केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का भोपाल दौरा शनिवार को अचानक बदले कार्यक्रमों की वजह से चर्चा में आ गया। गोपालक सम्मेलन को संबोधित करने के बाद अमित शाह के कुछ निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। करुणा धाम मंदिर का दौरा टल गया, प्रेस वार्ता भी नहीं हुई और पश्चिमी बायपास के भूमिपूजन का कार्यक्रम भी आगे बढ़ा दिया गया। इसके बाद अमित शाह दिल्ली के लिए रवाना हो गए। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि केंद्रीय गृह मंत्री को भोपाल का दौरा बीच में ही समेटना पड़ा?
दिल्ली से आया संदेश, बदला पूरा कार्यक्रम
सूत्रों के मुताबिक, गोपालक सम्मेलन के बाद अमित शाह केंद्रीय स्तर के जरूरी मामलों में व्यस्त हो गए। मंत्रालय से जुड़ी अहम बैठकों औ र केंद्रीय मसलों पर चर्चा के लिए उन्हें दिल्ली से जरूरी संदेश मिला। इसके बाद होटल में ही अधिकारियों के साथ बैठकें और वर्चुअल संवाद हुए। यानी कार्यक्रम रद्द होने की वजह किसी सार्वजनिक विवाद या स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम को नहीं माना जा रहा है, बल्कि अचानक सामने आई केंद्रीय व्यस्तता को इसकी वजह बताया जा रहा है।
प्रेस वार्ता क्यों टली?
भोपाल में अमित शाह की प्रेस वार्ता प्रस्तावित थी। लेकिन कार्यक्रम में बदलाव के बाद प्रेस वार्ता भी रद्द हो गई। यही वजह है कि सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि अगर केंद्रीय गृह मंत्री को दिल्ली में इतना जरूरी काम नहीं आया होता तो क्या भोपाल से कोई बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आता? हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रेस वार्ता टलने को किसी राजनीतिक विवाद से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री पहुंचे, लेकिन भूमिपूजन टला
कार्यक्रम में बदलाव का असर दूसरे आयोजनों पर भी पड़ा। आईआईएसईआर से जुड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे, जबकि अमित शाह का पश्चिमी बायपास भूमिपूजन कार्यक्रम टाल दिया गया। इससे साफ है कि बदलाव केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं था। केंद्रीय गृह मंत्री की प्राथमिकता अचानक केंद्रीय बैठकों और दिल्ली से जुड़े जरूरी मामलों की तरफ हो गई थी।
गोपालक सम्मेलन में दिया बड़ा संदेश
हालांकि, अमित शाह ने भोपाल के मुख्य गोपालक सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने गाय और भैंस की नस्ल सुधार के लिए बड़े स्तर पर कार्यक्रम चलाने और गोबर से बनने वाले उत्पादों के जरिए गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बात कही। यानी भोपाल दौरे का सबसे बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम पूरा हुआ, लेकिन इसके बाद का कार्यक्रम अचानक बदल गया।
नशामुक्त मध्यप्रदेश का भी संकल्प
गोपालक सम्मेलन में अमित शाह ने मध्य प्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त बनाने का संकल्प भी दोहराया। यह संदेश केवल सामाजिक अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में सरकार की प्राथमिकताओं से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में अमित शाह के भोपाल दौरे में दो अलग-अलग संदेश दिखाई दिए। एक तरफ सहकारिता, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर रहा, तो दूसरी तरफ नशामुक्ति जैसे सामाजिक अभियान को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता सामने आई।
असली सवाल अब भी दिल्ली वाला
अमित शाह का भोपाल कार्यक्रम अचानक बदलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली में ऐसा कौन सा जरूरी केंद्रीय मसला सामने आया, जिसके कारण गृह मंत्री को तय कार्यक्रम बीच में छोड़ने पड़े? फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी खास केंद्रीय मुद्दे को इसकी वजह नहीं बताया गया है। इसलिए किसी राजनीतिक घ टनाक्रम या बड़ी सियासी हलचल से इसे जोड़ना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि केंद्रीय गृह मंत्री का कार्यक्रम ऐन वक्त पर बदलना अपने आप में असामान्य जरूर है। भोपाल से दिल्ली की अचानक वापसी ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है और अब नजर इस बात पर रहेगी कि दिल्ली में अमित शाह की अचानक बढ़ी व्यस्तता किस मुद्दे से जुड़ी थी।





