अखिलेश यादव Akhilehs Yadav की मस्जिद में मीटिंग पर सियासत गरम: अब उसी मस्जिद में बीजेपी की बैठक का ऐलान

राजनीति का रंग अब मस्जिदों तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की संसद भवन के पास एक मस्जिद में मीटिंग ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे संविधान का उल्लंघन बताते हुए जमकर हमला बोला है। अब बीजेपी ने भी जवाबी रणनीति के तहत 25 जुलाई को उसी मस्जिद में अपनी बैठक करने का ऐलान कर दिया है। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

अखिलेश की मीटिंग ने पकड़ा सियासी तूल
22 जुलाई को संसद भवन के पास एक मस्जिद में अखिलेश यादव ने सपा नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में उनकी पत्नी डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अन्य सांसद मौजूद थे। धर्मेंद्र यादव ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया आई।

बीजेपी का पलटवार – संविधान का उल्लंघन
यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का राजनीतिक इस्तेमाल संविधान के खिलाफ है। उन्होंने सपा को “नमाजवादी पार्टी” कहते हुए कटाक्ष किया और कहा कि सपा को संविधान में भरोसा नहीं।

अखिलेश का जवाब – “आस्था जोड़ती है, मैं उसी के साथ हूं”
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि आस्था लोगों को जोड़ती है और वे उसी के साथ हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा – “बीजेपी को मीठा पसंद नहीं तो क्या हम मीठा खाना छोड़ दें?”

अब 25 जुलाई को बीजेपी की बैठक उसी मस्जिद में
बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा प्रमुख जमाल सिद्दीकी ने एलान किया कि नमाज़-ए-जुमा के बाद 25 जुलाई को उसी मस्जिद में बीजेपी की बैठक होगी। इस कदम को बीजेपी की जवाबी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि अन्य दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

 

 

 

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