मल्लिकार्जुन खरगे को अमित शाह का जवाब — RSS पर बैन की मांग खारिज, शाह बोले “राष्ट्र निर्माण में रहा है योगदान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर पलटवार करते हुए RSS का बचाव किया। शाह ने RSS के 100 साल के योगदान का हवाला देते हुए कहा कि यह संगठन “राष्ट्र समर्पित युवाओं का समूह” है, जिसने देश को दो प्रधानमंत्री दिए हैं — अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी।
- खरगे बनाम शाह आमने-सामने
- RSS बैन पर मचा बवाल
- शाह ने खारिज की मांग
- गिनाया संघ का राष्ट्र योगदान
- दो प्रधानमंत्रियों का लिया नाम
- वाजपेयी-मोदी का उदाहरण दिया
- खरगे बोले—देश में अशांति
- RSS समर्थकों ने किया बचाव
- 100 साल की संघ यात्रा
RSS पर प्रतिबंध की मांग से मचा सियासी तूफान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच में देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के विचारों का सम्मान करते हैं, तो उन्हें RSS पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
खरगे ने आरोप लगाया — “देश में हो रही सारी गलत घटनाएं, कानून व्यवस्था की समस्याएं और समाज में बढ़ती नफरत, इन सबकी जड़ बीजेपी और RSS की विचारधारा में है।” खरगे की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। उनके इस बयान के बाद सत्ताधारी दल बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी, और अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से इस पर जवाब दिया है।
अमित शाह का पलटवार — “यह संगठन राष्ट्र के लिए समर्पित”
NDTV के बिहार पावर प्ले कॉन्क्लेव में बातचीत के दौरान अमित शाह ने खरगे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा “RSS एक ऐसा संगठन है जिसने लाखों युवाओं को देश के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दी है। यह संगठन अनुशासन, सेवा और देशभक्ति के मूल्यों पर खड़ा है। इसने देश को दो प्रधानमंत्री दिए हैं — अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी — जिनका नाम इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों में लिया जाएगा। शाह ने कहा कि RSS को बैन करने की मांग कभी पूरी नहीं होगी, क्योंकि यह संगठन देश की संस्कृति, समाज और सेवा कार्यों में गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “संघ को बदनाम करने की कोशिशें नई नहीं हैं, लेकिन हर बार सच्चाई सामने आती है कि यह संगठन राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है।
संघ को लेकर कांग्रेस के भीतर भी मतभेद
खरगे के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर भी एक मतभेद साफ नजर आया। पार्टी के सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने खरगे से असहमति जताते हुए कहा कि वे RSS और बीजेपी की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन मौजूदा कानूनी माहौल में ऐसा प्रतिबंध न तो व्यावहारिक है, न टिकाऊ। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि RSS पर आज़ादी के बाद तीन बार प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद 1975 में आपातकाल के दौरान और 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद। लेकिन हर बार यह प्रतिबंध बाद में हटा लिया गया। चिदंबरम ने कहा कि आज जब RSS से जुड़े लोग सरकार के शीर्ष पदों पर हैं, तो ऐसे में इस संगठन पर बैन लगाने की बात राजनीतिक रूप से असंभव लगती है।
एक नजर में संघ का इतिहास
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संगठन का उद्देश्य भारत को एक संस्कृतिक रूप से एकजुट और राष्ट्रवादी समाज बनाना था। आज RSS के लाखों स्वयंसेवक देशभर में शाखाओं के माध्यम से सामाजिक सेवा, शिक्षा, आपदा राहत और ग्रामीण विकास जैसे कार्यों में सक्रिय हैं। संघ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वैचारिक आधार माना जाता है। स्वतंत्रता के बाद से अब तक RSS का राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव रहा है। हालांकि, कई मौकों पर इसे सांप्रदायिक तनाव और दंगे भड़काने के आरोपों का सामना करना पड़ा है।
राजनीतिक निहितार्थ — चुनावी मौसम में RSS पर निशाना
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि RSS को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच यह बहस केवल विचारधारा की नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का भी हिस्सा है। RSS की 100वीं वर्षगांठ को बीजेपी अपने संगठनात्मक बल और राष्ट्रवाद की विचारधारा के उत्सव के रूप में मना रही है। वहीं कांग्रेस, इसके राजनीतिक प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश कर रही है। खरगे का बयान एक ओर पार्टी के कोर समर्थकों को साधने की कोशिश है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे कांग्रेस की “हिंदू विरोधी सोच” के रूप में पेश कर रही है।
अमित शाह का संदेश — “RSS को बदनाम करने की राजनीति बंद हो
अमित शाह ने अपनी बातचीत के अंत में कहा RSS ने हमेशा देश की एकता, अखंडता और सेवा के लिए काम किया है। इसे बदनाम करने की राजनीति बहुत पुरानी है, लेकिन अब समय आ गया है कि लोग सच्चाई को समझें। जिन्होंने देश के लिए जीवन समर्पित किया है, उन्हें दोषी ठहराना अनुचित है। RSS पर बैन लगाने की मांग ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में वैचारिक विभाजन की रेखा खींच दी है। मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान जहां कांग्रेस की विचारधारात्मक स्थिति को मजबूत करता है, वहीं अमित शाह का जवाब बीजेपी के समर्थकों में संघ की छवि को और प्रबल बनाता है। 100 साल पूरे कर रहा RSS अब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन चुका है — और इसी पर आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज़ होने की संभावना है। प्रकाश कुमार पांडेय





