नाना पाटेकर: पर्दे के कलाकार से समाज के अपने नाना तक
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर देशभर में उनके चाहने वालों में शोक व्याप्त है। दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी जा रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नाना पाटेकर के निधन को कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया है। नाना के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए शाह ने उनके पांच दशक लंबे अभिनय सफर, दमदार संवाद अदायगी और समाजसेवा को याद किया।
शाह ने कहा—नाना का जाना अपूरणीय क्षति
अभिनय का शिखर, जड़ों से जुड़ा रहा नाना
शाह ने याद किया नाना का सादगी भरा अंदाज
किरदारों से दिल जीता, सेवा से मिसाल बनाई
नाना को शाह की श्रद्धांजलि, ‘ॐ शांति’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नाना पाटेकर के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए उनके निधन को कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। अमित शाह ने कहा कि भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता नाना पाटेकर ने पांच दशकों से अधिक लंबे अपने करियर में सहज अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। गंभीर सामाजिक मुद्दों से लेकर हास्य और व्यंग्य तक, उन्होंने हर किरदार को जीवंत किया।
गृह मंत्री ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नाना ने ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से सूखा प्रभावित किसान परिवारों की सेवा की और सीमा पर जाकर सैनिकों का हौसला भी बढ़ाया। अमित शाह ने कहा कि शोहरत के शिखर पर पहुंचने के बावजूद नाना पाटेकर अपनी जड़ों से जुड़े रहे।
अमित शाह ने कहा कि जब भी उनकी नाना पाटेकर से मुलाकात हुई, उनकी सादगी और स्पष्टवादिता ने हमेशा प्रभावित किया। उन्होंने दिवंगत अभिनेता के परिवार और प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की और उनकी आत्मा की शांति के लिए ‘ॐ शांति शांति शांति’ कहा।
शोहरत मिली, लेकिन जड़ें नहीं छूटीं
अमित शाह ने अपने संदेश में नाना पाटेकर की जिस बात को खास तौर पर रेखांकित किया, वह है उनकी सादगी और अपनी जड़ों से जुड़ाव। फिल्म इंडस्ट्री में ऊंचा मुकाम हासिल करने के बाद भी नाना का जीवन दूसरे सितारों की तरह चमक-दमक से भरा नजर नहीं आया।
उनका ग्रामीण जीवन, खेती से जुड़ाव और किसानों के प्रति संवेदनशीलता उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
यानी नाना के लिए सफलता सिर्फ बड़े पर्दे पर तालियां बटोरना नहीं थी। उनकी पहचान उस जमीन से भी बनी, जहां से वे आए थे। अमित शाह की श्रद्धांजलि में सिर्फ एक अभिनेता के निधन का दर्द नहीं है। इसमें नाना पाटेकर के उस व्यक्तित्व की तस्वीर भी दिखाई देती है, जो फिल्मी पर्दे की चमक से आगे निकलकर किसान, जवान और आम आदमी से जुड़ा रहा।
पांच दशक का अभिनय, हर किरदार पर गहरी छाप
नाना पाटेकर ने पांच दशकों से ज्यादा के करियर में हिंदी सिनेमा को ऐसे किरदार दिए, जिन्हें दर्शक आज भी याद करते हैं। गंभीर सामाजिक मुद्दों पर आधारित भूमिकाएं हों या हास्य-व्यंग्य से भरे किरदार, नाना की संवाद अदायगी और अभिनय शैली ने उन्हें अलग पहचान दी। उनकी खासियत यह थी कि वे किरदार को सिर्फ निभाते नहीं थे, बल्कि उसे अपनी आवाज, हावभाव और व्यक्तित्व से जीवंत कर देते थे। यही वजह है कि नाना पाटेकर का नाम सिर्फ स्टारडम से नहीं, बल्कि अभिनय की विश्वसनीयता से जुड़ गया।
‘नाम फाउंडेशन’ से किसानों तक पहुंच
नाना पाटेकर के सामाजिक सरोकारों की चर्चा हो तो ‘नाम फाउंडेशन’ का जिक्र जरूरी है। किसानों और सूखा प्रभावित परिवारों की मदद के लिए शुरू की गई इस पहल ने नाना की सार्वजनिक छवि को अभिनेता से आगे बढ़ाया। किसानों के परिवारों की मदद, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी और राहत से जुड़े काम और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाना उनके सामाजिक कार्यों का हिस्सा रहा। यही वजह है कि नाना की विरासत को सिर्फ फिल्मों और संपत्ति के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता।
जवानों के बीच भी दिखाई दिए नाना
अमित शाह ने नाना पाटेकर के सैनिकों के प्रति जुड़ाव को भी याद किया। नाना पाटेकर कई मौकों पर सीमा पर तैनात जवानों के बीच पहुंचे और उनका हौसला बढ़ाया। यह पहल उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू सामने लाती है। पर्दे पर देश और समाज की कहानियां कहने वाला अभिनेता जब वास्तविक जिंदगी में जवानों के बीच पहुंचता है, तो उसकी मौजूदगी का अर्थ सिर्फ एक सेलिब्रिटी की यात्रा तक सीमित नहीं रह जाता।
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा खालीपन है। लेकिन उनके जीवन की कहानी सिर्फ पर्दे पर निभाए गए किरदारों तक सीमित नहीं है। एक कलाकार जिसने अभिनय से पहचान बनाई, किसानों के बीच पहुंचकर संवेदनशीलता दिखाई और जवानों के बीच जाकर हौसला बढ़ाया। अमित शाह के शब्दों में कहें तो नाना पाटेकर का निधन कला जगत की अपूरणीय क्षति है। लेकिन नाना की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही रही कि शोहरत के शिखर पर पहुंचने के बाद भी वे अपनी जड़ों से जुड़े रहे। पर्दे पर किरदार खत्म हो जाते हैं, लेकिन कुछ कलाकार अपने काम और अपने व्यक्तित्व से लोगों के दिल में हमेशा के लिए जगह बना लेते हैं। नाना पाटेकर की कहानी भी ऐसी ही है।