बिहार की राजनीति में अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने पार्टी लाइन से अलग गतिविधियों के आरोप में उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। विवाद की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद चुनाव में जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने का आरोप है। इसी घटनाक्रम में युवा जेडीयू के प्रदेश सचिव अमित प्रकाश पर भी कार्रवाई की गई है।
सवाल है कि आखिर अनंत सिंह कौन हैं, बिहार की राजनीति में उनका कितना प्रभाव रहा है और उन्होंने किस विरोधी उम्मीदवार का समर्थन किया था?
किस विरोधी पार्टी के उम्मीदवार का किया समर्थन?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि जन सुराज पार्टी ने अनुज सिंह को मैदान में उतारा। अनंत सिंह ने अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया और रोड शो में भी हिस्सा लिया। इसी को जेडीयू ने पार्टी विरोधी गतिविधि माना।
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पूरा नाम: अनंत कुमार सिंह
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राजनीतिक पहचान: बिहार के मोकामा से विधायक।
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उपनाम: ‘छोटे सरकार’।
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राजनीतिक क्षेत्र: मोकामा और आसपास का बाढ़ क्षेत्र।
- चुनावी स्थिति: वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जेडीयू के टिकट पर जीत दर्ज की। उन्होंने राजद की वीणा देवी को 28,206 मतों से हराया।
अनंत सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली और विवादित छवि वाले नेता रहे हैं। उनका जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार के साथ पुराना राजनीतिक टकराव भी रहा है। वर्ष 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर उस समय जेडीयू के प्रत्याशी नीरज कुमार को हराया था।
जेडीयू ने कार्रवाई क्यों की?
पार्टी की कार्रवाई के पीछे तीन प्रमुख वजहें बताई गई हैं।
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पार्टी के उम्मीदवार का विरोध: अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया।
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जन सुराज को समर्थन: उन्होंने अनुज सिंह के पक्ष में रोड शो और चुनाव प्रचार किया।
- पार्टी नेतृत्व पर टिप्पणी: जेडीयू ने उन पर वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने और पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया।
24 अक्टूबर 2026 को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए भी विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की अनुशंसा की है। हालांकि, निष्कासन और विधायक पद से अयोग्य ठहराया जाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
विवाद की जड़ क्या है?
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मतभेद केवल विधान परिषद चुनाव तक सीमित नहीं हैं। दोनों के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। अनंत सिंह का तर्क रहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में नीरज कुमार ने उनका विरोध किया था, लेकिन उस समय पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। दूसरी ओर, जेडीयू नेतृत्व ने अपने अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार को संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन माना। राजनीतिक रूप से अहम सवाल: क्या यह कार्रवाई केवल पार्टी अनुशासन का मामला है या जेडीयू के भीतर पुराने नेताओं के बीच चल रही खींचतान का भी परिणाम है? फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार के समर्थन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी से निष्कासन और विधानसभा सदस्यता पर संभावित कार्रवाई तक पहुंच गया है।





