सपा में बगावत पर गिरी गाज़: अखिलेश यादव ने तीन विधायकों को किया पार्टी से बाहर
उत्तरप्रदेश में समजावादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव Akhilesh Yadav ने अपनी ही पार्टी के तीन विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। तीनों विधायक मनोज कुमार पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। ये तीनों वही विधायक हैं जिन्होंने 2024 फरवरी में पार्टी के खिलाफ वोट किया था। ये वो राज्यसभा की सीट के लिए हो रहे थे। इन तीनों विधायकों ने अपना वोट बीजेपी के पक्ष में दिया। उसी के बाद से पार्टी की नजरों में ये तीनों आ गए और इन पर कारवाई हुई।
कारवाई पर क्या कहा समाजवादी पार्टी के नेताओं ने
समाजवादी पार्टी Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव ने तीनो विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया इसके बाद से लगातार चर्चाओं का बाजार गरम है। सवाल ये भी है कि क्रास वोटिंग की कारवाई पूरे डेढ साल बाद क्यों । इसके अलावा इन विधायकों ने ही नहीं बल्कि इनके साथ चार और विधायकों ने भी क्रास वोट किया था। क्रास वोटिंग में राकेश पांडेय,पूजा पाल,आशुतोष मौर्य और विनोद चर्तुवेदी का भी नाम शामिल है लेकिन पार्टी इनके खिलाफ कोई कारवाई नहीं की गई। पार्टी ने उन विधायकों पर कोई कारवाई क्यों नहीं की। हांलाकि समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि ये तीनों विधायक समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले के खिलाफ बोल रहे थे जिसके चलते पार्टी ने उनको बाहर का रास्ता दिखाया।
राज्यसभा चुनावों में की थी क्रास वोटिंग
2024 में फरवरी में हुए राज्यसभा चुनावों में इन सभी विधायकों ने पार्टी के खिलाफ वोटिंग की थी। पार्टी के खिलाफ वोट करने के चलते बीजेपी के सांसद की राज्यसभा में दो वोट से जीत हो गई थी। हांलाकि उस समय लोकसभा चुनाव सिर पर थे जिसके चलते पार्टी ने किसी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। अब पार्टी ने कारवाई करते हुए इनको बाहर का रास्ता दिखा दिया।
पंचायत चुनावों से पहले संगठन की मजबूती पर जोर
दरअसल उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनावों को ज्यादा वक्त नहीं बचा है। इससे पहले प्रदेश में पंचायत चुनाव हो रहे हैं। पंचायत चुनावों के साथ साथ सभी दल विधानसभा की तैयारियों में जुट रहे है। उससे पहले सभी पार्टी में अंदर अनुशासन को दुरूस्त करना चाहते है यही कारण है कि देर से सही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने तीन विधायकों पर अनुशासन का डंडा चलाया। राजनैतिक दलों का मानना है कि पंचायत चुनावों में संगठन को और मजबूत किया जाए जिससे विधानसभा चुनावों में जीत की रहा आसान हो ।




