Tuesday, March 10, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home शहर और राज्य बिहार पटना

बिहार की राजनीति में हलचल: ‘मेहमान मुख्यमंत्री’ की चर्चा के बीच नीतीश की समृद्धि यात्रा पर सवाल

DigitalDesk by DigitalDesk
March 10, 2026
in पटना, बिहार, मुख्य समाचार, राजनीति
0
Nitish Samruddhi Yatra
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

बिहार की राजनीति में हलचल: ‘मेहमान मुख्यमंत्री’ की चर्चा के बीच नीतीश की समृद्धि यात्रा पर सवाल

बिहार की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि अगर नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं तो फिर उनकी समृद्धि यात्रा’ को दोबारा शुरू करने का क्या मतलब है। यह सवाल केवल राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं बल्कि राज्य की नौकरशाही यानी आईएएस अधिकारियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच यह माना जा रहा है कि जल्द ही नई सरकार का गठन हो सकता है और मुख्यमंत्री पद पर भाजपा का कोई चेहरा सामने आ सकता है। ऐसे में नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा को कई लोग राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं।

समृद्धि यात्रा का उद्देश्य क्या?

सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि समृद्धि यात्रा का मकसद राज्य में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा करना और आम लोगों से संवाद करना है। मुख्यमंत्री इस यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों में जाकर योजनाओं की प्रगति देखेंगे और जनता से सीधा फीडबैक लेंगे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस यात्रा के पीछे एक और मकसद हो सकता है। माना जा रहा है कि यह यात्रा जनता के बीच नीतीश कुमार की लोकप्रियता को फिर से सामने लाने और एक तरह का माहौल तैयार करने की कोशिश हो सकती है, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि राज्य की स्थिरता के लिए उनका मुख्यमंत्री बने रहना जरूरी है।

Related posts

Mayawati expels Vikram Singh

बसपा में बड़ा एक्शन: मायावती ने विक्रम सिंह को पार्टी से निकाला, अपराधियों को सदस्यता दिलाने का आरोप

March 10, 2026
UP economy

उत्तर प्रदेश बनेगा डेटा इकॉनमी का हब, योगी सरकार की नई नीति से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को इस तरह मिलेगी रफ्तार

March 10, 2026

नौकरशाही में क्यों है बेचैनी?

नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की खबरों से केवल जदयू कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि राज्य के कई आईएएस अधिकारी भी असहज महसूस कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारियों पर भरोसा करने  वाले नेता के रूप में जाना जाता है। उनके शासनकाल में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और कई मामलों में नीति निर्धारण में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री बदलते हैं तो प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव संभव है। यही कारण है कि नौकरशाही के कुछ वर्गों में यह चर्चा चल रही है कि नई सरकार आने के बाद अधिकारियों की भूमिका सीमित हो सकती है और कई फैसलों की समीक्षा भी हो सकती है।

नौकरशाही और नीतीश का रिश्ता

बिहार की राजनीति में यह धारणा लंबे समय से रही है कि नीतीश कुमार अपने मंत्रियों से अधिक भरोसा प्रशासनिक अधिकारियों पर करते हैं। उनके शासनकाल में कई आईएएस अधिकारियों का प्रभाव काफी बढ़ा और वे सत्ता संचालन में अहम भूमिका निभाने लगे।इस सिलसिले की शुरुआत अक्सर पूर्व आईएएस अधिकारी आरसीपी सिंह के नाम से जोड़ी जाती है। आरसीपी सिंह पहले आईएएस अधिकारी थे, जिन्होंने नौकरी छोड़कर नीतीश कुमार के साथ काम किया। वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव बने और बाद में राज्यसभा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री तक बने। एक समय ऐसा भी था जब बिहार सरकार में उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली मानी जाती थी।

नीतीश के करीबी रहे कई अफसर

इसी तरह कई अन्य आईएएस अधिकारियों को भी नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। इनमें अशोक कुमार सिंह का नाम प्रमुख है, जो बिहार के मुख्य सचिव रहे और सेवानिवृत्ति के बाद मुख्यमंत्री के सलाहकार बने। दीपक कुमार भी लंबे समय तक मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र अधिकारियों में शामिल रहे। वे मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद भी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और सलाहकार के रूप में काम करते रहे। वर्तमान में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को भी नीतीश कुमार के भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता है। इसके अलावा पटना के पूर्व जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने तो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में प्रवेश कर लिया और अब जदयू में महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

विपक्ष का आरोप: नौकरशाही चला रही सरकार

विपक्षी दल लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि बिहार में शासन व्यवस्था पूरी तरह नौकरशाही के प्रभाव में है। विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री के नाम पर कुछ वरिष्ठ अधिकारी सरकार चला रहे हैं और निर्णय प्रक्रिया में उनका अत्यधिक प्रभाव है। हालांकि सरकार इन आरोपों को हमेशा खारिज करती रही है और कहती है कि प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका केवल योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तक सीमित है।

पिछले वर्ष मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार से जुड़ा एक विवाद भी सामने आया था। जून 2025 में उनकी पत्नी रश्मि रेखा सिन्हा को बिहार राज्य महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। उस समय जारी अधिसूचना में उनके पिता का नाम और पता दर्ज किया गया था, जबकि अन्य सदस्यों के नोटिफिकेशन में उनके पति का नाम और पता लिखा गया था। इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए थे और पारदर्शिता को लेकर आलोचना की थी। हालांकि उस समय सरकार की ओर से मंत्री अशोक चौधरी ने नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा था कि इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है।

भाजपा मुख्यमंत्री को लेकर आशंका

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री बनता है तो प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली में बदलाव आ सकता है। भाजपा की शासन शैली को आमतौर पर अधिक राजनीतिक नियंत्रण और स्पष्ट प्रशासनिक सीमाओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में कई अधिकारी यह मानकर चल रहे हैं कि नई सरकार आने पर कई पदों और जिम्मेदारियों में फेरबदल हो सकता है। यही वजह है कि नौकरशाही के कुछ वर्गों में भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। बिहार की राजनीति में आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा भी शुरू होने जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह यात्रा केवल विकास योजनाओं की समीक्षा तक सीमित रहती है या फिर यह बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत बनती है।

Post Views: 54
Tags: #Nitish Samruddhi Yatra
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

T-20 World Cup 2026: टीम इंडिया की जीत पर शोएब अख्तर की ये बात पाकिस्तानी फैन्स को चुभी

T-20 World Cup 2026: टीम इंडिया की जीत पर शोएब अख्तर की ये बात पाकिस्तानी फैन्स को चुभी

T-20 World Cup 2026: टीम इंडिया की जीत पर शोएब अख्तर की ये बात पाकिस्तानी फैन्स को चुभी

मनोरंजन
T20 World Cup Final: भारत-न्यूजीलैंड भिड़ंत, विजेता पर होगी करोड़ों की बारिश

T20 World Cup Final: भारत-न्यूजीलैंड भिड़ंत, विजेता पर होगी करोड़ों की बारिश

मनोरंजन
West Bengal: ममता का ‘चुनावी मास्टरस्ट्रोक’, आचार संहिता से पहले दो बड़ी योजनाओं का एलान, आज से ही बंगाल में लागू

West Bengal: ममता का ‘चुनावी मास्टरस्ट्रोक’, आचार संहिता से पहले दो बड़ी योजनाओं का एलान, आज से ही बंगाल में लागू

मुख्य समाचार

RSS Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version