आखिरकार सामने आए धनखड़, इस्तीफे के 40 दिन बाद छतरपुर फार्महाउस में दिखे पूर्व उपराष्ट्रपति

आखिरकार मिल गए धनखड़
पूर्व उपराष्ट्रपति इस्तीफा देने के बाद से कहां है लगातार ये सवाल विपक्ष कर रहा था। विपक्ष के कई नेताओं के सवाल का जवाब अब मिल गया है.। खबरों के मुताबिक धनखड़ अब छतपुर के फार्म हाउस में शिफ्ट हुए हैं। छतपुर के इस फार्म हाउस में धनखड़ के शिफ्ट होने की खबर सुरक्षआ ऐजेसियों को भी दे दी गई है।

इस्तीफे के बाद पहली बार खबरों में आए धनखड़
खबरों के मुताबिक धनखड़ इस्तीफे के तकरीबन 40 दिन बीतने के बाद अपने दांत के चेकअप के लिए । धनखड़ दिल्ली के धौलाकुआं स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल जाने के लिए बाहर निकले। अब जगदीप धनखड़ दिल्ली के छतरपुर एन्कलेव स्थित अपने नए ठिकान पर शिफ्ट हो गए है। धनखड़ का ये नया ठिकाना नेशनल लोकदल के प्रमुख अभय सिहं चौटाला का फार्म हाउस है जो दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर में स्थित है।

इस्तीफे के बाद किसी से नही मिले धनखड़
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपने इस्तीफे के बाद से किसी से नहीं मिले है। विपक्ष के कई नेताओं का तो यहां तक कहना था कि धनखड़ से मिलने की कोशिश की गई उनसे समय लेने के लिए उनके निजी सचिव को कॉल किया गया लेकिन किसी तरह का रिसपांस नहीं मिला। विपक्ष के नेताओं का यहां तक आरोप है कि- धनखड़ ऐसी कोई बात जानते है जो बीजेपी को नुकसान दे सकती है। शायद यही वजह है कि-एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन के नामांकन में भी धनखड़ मौजूद नहीं थे।

विवादों में रहा धनखड़ का इस्तीफा
जगदीप धनखड ने मॉनसून सत्र के पहले ही दिन देर रात इस्तीफा दे दिया। अचानक दिए इस्तीफे के पीछे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। हांलाकि इस तरह अचानक पद छोड़ने पर विपक्षी दलों ने सरकार को जमकर घेरा था। लगातार सभी सरकार पर इस बात का दबाव बना रहे थे कि ऑखिर क्या कारण है कि सुबह अपना कार्यकाल पूरा करने की बात करने वाले धनखड़ ने अचानक देर शाम इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे को लेकर विपक्ष ने कई दिनों तक बवाल किया।

खुलकर आई थी कई वजहें
हांलाकि धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह स्वास्थ्यगत कारण बताए गए। लेकिन परदे के पीछे ऐसे कई कारण सामने आए जो अचानक हुए इस्तीफे की वजह बने। बताया जा रहा था कि धनखड़ की केंद्र सरकार के साथ बन नहीं रही थी। सदन की कारवाई के समय भी धनखड़ के ओर से विपक्ष के नेताओ को ज्यादा वक्त देने की बात करना और कुछ ऐसे बिल को बहस के लिए ग्राह्य कर लेना जो सरकार की मंशा के अनुरूप नहीं थे। इस तरह के कई सारे कारणों के चलते धनख़ड़ वे इस्तीफा दिया था। धनख़ड़ के इस्तीफे के बाद किसी तरह का कोई बिदाई समारोह भी नहीं हुआ था।

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