ट्रंप की नई टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार को एक बार फिर अस्थिरता की ओर ले जा रही है। यह केवल आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का राजनीतिक संदेश भी है। भारत सहित सभी प्रभावित देशों के सामने अब सीमित समय है — या तो समझौता करें या अमेरिकी बाजार में महंगी कीमत चुकाएं।
1 अगस्त से अमेरिका लगाएगा भारी टैरिफ: ट्रंप प्रशासन की नई चेतावनी
9 जुलाई तक ट्रेड डील का मौका, अन्यथा भुगतना पड़ेगा टैरिफ का झटका
डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान: 1 अगस्त से टैरिफ लागू होंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि BRICS के जिन देशों के साथ 9 जुलाई 2025 तक व्यापारिक समझौता नहीं होता, उन पर 1 अगस्त से भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लागू कर दिए जाएंगे। यह टैरिफ दरें वही होंगी जो 2 अप्रैल को घोषित की गई थीं, जिनमें कुछ देशों पर 10% से भी अधिक शुल्क प्रस्तावित था। ट्रंप के मुताबिक उन्होंने इस बाबत 12 देशों को टैरिफ नोटिस देने वाले पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
9 जुलाई तक डील का समय, फिर टैरिफ नोटिस
ट्रंप ने कहा कि 9 जुलाई अंतिम तारीख है, इसके बाद व्यापारिक साझेदारों को टैरिफ नोटिस भेज दिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह “डेडलाइन” नहीं बल्कि एक वास्तविक कार्यान्वयन की तारीख है। अमेरिका की इस रणनीति को “मैक्सिमम प्रेशर” कहा जा रहा है, जिससे देशों को जल्दी निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जा सके। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि यह धमकी नहीं, बल्कि अमेरिका की नीति का हिस्सा है — “समझौता करें या टैरिफ का सामना करें”।
अब तक किन देशों से हुआ समझौता?
ट्रंप प्रशासन ने अब तक यूनाइटेड किंगडम (UK) और वियतनाम के साथ सफल व्यापार समझौते किए हैं। इसके अलावा अमेरिका और चीन ने आपसी टैरिफ को अस्थायी रूप से कम करने पर सहमति जताई है। स्कॉट बेसेन्ट ने बताया कि कई अन्य देशों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन उन्होंने देशों के नाम नहीं बताए। उनका कहना था कि अमेरिका छूट देने में जल्दबाज़ी नहीं करेगा और हर समझौता अमेरिका के हित में होगा।
ट्रंप का सख्त रुख: “ट्रेड करना है तो कीमत चुकानी होगी”
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि “नोटिस भेजना 15 अलग-अलग बैठकों से ज्यादा आसान है।” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर कोई देश अमेरिका के साथ व्यापार करना चाहता है, तो उसे अमेरिका के शर्तों के अनुसार चलना होगा। उनका यह भी कहना था कि अमेरिका अब ‘फेयर ट्रेड’ चाहता है, न कि ‘फ्री ट्रेड’। ट्रंप की यह रणनीति चुनावी वर्ष में घरेलू औद्योगिक हितों को साधने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील?
भारत पर इस अमेरिकी फैसले का सीधा असर पड़ सकता है। भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले वस्त्र, ऑटो पार्ट्स, फार्मास्युटिकल्स और इंजीनियरिंग उत्पादों पर टैरिफ बढ़ सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। साथ ही, अमेरिका में रहने वाले भारतीय निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए भी अनिश्चितता का माहौल बन सकता है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में संबंध मजबूत हुए हैं, लेकिन ट्रेड डेफिसिट, डेटा लोकलाइजेशन और टैक्सेशन जैसे मुद्दों पर मतभेद अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में 9 जुलाई से पहले भारत को एक समझौते पर पहुंचना अहम होगा। वरना टैरिफ की मार से व्यापार को बड़ा झटका लग सकता है।
बता दें कि भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच मिनी ट्रेड डील अपने आखरी चरणों में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले करीब 24-30 घंटों के दरमियान इस पर कोई बड़ा फैसला होने की उम्मीद है। हालांकि ट्रेड डील से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर से ब्रिक्स के देशों को टैरिफ की बड़ी धमकी दी है। ऐसे में यह उलझन बनी हुई है कि फिलहाल डील कब साइन होगी। किस पैमाने पर डील होगी। इस पर अब तक सरकार की ओर से ऑफिशियल जानकारी नहीं आई है।..(प्रकाश कुमार पांडेय)