शंकराचार्य से आशीर्वाद लेकर अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा ऐलान, SC-ST एक्ट के खिलाफ 7 फरवरी 2026 से देशव्यापी आंदोलन
नौकरशाही की सुरक्षित और प्रतिष्ठित दुनिया को छोड़कर वैचारिक संघर्ष का रास्ता चुनने वाले बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर अपने तीखे बयानों और बड़े ऐलान को लेकर सुर्खियों में हैं। रविवार देर शाम उन्होंने वाराणसी स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और इसके साथ ही SC-ST एक्ट के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की औपचारिक घोषणा कर दी। अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा है कि अगर 6 फरवरी 2026 तक केंद्र सरकार इस कानून को खत्म नहीं करती, तो 7 फरवरी से पूरे देश से लोग दिल्ली कूच करेंगे।
वाराणसी में शंकराचार्य से मुलाकात
अलंकार अग्निहोत्री रविवार को वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने ज्योतिष पीठ स्थित विद्यामठ आश्रम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भेंट की। यह मुलाकात वैदिक मंत्रोच्चार, श्लोक-पाठ और पारंपरिक धार्मिक वातावरण के बीच हुई। अलंकार अग्निहोत्री ने इस अवसर को अपने आगामी आंदोलन की शुरुआत बताया और कहा कि किसी भी बड़े और जनहित से जुड़े कार्य से पहले गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा का हिस्सा है।
मौन व्रत में शंकराचार्य, लिखकर दिया आशीर्वाद
मुलाकात के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौन व्रत पर थे। इस वजह से दोनों के बीच लंबी बातचीत नहीं हो सकी। अलंकार अग्निहोत्री के अनुसार, शंकराचार्य ने लिखकर उनका हाल-चाल पूछा और आंदोलन के लिए आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य से मिला यह आशीर्वाद उनके संघर्ष को नैतिक और आध्यात्मिक मजबूती देगा। अलंकार का कहना है कि धर्म और समाज को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों का उद्देश्य समाज का कल्याण और न्याय की स्थापना ही है।
6 फरवरी की डेडलाइन, 7 फरवरी से आंदोलन
शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने के बाद मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने अपने आंदोलन की स्पष्ट रूपरेखा रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को 6 फरवरी 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर SC-ST एक्ट को समाप्त करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो 7 फरवरी से देशभर के लोग दिल्ली की ओर कूच करेंगे। अलंकार अग्निहोत्री का दावा है कि यह आंदोलन अब किसी एक व्यक्ति या समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके समर्थन में माहौल बन चुका है। उन्होंने इसे सिर्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत बताया।
केंद्र सरकार और नीतियों पर तीखा हमला
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन व्यवस्था आम जनता की आवाज को अनदेखा कर रही है। उनके शब्दों में, “आज देश में वेस्ट इंडिया कंपनी की तरह सरकार चल रही है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार ने जनता की मांगों को नजरअंदाज किया, तो लोग सत्ता परिवर्तन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी असंतोष जताया और कहा कि ये नीतियां शिक्षा और समाज दोनों के लिए नुकसानदेह हैं।
इस्तीफे से आंदोलन तक का सफर
अलंकार अग्निहोत्री हाल के महीनों में उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अपने प्रशासनिक पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने दावा किया था कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके वेदपाठी बटुकों के साथ हुई कथित घटना और यूजीसी के नए नियमों से वे बेहद आहत थे। इसके बाद उन्हें निलंबित भी किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर नौकरशाही छोड़कर सड़क पर उतरने का उनका फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था। हालांकि, अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि यह कदम उन्होंने भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि गहरे वैचारिक मंथन के बाद उठाया।
SC-ST एक्ट पर गंभीर आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने SC-ST एक्ट को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि वे पिछले 35 वर्षों से इस कानून के सामाजिक प्रभावों को देख रहे हैं। उनके अनुसार, यह कानून अब समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे समाज में तनाव और विभाजन बढ़ रहा है। अलंकार का यह भी कहना है कि किसी भी कानून का उद्देश्य न्याय होना चाहिए, लेकिन अगर वही कानून भय और असमानता का कारण बनने लगे, तो उस पर पुनर्विचार जरूरी हो जाता है। अलंकार अग्निहोत्री के इस ऐलान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां उनके समर्थक इसे साहसिक कदम बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे विवादास्पद और संवेदनशील मुद्दे से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल सबकी नजरें 6 फरवरी की डेडलाइन पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस चेतावनी को किस तरह लेती है और क्या वाकई 7 फरवरी से देशव्यापी आंदोलन की तस्वीर साकार होती है।