही हैं।

डायमंड जड़ी राखियों, रेशमी धागे वाली राखियां, और ब्रेसलेट स्टाइल राखियों की बिक्री भी तेज़ी से बढ़ रही है। इन राखियों की कीमत 10 रुपये से लेकर 300 रुपये तक की रेंज में है। व्यापारियों का कहना है कि इस बार राखियों की वैरायटी और बिक्री दोनों पिछले साल की तुलना में बेहतर है।

बच्चों के लिए कार्टून और लाइट वाली राखियां हिट

बाजार में छोटे बच्चों को ध्यान में रखते हुए भी राखियों की खास वैरायटी उतारी गई है। छोटा भीम, मोटू पतलू, स्पाइडरमैन, फ्रोज़न, और लाइट वाली राखियां बच्चों को खूब भा रही हैं। इनमें से कुछ राखियां म्यूजिकल भी हैं, जो राखी बांधते समय बच्चों को आकर्षित करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां राखी खरीदने के लिए शहर का रुख कर रही हैं। कई छोटे कस्बों की कॉलोनियों और किराना दुकानों पर भी अब विभिन्न तरह की राखियां उपलब्ध हैं।

पर्यावरण-अनुकूल राखियों की भी बढ़ी डिमांड

इस बार राखियों में ईको-फ्रेंडली यानी पर्यावरण के अनुकूल राखियों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। बाजार में बीज वाली राखियां, बांस की राखियां, और बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी राखियां भी दिखाई दे रही हैं। ये राखियां सिर्फ सजावटी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी दर्शाती हैं।

रेशमी और सूती धागों से बनी राखियां धार्मिक रूप से श्रेष्ठ

धार्मिक जानकारों का कहना है कि रेशमी या सूती धागों से बनी राखियां धार्मिक दृष्टिकोण से सबसे उत्तम मानी जाती हैं। यदि इन राखियों में ‘ओम’, ‘स्वास्तिक’ या ‘रुद्राक्ष’ जैसे पवित्र चिन्ह जुड़े हों तो ये सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक बन जाती हैं। साथ ही, लाल, पीला, केसरिया और हरा रंग शुभता और मंगल की भावना को दर्शाते हैं।

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे शुरू होकर 9 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे तक चलेगी। भद्रा काल 8 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए 9 अगस्त को पूरे दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि भद्रा समाप्त होने के बाद राखी बांधना शुभ होता है और इस बार पूरा दिन ही अनुकूल है।

बहनों की तैयारी जोरों पर

भाईयों के लिए राखी चुनने में बहनें इस बार बेहद सतर्क और भावनात्मक रूप से जुड़ी नजर आ रही हैं। केवल राखी ही नहीं, गिफ्ट हैंपर, मिठाइयों के पैकेट, थाली सजावट और स्नेह के उपहार भी खरीदने का क्रेज देखा जा रहा है। बाजारों में मिठाई की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा सकती है, जहां घेवर, लड्डू, और चॉकलेट बास्केट्स की मांग बढ़ी है।

रक्षाबंधन नजदीक आते ही शहर और गांव ही नहीं छोटे छोटे कस्बे त्योहारमय माहौल में डूब चुके हैं। राखियों की बढ़ती डिमांड, रंग-बिरंगे स्टॉल्स, महिलाओं की उमंग, बच्चों की खुशी और बाजारों की सजावट इस बात का प्रमाण है कि यह पर्व सिर्फ धागों का नहीं, रिश्तों की डोर का पर्व है। बाजार की रौनक और बहनों की मेहनत से यह साफ है कि 9 अगस्त का रक्षाबंधन एक बार फिर भाई-बहन के रिश्ते को नई ऊंचाई देगा—परंपरा, प्यार और आधुनिकता के संगम के साथ। …(प्रकाश कुमार पांडेय)

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