भाईचारे की मिसाल: पाकिस्तान में जन्मीं कमर शेख और प्रधानमंत्री मोदी का 30वां रक्षाबंधन
रक्षाबंधन 2025 के इस खास मौके पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐसा रिश्ता फिर से सुर्खियों में है, जो सीमाओं से परे, दिल से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान में जन्मीं कमर मोहसिन शेख के बीच भाई-बहन का रिश्ता इस वर्ष 30 साल का हो गया है। यह एक ऐसा संबंध है, जो राजनीति, धर्म, सीमाएं और मतभेद सब कुछ पार कर मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बन चुका है।
- 30 साल पुराना रिश्ता
- पाकिस्तानी बहन और भारत के प्रधानमंत्री के बीच राखी का बंधन
- 1981 में भारत आईं थीं कमर शेख
कमर मोहसिन शेख का जन्म पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। 1981 में उनकी शादी एक भारतीय नागरिक मोहसिन शेख से हुई और वे भारत आ गईं। तब से वह गुजरात के अहमदाबाद शहर में रह रही हैं। भारत आने के बाद कमर ने कला की दुनिया में कदम रखा और यहीं से उनका नरेंद्र मोदी से रिश्ता जुड़ने की शुरुआत हुई।
नरेंद्र मोदी से पहली मुलाकात
कमर शेख बताती हैं कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली मुलाकात एक पेंटिंग एग्जीबिशन के दौरान हुई थी। उस समय मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक थे। कमर उस प्रदर्शनी में अपनी कलाकृतियां लेकर दिल्ली गई थीं, जहां नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान मोदी ने कमर से बहन कहकर बात की, और यहीं से उनके बीच भाई-बहन के रिश्ते की शुरुआत हुई।
पहली राखी और फिर ना टूटा ये बंधन
उस पहली मुलाकात के बाद कमर ने मोदी को राखी बांधी और उन्होंने इसे स्वीकार भी किया। इसके बाद हर साल कमर शेख नरेंद्र मोदी को राखी बांधती रहीं। यह सिलसिला तब भी जारी रहा जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और अब तक चला आ रहा है, जब वे देश के प्रधानमंत्री हैं।
2025 में 30वां रक्षाबंधन
इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर कमर शेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 30वीं बार राखी बांधने जा रही हैं। उन्होंने इस बार दो राखियां अपने हाथों से बनाई हैं — एक पर ‘ॐ’ और दूसरी पर ‘भगवान गणेश’ की आकृति है। कमर का कहना है कि वे कभी बाजार से राखी नहीं खरीदतीं, बल्कि हर साल खुद अपने हाथों से विशेष राखी बनाकर मोदी को भेजती हैं या दिल्ली आकर खुद बांधती हैं।
कमर की भावना और आशीर्वाद
कमर शेख ने कई बार मीडिया से बातचीत में यह बताया है कि उन्होंने एक समय पर प्रार्थना की थी कि नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनें। जब यह सपना साकार हुआ, तो मोदी ने उनसे पूछा कि अब वे आगे क्या चाहती हैं। कमर ने जवाब दिया, “मैं चाहती हूं कि आप देश के प्रधानमंत्री बनें।” 2014 में यह सपना भी पूरा हुआ।
अब कमर कहती हैं, “मैं चाहती हूं कि मोदीजी चौथी बार भी प्रधानमंत्री बनें। वे देश के लिए ईमानदारी से काम कर रहे हैं, और मेरा आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है।”
2024 में नहीं जा सकीं दिल्ली, इस बार करेंगी यात्रा
2024 में कुछ पारिवारिक और स्वास्थ्य कारणों की वजह से कमर शेख दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मोदी को राखी नहीं बांध सकीं। लेकिन इस वर्ष उन्होंने पहले से ही तैयारियां कर ली हैं। वे प्रधानमंत्री कार्यालय से निमंत्रण का इंतजार कर रही हैं। निमंत्रण मिलते ही वे अपने पति के साथ दिल्ली जाएंगी और अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेंगी।
एक राखी, दो देश और अटूट बंधन
कमर शेख और नरेंद्र मोदी का यह भाई-बहन का रिश्ता केवल एक निजी भावना नहीं, बल्कि यह दो देशों — भारत और पाकिस्तान — के बीच मानवीय रिश्तों की मिसाल बन गया है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव रहता है, यह रिश्ता यह दिखाता है कि दिलों को जोड़ने के लिए किसी वीज़ा, पासपोर्ट या नीति की जरूरत नहीं होती।
सामाजिक समरसता की प्रतीक
कमर मोहसिन शेख मुस्लिम समुदाय से आती हैं और मोदी हिंदू धर्म से। लेकिन इस रिश्ते ने यह साबित किया है कि धर्म की दीवारें इंसानी रिश्तों को नहीं रोक सकतीं। जब भी वे मोदी से मिलती हैं, वे केवल एक बहन होती हैं और मोदी उनके लिए केवल एक भाई।
राजनीति से ऊपर भावनाओं का रिश्ता
मोदी जैसे कद्दावर राजनेता और एक पाकिस्तानी मूल की महिला के बीच 30 साल से चला आ रहा यह रिश्ता राजनीति की सीमाओं को पार कर गया है। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसा संबंध है जिसे कमर शेख ने पूरे समर्पण, आदर और प्रेम के साथ निभाया है।
एक मिसाल, जो सदा याद रखी जाएगी
रक्षाबंधन केवल धागा बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि एक वचन का पर्व है। कमर शेख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबंध इस त्योहार के मूल भावना को नए आयाम देता है। 30 वर्षों तक लगातार निभाया गया यह रिश्ता यह सिखाता है कि इंसानियत, स्नेह और विश्वास जब जुड़ते हैं तो सीमाएं और मतभेद मायने नहीं रखते।
2025 के रक्षाबंधन पर जब कमर शेख नरेंद्र मोदी की कलाई पर राखी बांधेंगी, तो यह केवल एक रस्म नहीं होगी, बल्कि एक ऐसे रिश्ते का उत्सव होगा, जिसने हर साल दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाया है।…(प्रकाश कुमार पांडेय)





