15 कंपनियों ने किया 4320 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश में शराब, बीयर और वाइन उद्योग को एक नई दिशा मिल रही है। 15 कंपनियों ने राज्य सरकार के आबकारी विभाग को 4320 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सौंपे हैं। इन प्रस्तावों के तहत 15 जिलों में एल्कोहल निर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। यह निवेश न केवल उद्योग को बढ़ावा देगा बल्कि रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि में भी योगदान देगा।
उत्तर प्रदेश सरकार के आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने भरोसा दिलाया है कि निवेशकों को नीति के अनुरूप सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में आबकारी विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
यूपी के 15 जिलों में स्थापित होंगी निर्माण इकाइयां
प्रस्तावित निवेश के तहत शराब निर्माण की इकाइयां 15 जिलों में लगाई जाएंगी। इन प्रमुख निवेश प्रस्तावों में शामिल हैं।
केयांस डिस्टलरी (गोरखपुर): ₹2265 करोड़
सीआरआइ फूड एंड बेवरेज (स्थान तय नहीं): ₹300 करोड़
शिवांश एलाइंस इंडस्ट्रीज (सीतापुर): ₹300 करोड़
शिवांश एलाइड इंडिया प्रा. लि. (हरदोई): ₹250 करोड़
इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी कंपनियों ने निवेश रुचि दिखाई है। इन इकाइयों के शुरू होने से संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
यूपी के राजस्व में शराब का 25% योगदान
उत्तर प्रदेश में शराब से होने वाला राजस्व राज्य की कुल आय का 25 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। आबकारी विभाग का कहना है कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वाणिज्यिक विकास, औद्योगिक निवेश, और निर्यात जैसे क्षेत्रों में यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। अर्थ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को एल्कोहल निर्यात नीति को भी पुनः तैयार करना चाहिए, जिससे राज्य अपने शराब उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेज सके और वैश्विक राजस्व कमा सके।
नई शराब नीति 2025-26 में निवेश को प्रोत्साहन
यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की नई आबकारी नीति 2025-26 में वाइनरी के साथ ही माइक्रो-ब्रेवरीज को भी खास प्रोत्साहन दिया है। अब तक राज्य सरकार को करीब 142 निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इन निवेश प्रस्तावों में से करीब 135 एमओयू के अंतर्गत ₹39,479 करोड़ की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसमें से राज्य में 19 इकाइयों में करीब ₹2,339.6 करोड़ का निवेश पहले ही किया जा चुका है।
यह नीति न केवल प्रदेश में घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करती है बल्कि स्थानीय रोजगार, कृषि आधारित उद्योगों, और स्थायी उत्पादन तकनीकों को भी बढ़ावा देती है।
दूसरे राज्यों ने भी दिखाई रुचि, निर्यात नीति की मांग
उत्तर प्रदेश की नई शराब नीति को अब अन्य राज्यों जैसे पंजाब, महाराष्ट्र और कर्नाटक ने भी अध्ययन के लिए चुना है। इसका उद्देश्य वहां की आबकारी नीतियों को बेहतर बनाना और उत्तर प्रदेश की सफलता से सीख लेना है। इस बीच, उद्योग विशेषज्ञों और कारोबारियों ने सरकार से एल्कोहल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग नीति लाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे राज्य को विदेशी मुद्रा, ब्रांड वैल्यू, और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार का 4320 करोड़ का एल्कोहल निवेश प्रस्ताव और नई आबकारी नीति राज्य को औद्योगिक विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम साबित हो सकता है। शराब उद्योग में हो रहे निवेश से न केवल राजस्व वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, उत्पादन, और निर्यात क्षमताएं भी बढ़ेंगी। यह स्पष्ट है कि यूपी अब सिर्फ खेती या पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं, बल्कि शराब और पेय निर्माण के क्षेत्र में भी अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।…प्रकाश कुमार पांडेय





