कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम सामने आ रहे हैं। नीमच जिले के ग्राम बमोरा की श्रीमती प्रेमलता पाटीदार इसका प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी हैं। कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली प्रेमलता आज एक सफल सूक्ष्म उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुकी हैं।
सपनों को मिली उड़ान
प्रेमलता बताती हैं कि वे लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी और मार्गदर्शन के अभाव में यह सपना अधूरा रह जाता था। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की जानकारी मिली। योजना की रूपरेखा और सरकारी सहायता ने उनके मन में आत्मविश्वास जगाया।
योजना के अंतर्गत उन्होंने 23.61 लाख रुपये की लागत से ‘बालाजी उद्योग’ नाम से खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। इस इकाई के लिए उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की जीरन शाखा से 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। शासन की ओर से 8.26 लाख रुपये का अनुदान मिलने से उनकी आर्थिक जिम्मेदारी काफी हद तक कम हो गई।
‘गोपाल कृष्ण’ ब्रांड से बाजार में पहचान
उद्योग की शुरुआत के बाद प्रेमलता ने ‘गोपाल कृष्ण’ नाम से कोकोनट ऑयल का पंजीयन कराया और अपने उत्पाद को स्थानीय बाजार में उतारा। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, आकर्षक पैकेजिंग और ग्राहकों के भरोसे के बल पर उनका ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हुआ।
आज उनका मासिक टर्नओवर 8 से 10 लाख रुपये के बीच पहुंच चुका है। शुद्ध आय के रूप में वे प्रतिमाह 2 से 3 लाख रुपये अर्जित कर रही हैं, जबकि वार्षिक लाभ लगभग 30 लाख रुपये से अधिक हो गया है। एक ग्रामीण महिला के लिए यह उपलब्धि न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण की मिसाल भी है।
रोजगार सृजन में योगदान
प्रेमलता की सफलता केवल व्यक्तिगत प्रगति तक सीमित नहीं है। उनके उद्योग में 7 स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार मिला है। इससे गांव में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरणा मिली है।
वे कहती हैं, “सरकार की योजना ने मुझे दिशा दी, लेकिन सफलता मेरी मेहनत, परिवार के सहयोग और आत्मविश्वास का परिणाम है।” उनका मानना है कि यदि महिलाएं ठान लें, तो किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
नीमच में योजना का प्रभाव
नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक 210 हितग्राहियों को इस योजना से लाभ मिला है। चालू वित्तीय वर्ष में 125 नए सूक्ष्म खाद्य उद्योग स्थापित किए गए हैं। इस उपलब्धि के साथ नीमच जिला प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
प्रेमलता पाटीदार की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। कृषक कल्याण वर्ष-2026 में उनकी सफलता ग्रामीण आत्मनिर्भरता, महिला उद्यमिता और स्थानीय उद्योगों के विकास का सशक्त उदाहरण है। उनकी यात्रा गृहिणी से उद्योगपति बनने तक केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि योजनाओं का सही उपयोग कर गांव की महिलाएं भी आर्थिक परिवर्तन की अगुवाई कर सकती हैं।





