“सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार” — गंगासागर मेले में आस्था का महासंगम
दक्षिण 24 परगना (पश्चिम बंगाल), 16 जनवरी। पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गंगासागर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और इसके बाद कपिल मुनि आश्रम में पूजा-अर्चना की। चारों ओर “हर-हर गंगे” और “सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार” के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गंगासागर में एक बार स्नान करने से वह पुण्य फल प्राप्त होता है, जो अन्य सभी तीर्थों की बार-बार यात्रा से मिलता है।
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गंगासागर में आस्था का महासंगम
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मकर संक्रांति पर गंगा स्नान
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नागा साधुओं का आध्यात्मिक जमावड़ा
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संगम स्थल पर मोक्ष की आस्था
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सुरक्षा के पुख्ता सरकारी इंतजाम
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श्रद्धालुओं ने सराही व्यवस्थाएं
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वसुधैव कुटुंबकम् का जीवंत स्वरूप
नागा साधु और अखाड़ों की उपस्थिति
हर वर्ष की तरह इस बार भी गंगासागर मेला धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष रहा। बड़ी संख्या में नागा साधु मेले में पहुंचे और श्रद्धालु उनसे आशीर्वाद लेते नजर आए। साधु-संतों की उपस्थिति ने मेले को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। इस वर्ष पहली बार तारापीठ, असम की कामाख्या, देवघर और दिल्ली के किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर भी गंगासागर मेले में शामिल हुए, जिससे मेले की गरिमा और बढ़ गई। गंगासागर वह पवित्र स्थल है जहां गंगा नदी समुद्र से मिलती है। मान्यता है कि इसी संगम स्थल पर स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी विश्वास के चलते देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे। बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे—सभी ने कड़ाके की ठंड के बावजूद गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
गंगा-सागर संगम का धार्मिक महत्व
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मेले के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। तृणमूल कांग्रेस के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के मंत्री सुजीत बोस ने व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि गंगासागर मेले में सुरक्षा उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गंगा में डुबकी लगाने का अनुभव हमेशा अद्भुत होता है और इस मेले के लिए विशेष रूप से अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सुजीत बोस के अनुसार, रुद्रनगर क्षेत्र में कुल 18 फायर स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 7 स्थायी परिसर के बाहर और 11 अस्थायी फायर स्टेशन हैं। इस मेले में 450 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि अब तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, केवल एक-दो छोटी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें तुरंत नियंत्रित कर लिया गया। संपूर्ण स्थिति नियंत्रण में है।
सरकारी इंतजाम और सुरक्षा व्यवस्था
मंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने कई श्रद्धालुओं से सीधे बातचीत की और अधिकांश लोगों ने राज्य सरकार की व्यवस्थाओं की सराहना की। साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य और अग्नि सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग गंगासागर मेले में पहुंचे हैं, जो इस आयोजन की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। मेले में आए एक नागा साधु, जिन्होंने स्वयं को नागा बाबा बताया, ने कहा कि पीढ़ियों से साधु-संत इस मेले में आते रहे हैं। उनके अनुसार, गंगासागर केवल एक मेला नहीं, बल्कि साधना और भक्ति का केंद्र है। उन्होंने कहा कि उनका समूह हर साल यहां आता है, गंगा स्नान करता है और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है। नागा बाबा ने कहा, “सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार। हमारी मां गंगा विभिन्न मार्गों से होकर यहां आती हैं और समुद्र में समाहित हो जाती हैं। अलग-अलग पीढ़ियों के संत और गुरुओं ने इस मेले में भाग लिया है। हम हर साल आते हैं, यहां समय बिताते हैं और गंगासागर में स्नान करते हैं। व्यवस्थाओं को लेकर हमें कोई शिकायत नहीं है। हम साधु हैं, हमारे लिए अच्छा-बुरा समान है। हमारा उद्देश्य केवल ईश्वर भक्ति है, हमें सांसारिक विषयों में रुचि नहीं।”
18 फायर स्टेशन, 450 कर्मी तैनात..श्रद्धालुओं ने सराही व्यवस्थाएं
गंगासागर मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देता है। यहां विभिन्न अखाड़ों के साधु, अलग-अलग राज्यों और देशों से आए श्रद्धालु, प्रशासनिक अधिकारी और स्वयंसेवक—सभी एक साथ मिलकर इस विराट आयोजन को सफल बनाते हैं। यह मेला भारतीय संस्कृति में निहित “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को साकार करता है। कुल मिलाकर, मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित गंगासागर मेला एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि आस्था, अनुशासन और समर्पण के साथ किया गया आयोजन न केवल सफल होता है, बल्कि लोगों के मन में गहरी छाप भी छोड़ता है। गंगासागर में गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ लौटे कि उन्होंने जीवन का एक दुर्लभ और पुण्यदायी अनुभव प्राप्त किया है।





