Moody’s Warning To America: दुनिया भर को टैरिफ की धमक दिखा रहा अमेरिका स्वयं मंदी की कगार पर… मूडीज ने दी अमेरिका को चेतावनी
अमेरिका के लिए बुरी खबर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दुनिया भर में टैरिफ लगाकर अपनी आर्थिक ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। चीन, यूरोप और भारत जैसे देशों पर आयात शुल्क बढ़ाने के निर्णय को ट्रंप अमेरिका की जीत बता रहे रहे हैं। लेकिन इसी बीच ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज Moody’s की रिपोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। मूडीज ने कहा है कि अमेरिका स्वयं ही गंभीर मंदी Recession के मुहाने पर पहुंच गया है।
मूडीज की रिपोर्ट का खुलासा
लेटेस्ट रिपोर्ट में मूडीज ने साफ किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का करीब एक-तिहाई हिस्सा पहले से ही संकट में है। मूडीज एनालिटिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी के मुताबिक, राज्य-स्तरीय आंकड़े यह बताते हैं कि कई प्रमुख राज्य या तो मंदी में फंस चुके हैं या जल्द ही मंदी की चपेट में आ जाएंगे।
अमेरिकी जीडीपी पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद (US GDP) का लगभग 33% हिस्सा बनाने वाले राज्य अब आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही, तो इसका असर अमेरिकी वित्तीय तंत्र, रोज़गार और उद्योगों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
ट्रंप के दावों पर सवाल
ट्रंप प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ रेट और महंगाई नियंत्रण में है। राष्ट्रपति ट्रंप खुद बार-बार यह कहते रहे हैं कि टैरिफ की वजह से अमेरिका को फायदा हो रहा है। लेकिन मूडीज की चेतावनी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ का सकारात्मक असर सीमित है, जबकि इसके नकारात्मक प्रभाव तेजी से सामने आ रहे हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालत खस्ता
पिछले दिनों रॉयटर्स की रिपोर्ट जारी हुई थी जिसमें भी इसी खतरे की ओर इशारा करती है। पिछले माह अगस्त में अमेरिका का मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर करीब 48.7 तक जा पहुंचा है। यह मंदी के दौर का संकेत देता है। यह स्तर 2008 की “ग्रेट रिसेशन” के समय से भी नीचे बताया गया है। लगातार छठे महीने अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है। कारखाने बंद हो रहे हैं, ऑर्डर घट रहे हैं और नई नौकरियों में कटौती हो रही है।
टैरिफ से बिगड़ा माहौल
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर अब घरेलू उद्योगों पर ही भारी पड़ रहा है। कच्चे माल की लागत बढ़ गई है। निर्यात बाजार सिकुड़ गया है। विदेशी कंपनियों ने निवेश रोक दिया है। मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि मौजूदा हालात महामंदी से भी बदतर हैं। उनका मानना है कि ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने अमेरिका को ग्लोबल सप्लाई चेन से अलग-थलग कर दिया है।
रोजगार पर गहराया संकट
अमेरिकी रोजगार बाजार पर भी खतरे की घंटी बज गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक राज्यों में बेरोजगारी दर तेजी से बढ़ रही है। खासकर ऑटोमोबाइल, स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले महीनों में लाखों नौकरियों पर तलवार लटक सकती है।
अंतरराष्ट्रीय असर
अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मंदी का मतलब है पूरी दुनिया पर असर। वैश्विक व्यापार और निवेश का सबसे बड़ा केंद्र अमेरिका ही है। अगर वहां मंदी गहराती है, तो यूरोप, एशिया और उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी इसकी चपेट में आ जाएंगी। भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिकी मांग घटने से निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।
अर्थ विशेषज्ञों की राय
मूडीज ही नहीं, बल्कि कई अन्य संस्थानों ने भी चेतावनी दी है। आईएमएफ (IMF) पहले ही कह चुका है कि अमेरिका की “प्रोटेक्शनिस्ट नीतियां” वैश्विक मंदी को जन्म दे सकती हैं। वॉल स्ट्रीट विश्लेषकों का मानना है कि अगले 12 महीनों में अमेरिकी शेयर बाजार 20% तक गिर सकता है। मार्क जैंडी ने कहा, “यह सही समय है जब अमेरिका को टैरिफ की जगह सहयोगी नीतियों पर जोर देना चाहिए।”
अमेरिका दुनिया पर टैरिफ की धौंस दिखा रहा है, लेकिन इसके नतीजे अब उलटे पड़ते दिखाई दे रहे हैं। मूडीज की चेतावनी सिर्फ ट्रंप प्रशासन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। अगर समय रहते नीतियों में बदलाव नहीं किया गया, तो यह संकट 2008 की महामंदी से भी बड़ा साबित हो सकता है।…( प्रकाश कुमार पांडेय)