बांधवगढ़ समेत एमपी के सभी टाइगर रिजर्व 30 जून के बाद कोर जोन से होंगे बंद..बफर में जारी रहेगा पर्यटन…जानिए क्यों लिया गया यह फैसला

All tiger reserves of MP including Bandhavgarh will be closed from the core zone after June 30

Bandhavgarh विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व 30 जून 2025 से कोर क्षेत्र की टाइगर सफारी को बंद करने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए ताला, मगधी और खितौली कोर ज़ोन में सफारी पर रोक लगाई जाएगी। यह निर्णय वन्यजीवों की सुरक्षा और ट्रैक की हालत को ध्यान में रखकर लिया गया है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: 30 जून से बंद हो जाएंगे कोर ज़ोन में टाइगर सफारी के गेट…

मध्यप्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, जिनमें बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, सतपुड़ा और संजय टाइगर रिजर्व शामिल हैं। 30 जून की शाम से पर्यटकों के लिए कोर जोन बंद कर देंगे। तीन महीने के वर्षाकाल में यह प्रतिबंध वन्य जीवों विशेषकर बाघों को सुकून, संसर्ग और शांति का वातावरण देने के लिए लगाया जाता है।

क्यों बंद होता है कोर ज़ोन?

वर्षाकाल में पार्क बंद करने के पीछे कई वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण होते हैं। बाघों का संसर्ग काल यह वह समय होता है जब बाघ और बाघिन साथ रहते हैं। इस दौरान उनका व्यवहार आक्रामक होता है, और एकांत उनकी जैविक आवश्यकताओं में शामिल होता है।

रास्तों की दयनीय स्थिति
जंगलों के भीतर अधिकतर रास्ते कच्चे होते हैं, जो बारिश में दलदली बन जाते हैं। इससे वाहनों के फंसने और पर्यटकों के फंसने या दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना
इस मौसम में जंगल खुद को पुनर्संवर्धित करता है। नए पौधों का उगना, झाड़ियों का फैलाव और

वन्यजीवों का प्रवास
ये सब प्रकृति के संतुलन का हिस्सा हैं, जिन्हें मनुष्य की गतिविधियों से नुकसान होता है।

बफर जोन में जारी सफारी, चिंता का विषय

हालांकि कोर जोन तीन महीने के लिए बंद रहेगा, लेकिन बफर जोन में सफारी, यहां तक कि नाइट सफारी भी चालू रहेगी। यह स्थिति वन्य जीवों के लिए असहज मानी जा रही है। बाघ शर्मीले स्वभाव के होते हैं, और पर्यटकों की गाड़ियों से उत्पन्न आवाज़, रोशनी और हलचल उन्हें अपने व्यवहार में बदलाव के लिए विवश कर सकती है। यह न केवल उनके प्रजनन व्यवहार को प्रभावित करता है बल्कि उनके प्राकृतिक आचरण में भी हस्तक्षेप करता है।

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